अतीक की कब्र बेटे उमर-अली ने पहली बार देखी:तीनों भाई सिर रखकर खूब रोए, भाई का जनाजा उठाया; बुआ से बोले- ये क्या हो गया

प्रयागराज में अतीक अहमद के सबसे छोटे 21 साल के बेटे अबान को 8 अगस्त को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। जेल में बंद उसके दोनों बड़े भाई अली-उमर भी पैरोल पर जनाजे में शामिल हुए। अतीक के तीनों बेटे उमर, अली और अहजम 4 साल बाद एक साथ मिले, तो एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखकर खूब रोए। अबान को सुपुर्द-ए-खाक करने के गम में तो उनके आंसू बह ही रहे थे, लेकिन जब वे अबान के बगल दफन अपने पिता अतीक की कब्र पर पहुंचे तो उस पर सिर रखकर काफी देर तक रोते रहे। अप्रैल-2023 में पिता और चाचा अशरफ की पुलिस सुरक्षा में गोली मारकर हत्या की गई थी। तब भी उमर और अली जेल में थे। एनकाउंटर में मारा गया उनका भाई असद भी अतीक के बगल में दफन है। पिता के बाद दोनों असद और अशरफ की कब्र पर भी माथा रखकर खूब रोए। रोते-रोते तीनों एक-दूसरे से लिपट गए। ऐसे में कब्रों के पास जमा भीड़ के भी आंसू छलक पड़े। लोग तेजी से कुरआन की सूरह पढ़ने लगे। फिर फातेहा पढ़ने का ऐलान हुआ, जिससे उनकी हिचकियां बंद हों। अबान को सुपुर्द-ए-खाक करने के बाद उमर-अली ने एक घंटे तक भाई अहजम और बुआ से बात की। सभी घंटेभर रोते रहे। बुआ से कहा- ये सब क्या हो गया? पढ़िए अबान के जनाजे में क्या-क्या हुआ… सबसे पहले 4 तस्वीरें देखिए- आधे घंटे तक वैन में बैठकर उमर-अली एक-दूसरे की गाड़ी निहारते रहे कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक की तैयारियों के बीच सबसे पहले शनिवार शाम 4.34 बजे पुलिस की 6 गाड़ियों के साथ लखनऊ जेल में बंद उमर पहुंचा। तब तक जनाजा नहीं आया था, इसलिए उमर को वैन में ही बैठाए रखा गया। तब तक भीड़ उमर की वैन को घेरकर खड़ी रही। इस दौरान गेट पर एंट्री रोक दी गई थी। भीड़ बेकाबू हो गई और पहली बार बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुस आई। करीब आधे घंटे बाद शाम 5.05 बजे 6 गाड़ियों की सुरक्षा के बीच झांसी जेल से अली की वैन पहुंची। अली की वैन उमर की वैन के पीछे खड़ी कर दी गई। इस बीच दोनों भाई महज एक-दूसरे की वैन को ही देखते रहे।
अहजम रोते हुए कब्रिस्तान पहुंचा, 2 लड़के उसे संभाले रहे शाम 5.51 बजे अबान के जनाजे के आगे भारी भीड़ के साथ अहजम ने कब्रिस्तान में एंट्री की। अहजम रोते हुए चल नहीं पा रहा था। 2 लड़के कंधे और कमर में हाथ डालकर उसे सहारा देते हुए अंदर ले गए। अहजम के साथ रही भीड़ अली और उमर को 4 साल बाद देखने के लिए बढ़ी, तो पुलिस ने रोक लिया। इससे वहां हंगामा हो गया। एक बार फिर बैरिकेडिंग तोड़ दी गई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को खदेड़ा, लाठी पटकी, थप्पड़ मारे, बंदूक की बट से मारा। इसी बीच अहजम सीधे अली की वैन के करीब पहुंचा। वैन की खिड़की पर दोनों ने हाथ रखा और एक-दूसरे का हाथ छूने की कोशिश की। इस बीच अहजम अंगोछे से अपने आंसू भी पोछता रहा। पिता की तरह अली-उमर ने पगड़ी-रुमाल बांधे, अंगौछा लिए दिखे शाम 6.13 बजे अली को वैन से बाहर निकाला गया। इसी दौरान दूसरी वैन से उमर को नीचे उतरा गया। दोनों भाई सुरक्षा के बीच आमने-सामने हुए, तो एक-दूसरे के गले लग गए। अली ने काला कुर्ता पहन रखा था। अपने पिता अतीक की तरह सिर पर बड़ा रुमाल बांधा था और कंधे पर सफेद अंगौछा रखे था। जबकि उसके बड़े भाई उमर ने सिर पर सफेद पगड़ी बांध रखी थी। सफेद कुर्ता पहने उमर अली से लिपट गया। सिर पर रुमाल बांधने और सफेद गमछे को पगड़ी की तरह बांधने का शौकीन अतीक भी था। आगे उमर-अली और पीछे से अहजम, बुआ के बेटे ने जनाजा उठाया इसके बाद अहजम दोनों भाइयों उमर-अली के पास पहुंचा। तीनों