अल्मोड़ा के रवि टम्टा की बनाई हपिडा स्काइनेक्स दो दिन में 3 बार उड़ चुकी है। प्रशासन ने आज भी अपनी निगरानी में ट्रायल कराया है। बीते कल सीएम धामी ने भी वीडियो कॉल पर रवि से बात की और उनके प्रयोग की तारीफ की। लेकिन अब इस पूरे इनोवेशन पर ही सवाल खड़ा हो गया है। यूपी के पूर्व राज्य मंत्री आईपी सिंह ने हपिडा स्काइनेक्स को चीन के फ्लाइंग व्हीकल की कॉपी बताते हुए कहा है कि चीन से ऐसे ड्रोन टैक्सी जैसे वाहन सस्ते में मंगाए जा सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि ये चीन के खिलौने हैं। उनके इस बयान के बाद सवाल यह है कि अल्मोड़ा के काफलीखान गांव में तैयार हुआ हपिडा स्काइनेक्स कितना स्वदेशी है और इसमें चीन की तकनीक या उपकरणों की कितनी भूमिका है। खास बात ये है कि रवि खुद बता चुके हैं कि वह करीब दो साल पहले चीन गए थे, वहां के तकनीकी प्रयोगों को करीब से देखा था और फ्लाइंग व्हीकल के लिए कुछ उपकरण चीन से लेकर आए थे। हालांकि रवि का दावा है कि उन्होंने इसका इंजन तमिलनाडु से मंगाया। बाकी काम उन्होंने अपनी तकनीकी समझ और इंटरनेट से जुटाई जानकारी के आधार पर किया। अब पढ़िए रवि की कहानी और उनके इस इनोवेशन के बारे में …
2015 में सपना देखा, 2025 का हेलिकॉप्टर नहीं उड़ा तो बदला रास्ता रवि बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही हवा में उड़ने का शौक था। वर्ष 2015 में उनके मन में उड़ने वाली गाड़ी बनाने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने इसी दिशा में प्रयोग शुरू किए और अपनी कंपनी हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड शुरू की। 2025 में उन्होंने एक सिंगल सीटर हेलिकॉप्टर भी बनाया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। इस असफलता के बाद रवि ने प्रयोग बंद नहीं किया। उन्होंने तय किया कि अब फ्यूचर स्काई मोबिलिटी पर काम करना है। उनका कहना है कि भविष्य में लोग सिर्फ सड़कों पर ही क्यों निर्भर रहें? सड़क पर ट्रैफिक, प्रदूषण और मेडिकल इमरजेंसी जैसी कई दिक्कतें हैं। अगर हवा के रास्ते व्यक्तिगत परिवहन का विकल्प तैयार हो सके तो आने वाले समय में यह काफी उपयोगी हो सकता है। चीन गए, तकनीक देखी; कुछ उपकरण लाए, इंजन तमिलनाडु से मंगाया हपिडा स्काइनेक्स किसी तैयार मशीन को खरीदकर तैयार नहीं किया गया। रवि के मुताबिक उन्होंने इसके लिए तकनीकी जानकारी इंटरनेट से जुटाई। अलग-अलग प्रयोगों और उपलब्ध तकनीक को समझने के बाद अपने स्तर पर प्रोटोटाइप तैयार किया। करीब दो साल पहले चीन की यात्रा के दौरान उन्होंने वहां हो रहे तकनीकी नवाचारों को करीब से देखा। फ्लाइंग व्हीकल के लिए जरूरी कुछ उपकरण वह चीन से लेकर आए। वहीं इसका इंजन तमिलनाडु से मंगाया गया। इसके बाद गांव में उपलब्ध संसाधनों, जुटाए गए उपकरणों और अपनी तकनीकी समझ के आधार पर उन्होंने हपिडा स्काइनेक्स को तैयार किया। रवि इसे ड्रोन तकनीक के उन्नत रूप की तरह देखते हैं और भविष्य में इसे व्यक्तिगत हवाई परिवहन के विकल्प के रूप में विकसित करना चाहते हैं। इसे बनाने में काफी पैसा लगा, लेकिन रवि ने अभी हिसाब नहीं जोड़ा रवि के मुताबिक हपिडा स्काइनेक्स को तैयार करने में अब तक काफी पैसा खर्च हो चुका है। हालांकि, उन्होंने अभी तक कुल खर्च का पूरा हिसाब नहीं लगाया है। यह प्रोजेक्ट किसी बड़ी कंपनी की लैब में तैयार नहीं हुआ। इसके लिए अलग-अलग जगहों से उपकरण जुटाए गए, कुछ चीन से लाए गए और इंजन तमिलनाडु से मंगाया गया। इसके बाद लंबे समय तक प्रयोग और बदलाव किए गए। करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद मौजूदा प्रोटोटाइप तैयार हो सका। 