‘पुलिस अंकल गंदे हैं। दीदी को बाइक से बैठाकर ले गए और ऊपर भेज दिया। पापा बता रहे हैं, अब वो कभी लौटकर नहीं आएगी। वो रोज मुझे पेंटिंग करना सिखाती थी। उसका बैग अब मेरे पास है। कॉपी-किताब से पढ़ूंगी।’ गोरखपुर में सिपाही अभिषेक यादव (35) की दरिंदगी की शिकार 10 साल की बच्ची अब इस दुनिया में नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम शुक्रवार (31 जुलाई) को उसके घर पहुंची। यहां उसका स्कूल बैग लेकर 5 और 7 साल की उसकी छोटी बहनें खेल रही थीं। घर के बरामदे में बच्ची की स्कूल ड्रेस और बैग रखा था। जिन्हें बार-बार देखकर छोटी बहनें अपनी बड़ी बहन को याद कर रही थीं। दो छोटी बहनें घर में भूखी-प्यासी भटक रही थीं। आते-जाते लोग चिप्स के पैकेट थमा कर चले जाते थे। वहीं, 13 साल की बड़ी बहन जिला अस्पताल में मां की सेवा कर रही है। बच्ची की मां जिला अस्पताल में भर्ती हैं, भाई का जन्म हुआ है। लेकिन, घर में गाने-बजाने की जगह रोने-चिल्लाने की आवाजें आ रही हैं। घर के अंदर बैठी बुजुर्ग दादी अपनी पोती को याद कर चीखने लगती हैं। ई-रिक्शा चलाने वाले पिता पुलिस कार्रवाई में उलझे हैं। सरकारी स्कूल में 5वीं क्लास में पढ़ती थी बच्ची सिपाही की दरिंदगी की शिकार 10 साल की बच्ची डॉक्टर बनना चाहती थी। वह बेतियाहाता इलाके के सरकारी स्कूल में 5वीं में पढ़ती थी। क्लास टीचर का कहना है, पढ़ने में बहुत तेज थी। जो भी होमवर्क दो, स्कूल में ही पूरा कर लेती थी। कुछ भी पूछो, तो जवाब देने के लिए सबसे पहले हाथ उठा देती थी। सिपाही 28 जुलाई को बच्ची का अपहरण कर श्मशान घाट ले गया। वहां रेप के बाद सिपाही ने उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी। घटना वाले दिन भी बच्ची सुबह स्कूल गई थी। लौटकर घर आई, तो ड्रेस निकालकर बरामदे में टांग दी। लोवर टी-शर्ट पहनकर खेलने लगी। शाम के समय बड़ी बहन के सीने में दर्द होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पिता और मौसी भर्ती बच्ची के साथ थे। इधर, घर पर 10 साल की बच्ची ने खाना बनाया। फिर रात में 7 साल की छोटी बहन को लेकर खाना देने जिला अस्पताल गई। पिता का कहना था कि उसे होमवर्क पूरा करना था, इसलिए वह जल्दी घर पहुंचना चाहती थी। पानी लेने गई तो सिपाही ने फुसलाकर बाइक पर बैठाया 28 जुलाई (मंगलवार) की रात अस्पताल में पानी लेने निकली बच्ची से सिपाही की मुलाकात हुई। उसने बच्ची को घर छोड़ने के बहाने फुसलाकर बाइक पर बैठा लिया। शहर के 7 चौराहों पर लगे सीसीटीवी, मोबाइल की लोकेशन और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से 44 घंटों की ऐसी टाइमलाइन तैयार हुई, जिसमें हर पड़ाव की एक-एक कड़ी जुड़ती गई। अस्पताल से शुरू हुआ यह सफर चिउटहा श्मशान घाट पर शव मिलने और कुछ घंटे बाद अंतिम संस्कार के साथ खत्म हो गया। जांच के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 9:30 बजे बच्ची से सिपाही मिला था। पुलिस का अनुमान है कि रात 10:02 बजे के आसपास अपहरण और वारदात की शुरुआत हुई। इसके बाद सिपाही बच्ची को बाइक पर बैठाकर अस्पताल से निकल गया। हत्या कर सिपाही तेज रफ्तार में बाइक से लौटते दिखा जांच में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी फुटेज की रही। जिला अस्पताल से लेकर शास्त्री चौक, कचहरी, टाउनहॉल, खूनीपुर, लालडिग्गी और डोमिनगढ़ महेशरापुल तक लगे कैमरों में आरोपी की बाइक लगातार कैद हुई। हर फुटेज में बच्ची सिपाही के पीछे बैठी दिखाई देती है। रात 11:07 बजे डोमिनगढ़ महेशरापुर पुल के पास वह आखिरी बार जीवित नजर आई। इसके बाद उसकी कोई तस्वीर किसी कैमरे में कैद नहीं हुई। फुटेज से यह भी सामने आया है कि सिपाही वारदात के बाद मोहरीपुर, बरगदवा, लच्छीपुर, 10 नंबर बोरिंग, गोरखनाथ ओवरब्रिज और धर्मशाला होते हुए पुलिस लाइंस स्थित अपने घर तक पहुंचा। इसके लिए एक टीम जिला अस्पताल से जाने