6 अगस्त को निजी ट्रायल, वीडियो सामने आया तो प्रशासन सक्रिय हुआ हपिडा स्काइनेक्स का निजी स्तर पर सफल परीक्षण 6 अगस्त को हुआ। रवि ने खुद इसे उड़ाकर देखा और इसका वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंचा और इसके बाद पुलिस तथा जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया। 7 अगस्त को प्रशासन की टीम ने रवि से संपर्क किया। जिलाधिकारी से बातचीत के बाद एसएसपी की निगरानी में इसका दोबारा परीक्षण कराया गया। इसी दिन रात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉल के जरिए रवि से बात की। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयोग की सराहना की और इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। इसके बाद जिला प्रशासन के कहने पर हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में लोगों की मौजूदगी में भी इसका परीक्षण कराया गया। डीएम अंशुल सिंह और एसएसपी चंद्रशेखर आर. घोड़के की मौजूदगी में रवि ने हपिडा स्काइनेक्स को उड़ाया। यानी दो दिनों में यह तीन बार उड़ान भरकर दिखाई जा चुकी है। सिंगल सीटर जेट जैसी बनावट, आठ पंखे; सुरक्षा के लिए पैराशूट हपिडा स्काइनेक्स फिलहाल एक सिंगल सीटर प्रोटोटाइप है। इसकी बनावट जेट जैसी सिंगल-सीटर व्यवस्था वाली है। चारों तरफ कुल आठ पंखे लगे हैं, जिनकी मदद से यह जमीन से ऊपर उठता है। रवि ने इसके निर्माण में सुरक्षा का भी ध्यान रखा है। आपात स्थिति के लिए इसमें पैराशूट सिस्टम लगाया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर अपने आप खुलने के लिए डिजाइन किया गया है। परीक्षण के दौरान यह करीब एक मिनट तक हवा में रहा और लगभग 20 फीट की ऊंचाई तक गया। रवि का दावा है कि इसकी अधिकतम गति करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। हालांकि, अभी यह प्रोटोटाइप स्तर पर है। इसलिए इसे आम लोगों के इस्तेमाल में लाने से पहले सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और प्रदर्शन के कई चरणों में परीक्षण जरूरी होंगे। अल्मोड़ा से काफलीखान तक 40 किमी उड़ाने की थी तैयारी रवि ने पहले अल्मोड़ा से अपने गांव काफलीखान तक करीब 40 किलोमीटर की उड़ान भरकर इसका परीक्षण करने की योजना बनाई थी। उनका दावा था कि यह दूरी करीब 12 मिनट में पूरी की जा सकती थी। लेकिन जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण यह उड़ान नहीं हो सकी। इसके बाद नियंत्रित और सुरक्षित परिस्थितियों में इसका परीक्षण किया गया। अब रवि प्रोटोटाइप की सुरक्षा, क्षमता और प्रदर्शन को और बेहतर करने के लिए आगे कई परीक्षण करना चाहते हैं। फ्लाइंग व्हीकल से पहले भी कई प्रयोग कर चुके हैं हपिडा स्काइनेक्स रवि का पहला तकनीकी प्रयोग नहीं है। इससे पहले वह हेलिकॉप्टर, वन विभाग के लिए अग्निशमन उपकरण, दिव्यांगों के लिए विशेष छड़ी और स्टिक मोबाइल चार्जर जैसे उपकरण तैयार कर चुके हैं। उन्होंने हपिडा पाइन पीट मशीन भी विकसित की है, जिसकी आपूर्ति वन विभाग को की जा रही है। करीब सात साल पहले उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को कम समय में चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन भी तैयार की थी। रवि काफलीखान में जूनियर हाईस्कूल तक पढ़े हैं। इसके बाद उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल से कला संकाय में स्नातक किया। उनके पिता हरीश राम मोटर मैकेनिक हैं। रवि बताते हैं कि उनके ज्यादातर तकनीकी प्रयोगों में इंटरनेट से मिली जानकारी ने मदद की। उन्होंने खुद चीजों को समझा, प्रयोग किए और फिर उनमें बदलाव करते गए। अब पेटेंट और डीजीसीए की तैयारी हपिडा स्काइनेक्स अभी प्रोटोटाइप है। इसे आगे विकसित करने के बाद रवि पेटेंट कराने की तैयारी कर रहे हैं। इसके संचालन और हवाई सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए से भी संपर्क करने की योजना है। रवि का दावा है कि उनका लक्ष्य व्यक्तिगत हवाई परिवहन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन अब इस दावे के साथ एक दूसरा सवाल भी जुड़ गया है- हपिडा स्काइनेक्स में कितना स्वदेशी डिजाइन है और चीन से आए उपकरणों या वहां देखी गई तकनीक का कितना प्रभाव है? फिलहाल पूर्व राज्य मंत्री के आरोप के अलावा ऐसा कोई स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण सामने नहीं है, जो इसे चीनी कॉपी साबित करता हो। इसलिए इस दावे की पुष्टि तकनीकी जांच और दस्तावेजों से ही हो सकेगी। ———————— ये खबर भी पढ़ें… हल्द्वानी की रेनू के बाल 8 फीट 10 इंच लंबे:दुनिया में सबसे लंबे बालों का रिकॉर्ड बनाया, यूक्रेन की आलिया नासिरोवा को पीछे छोड़ा हल्द्वानी की रेनू धरियाल ने अपने 8 फीट 10 इंच लंबे बालों के चलते दुनिया में पहचान बनाई है। उनके बालों की लंबाई 271.50 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। इसके साथ ही रेनू का नाम प्रतिष्ठित जीनियस वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। उन्होंने यूक्रेन की आलिया नासिरोवा का रिकॉर्ड तोड़ा है। आलिया के बाल 257.33 सेंटीमीटर यानी 8 फीट 5.3 इंच लंबे थे। (पढ़ें पूरी खबर)
2015 में सपना देखा, 2025 का हेलिकॉप्टर नहीं उड़ा तो बदला रास्ता रवि बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही हवा में उड़ने का शौक था। वर्ष 2015 में उनके मन में उड़ने वाली गाड़ी बनाने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने इसी दिशा में प्रयोग शुरू किए और अपनी कंपनी हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड शुरू की। 2025 में उन्होंने एक सिंगल सीटर हेलिकॉप्टर भी बनाया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। इस असफलता के बाद रवि ने प्रयोग बंद नहीं किया। उन्होंने तय किया कि अब फ्यूचर स्काई मोबिलिटी पर काम करना है। उनका कहना है कि भविष्य में लोग सिर्फ सड़कों पर ही क्यों निर्भर रहें? सड़क पर ट्रैफिक, प्रदूषण और मेडिकल इमरजेंसी जैसी कई दिक्कतें हैं। अगर हवा के रास्ते व्यक्तिगत परिवहन का विकल्प तैयार हो सके तो आने वाले समय में यह काफी उपयोगी हो सकता है। चीन गए, तकनीक देखी; कुछ उपकरण लाए, इंजन