वाले रास्ते और दूसरी टीम गोरखनाथ से महेशरा पुल तक के कैमरों को खंगालने में लगी थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, जाते समय सिपाही पूरी तरह सामान्य दिखाई दिया, जबकि लौटते समय उसकी बाइक की रफ्तार काफी तेज थी। पुलिस ने सभी फुटेज को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर लिया है। सिपाही ने 9 घंटे तक बंद रखा मोबाइल, सोची-समझी साजिश जांच में सामने आया है कि सिपाही अभिषेक यादव ने वारदात से ठीक पहले रात 9 बजे अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था। 29 जुलाई (बुधवार) की सुबह 6 बजे उसने फोन दोबारा ऑन किया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन विश्लेषण में मोबाइल की अंतिम सक्रिय लोकेशन जिला अस्पताल के आसपास मिली है। पुलिस ने मोबाइल जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। जांच अधिकारियों का मानना है कि वारदात से पहले मोबाइल बंद करना इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य छिपाने और पुलिस की निगरानी से बचने की सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है। कंट्रोल रूम सक्रिय रहा, चौकी स्तर पर कार्रवाई में हुई देरी मंगलवार रात 12.52 बजे बच्ची के पिता ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। महज 10 मिनट के भीतर पुलिस सक्रिय हो गई। रात 1.03 बजे कंट्रोल रूम की टीम अस्पताल पहुंच गई। इसके बावजूद स्थानीय चौकी पुलिस बुधवार सुबह करीब 11 बजे मौके पर पहुंची। आधे घंटे बाद कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की। FIR बुधवार दोपहर 2.02 बजे दर्ज की गई। शुरुआती स्तर पर हुई इस देरी को भी जांच का अहम बिंदु माना जा रहा है। इधर, अपहरण के करीब 36 घंटे बाद गुरुवार (30 जुलाई) सुबह 6.30 बजे चिउटहा श्मशान घाट पर बच्ची का शव मिला। फिर सुबह 7:30 बजे उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने 7.45 बजे मृत घोषित कर दिया। दोपहर 2.30 बजे पोस्टमॉर्टम हुआ। शाम 5.45 बजे शव सीधे राजघाट ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार कर दिया गया। जांच के लिए भेजा गया डीएनए सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया कि अब अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए केस डायरी तैयार की जा रही है। चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की डिजिटल ट्रेल, घटनास्थल से मिले फोरेंसिक साक्ष्य, बरामदगी मेमो और गवाहों के बयान को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। DNA और अन्य वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद विवेचना को अंतिम रूप दिया जाएगा। बच्ची और आरोपी सिपाही का DNA सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि अदालत में साक्ष्यों की कड़ी मजबूत रखने के लिए केवल महत्वपूर्ण गवाहों को ही शामिल किया जाएगा। थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज पर कार्रवाई जिला अस्पताल से अपहरण और मासूम की हत्या के मामले में SSP डॉ. कौस्तुभ ने शुक्रवार को कोतवाली प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। वहीं, नगर निगम चौकी प्रभारी महिला दरोगा दीपशिखा को कर्तव्यों के प्रति घोर उदासीनता, लापरवाही पाए जाने पर सस्पेंड कर दिया। —————————— ये खबर भी पढ़िए- बेटी का अंतिम-संस्कार, 3 घंटे बाद मां को बेटा हुआ, कहती थी- भाई होगा तो राखी बाधूंगी गोरखपुर में सिपाही ने जिस 10 साल की बच्ची को श्मशान में रेप करके मार डाला था, उसका गुरुवार शाम 6 बजे अंतिम संस्कार हुआ। इसके 3 घंटे बाद मां ने एक बेटे को जन्म दिया। मां-बहनों ने बच्चे का चेहरा देखा तो फूट-फूटकर रोने लगीं। कहने लगीं कि बच्ची की इच्छा थी कि इस बार रक्षा बंधन पर अपने भाई को राखी बांधे, लेकिन इससे पहले ही दरिंदे ने उसे छीन लिया। पढ़ें पूरी खबर…