तमिलनाडु से मंगाया हपिडा स्काइनेक्स किसी तैयार मशीन को खरीदकर तैयार नहीं किया गया। रवि के मुताबिक उन्होंने इसके लिए तकनीकी जानकारी इंटरनेट से जुटाई। अलग-अलग प्रयोगों और उपलब्ध तकनीक को समझने के बाद अपने स्तर पर प्रोटोटाइप तैयार किया। करीब दो साल पहले चीन की यात्रा के दौरान उन्होंने वहां हो रहे तकनीकी नवाचारों को करीब से देखा। फ्लाइंग व्हीकल के लिए जरूरी कुछ उपकरण वह चीन से लेकर आए। वहीं इसका इंजन तमिलनाडु से मंगाया गया। इसके बाद गांव में उपलब्ध संसाधनों, जुटाए गए उपकरणों और अपनी तकनीकी समझ के आधार पर उन्होंने हपिडा स्काइनेक्स को तैयार किया। रवि इसे ड्रोन तकनीक के उन्नत रूप की तरह देखते हैं और भविष्य में इसे व्यक्तिगत हवाई परिवहन के विकल्प के रूप में विकसित करना चाहते हैं। इसे बनाने में काफी पैसा लगा, लेकिन रवि ने अभी हिसाब नहीं जोड़ा रवि के मुताबिक हपिडा स्काइनेक्स को तैयार करने में अब तक काफी पैसा खर्च हो चुका है। हालांकि, उन्होंने अभी तक कुल खर्च का पूरा हिसाब नहीं लगाया है। यह प्रोजेक्ट किसी बड़ी कंपनी की लैब में तैयार नहीं हुआ। इसके लिए अलग-अलग जगहों से उपकरण जुटाए गए, कुछ चीन से लाए गए और इंजन तमिलनाडु से मंगाया गया। इसके बाद लंबे समय तक प्रयोग और बदलाव किए गए। करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद मौजूदा प्रोटोटाइप तैयार हो सका। 6 अगस्त को निजी ट्रायल, वीडियो सामने आया तो प्रशासन सक्रिय हुआ हपिडा स्काइनेक्स का निजी स्तर पर सफल परीक्षण 6 अगस्त को हुआ। रवि ने खुद इसे उड़ाकर देखा और इसका वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंचा और इसके बाद पुलिस तथा जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया। 7 अगस्त को प्रशासन की टीम ने रवि से संपर्क किया। जिलाधिकारी से बातचीत के बाद एसएसपी की निगरानी में इसका दोबारा परीक्षण कराया गया। इसी दिन रात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉल के जरिए रवि से बात की। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयोग की सराहना की और इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। इसके बाद जिला प्रशासन के कहने पर हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में लोगों की मौजूदगी में भी इसका परीक्षण कराया गया। डीएम अंशुल सिंह और एसएसपी चंद्रशेखर आर. घोड़के की मौजूदगी में रवि ने हपिडा स्काइनेक्स को उड़ाया। यानी दो दिनों में यह तीन बार उड़ान भरकर दिखाई जा चुकी है। सिंगल सीटर जेट जैसी बनावट, आठ पंखे; सुरक्षा के लिए पैराशूट हपिडा स्काइनेक्स फिलहाल एक सिंगल सीटर प्रोटोटाइप है। इसकी बनावट जेट जैसी सिंगल-सीटर व्यवस्था वाली है। चारों तरफ कुल आठ पंखे लगे हैं, जिनकी मदद से यह जमीन से ऊपर उठता है। रवि ने इसके निर्माण में सुरक्षा का भी ध्यान रखा है। आपात स्थिति के लिए इसमें पैराशूट सिस्टम लगाया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर अपने आप खुलने के लिए डिजाइन किया गया है। परीक्षण के दौरान यह करीब एक मिनट तक हवा में रहा और लगभग 20 फीट की ऊंचाई तक गया। रवि का दावा है कि इसकी अधिकतम गति करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। हालांकि, अभी यह प्रोटोटाइप स्तर पर है। इसलिए इसे आम लोगों के इस्तेमाल में लाने से पहले सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और प्रदर्शन के कई चरणों में परीक्षण जरूरी होंगे। अल्मोड़ा से काफलीखान तक 40 किमी उड़ाने की थी तैयारी रवि ने पहले अल्मोड़ा से अपने गांव काफलीखान तक करीब 40 किलोमीटर की उड़ान भरकर इसका परीक्षण करने की योजना बनाई थी। उनका दावा था कि यह दूरी करीब 12 मिनट में पूरी की जा सकती थी। लेकिन जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण यह उड़ान नहीं हो सकी। इसके बाद नियंत्रित और सुरक्षित परिस्थितियों में इसका परीक्षण किया गया। अब रवि प्रोटोटाइप की सुरक्षा, क्षमता और प्रदर्शन को और बेहतर करने के लिए आगे कई परीक्षण करना चाहते हैं। फ्लाइंग व्हीकल से पहले भी कई प्रयोग कर चुके हैं हपिडा स्काइनेक्स रवि का पहला तकनीकी प्रयोग नहीं है। इससे पहले वह हेलिकॉप्टर, वन विभाग के लिए अग्निशमन उपकरण, दिव्यांगों के लिए विशेष छड़ी और स्टिक मोबाइल चार्जर जैसे उपकरण तैयार कर चुके हैं। उन्होंने हपिडा पाइन पीट मशीन भी विकसित की है, जिसकी आपूर्ति वन विभाग को की जा रही है। करीब सात साल पहले उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को कम समय में चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन भी तैयार की थी। रवि काफलीखान में जूनियर हाईस्कूल तक पढ़े हैं। इसके बाद उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल से कला संकाय में स्नातक किया। उनके पिता हरीश राम मोटर मैकेनिक हैं। रवि बताते हैं कि उनके ज्यादातर तकनीकी प्रयोगों में इंटरनेट से मिली जानकारी ने मदद की। उन्होंने खुद चीजों को समझा, प्रयोग किए और फिर उनमें बदलाव करते गए। अब पेटेंट और डीजीसीए की तैयारी हपिडा स्काइनेक्स अभी प्रोटोटाइप है। इसे आगे विकसित करने के बाद रवि पेटेंट कराने की तैयारी कर रहे हैं। इसके संचालन और हवाई सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए से भी संपर्क करने की योजना है। रवि का दावा है कि उनका लक्ष्य व्यक्तिगत हवाई परिवहन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन अब इस दावे के साथ एक दूसरा सवाल भी जुड़ गया है- हपिडा स्काइनेक्स में कितना स्वदेशी डिजाइन है और चीन से आए उपकरणों या वहां देखी गई तकनीक का कितना प्रभाव है? फिलहाल पूर्व राज्य मंत्री के आरोप के अलावा ऐसा कोई स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण सामने नहीं है, जो इसे चीनी कॉपी साबित करता हो। इसलिए इस दावे की पुष्टि तकनीकी जांच और दस्तावेजों से ही हो सकेगी। ———————— ये खबर भी पढ़ें… हल्द्वानी की रेनू के बाल 8 फीट 10 इंच लंबे:दुनिया में सबसे लंबे बालों का रिकॉर्ड बनाया, यूक्रेन की आलिया नासिरोवा को पीछे छोड़ा हल्द्वानी की रेनू धरियाल ने अपने 8 फीट 10 इंच लंबे बालों के चलते दुनिया में पहचान बनाई है। उनके बालों की लंबाई 271.50 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। इसके साथ ही रेनू का नाम प्रतिष्ठित जीनियस वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। उन्होंने यूक्रेन की आलिया नासिरोवा का रिकॉर्ड तोड़ा है। आलिया के बाल 257.33 सेंटीमीटर यानी 8 फीट 5.3 इंच लंबे थे। (पढ़ें पूरी खबर)