गले लगे। उमर और अली को साथ लेकर अबान के जनाजे की तरफ गया। तब तक जनाजा जमीन पर रखा था। जनाजे को कंधा देने की शुरुआत परिवार के सगे लोगों से होती है। ऐसे में आगे के 2 पायों को उमर और अली ने पकड़ा, पीछे के पाए को अहजम और चौथे पाए को बुआ के बेटे ने पकड़ रखा था। इसके बाद जनाजे को कंधों पर मस्जिद के बगल उस जगह पर ले जाया गया, जहां जनाजे की नमाज के लिए भीड़ जमा थी। फिर जनाजे की नमाज के बाद अबान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। भगाए गए, लाठी खाई, लेकिन भीड़ डटी रही अबान की सड़क हादसे में मौत के बाद अतीक परिवार के लिए लोगों में सहानुभूति शनिवार को खुलकर सामने आई। एक तो 4 साल बाद अतीक के बेटे अली और उमर कसारी-मसारी आए। इसी में अहजम भी सार्वजनिक रूप से भीड़ के बीच मौजूद रहा। ऐसे में भीड़ चारों तरफ से कब्रिस्तन के अंदर पहुंचने को बेकरार दिखी। मेन गेट से एंट्री नहीं मिली, तो पीछे की तरफ से कब्रिस्तान की बाउंड्री तोड़कर लोग अंदर घुस आए। हर कोई जनाजे में शामिल होने के साथ ही उमर, अली और अहजम के करीब जाना चाहता था। जो कब्रिस्तान में आ गए, तो ठीक। उसके अलावा कई हजार लोग ऐसे थे, जिन्हें एंट्री नहीं मिली। ऐसे लोग कब्रिस्तान के चारों तरफ घेरा बनाए खड़े रहे। दोपहर से लेकर रात 8 बजे, जब तक अली-उमर की वैन निकल नहीं गई, भीड़ कब्रिस्तान को ही ताकती रही। ऐसे में कई बार बेकाबू भीड़ पर पुलिस को लाठी पटकनी पड़ी, लेकिन युवाओं की भीड़ इधर-उधर दौड़ लगाती रही। असल में अतीक और अशरफ की हत्या से 2 दिन पहले 13 अप्रैल, 2023 को असद झांसी में एनकाउंटर में मारा गया था। असद के शव को कंधा देने को भीड़ उमड़ी थी, लेकिन पुलिस की जबरदस्त सख्ती की वजह से उन्हें लौटना पड़ा था। फिर अतीक-अशरफ के जनाजे के लिए भीड़ उमड़ी थी, लेकिन पूरे शहर पश्चिमी में बैरिकेडिंग कर सबको रोक दिया गया था। 3 मौतों की कसक के बाद अब अबान की मौत पर सभी कब्रिस्तान पहुंचना चाहते थे। इमाम ने नहीं, भाई के जनाजे की उमर ने पढ़ाई नमाज कसारी-मसारी कब्रिस्तान में बहुत सारे मौलाना, मौलवी थे। वहां की मस्जिद के पेश इमाम भी थे। इसके बावजूद अबान के जनाजे की नमाज बड़े भाई उमर ने इमामत करते हुए पढ़ाई। इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा रही। असल में जेल जाने के बाद उमर ने दाढ़ी रख ली है। वह दिन भर कुरआन पाक की तिलावत करता रहता है। धार्मिक किताबें पढ़ता है। इसी वजह से उसने खुद इमामत करने को कहा। उमर ने अहजम को समझाया, बार-बार जेल मिलने मत आना अबान की कब्र पर मिट्‌टी देने के बाद तीनों भाइयों ने फातेहा पढ़ी। फिर 100 कदम की दूरी पर मस्जिद से सटाकर लगाए गए टेंट में पहुंचे। वहां बुआ परवीन कुरैशी व्हीलचेयर पर बैठी थीं। देखते ही लपक पड़े, सबसे पहले उमर ने उन्हें गले लगाया। बुआ ने उसका माथा चूमा। फिर अली भी लिपट कर रोने लगा। बोला- बुआ ये सब क्या हो गया? बुआ भी दोनों को गले लगाकर रो पड़ीं। एक-दूसरे के आंसू पोछने के बाद फिर घंटेभर बातचीत हुई। बुआ बोलीं- अल्लाह ने क्या कर दिया, क्या दिन देख रहे? अली ने कहा- परेशान न हों, इंशाल्लाह सब ठीक होगा। इसके बाद परिवार के लोगों के बारे में पूछा जाने लगा। मां शाइस्ता परवीन, चाची जैनब को लेकर सबसे ज्यादा बातें हुईं। सगे रिश्तेदार जो जेल में हैं, उन्हें लेकर बात हुई। उमर ने ये भी समझाया कि अहजम को अब बार-बार जेल आने की जरूरत नहीं। दोनों ने फिक्र जताई कि एक भाई बाहर है, वो अच्छे से रहे, सबको संभाले। जमानत को लेकर भी बातचीत हुई। ———————- ये खबर भी पढ़िए- अतीक का बेटा अली बोला- अब भाई भी छोड़ गया: झांसी जेल में 2 रातों से नहीं सोया; खाना नहीं खाया ‘मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई…।’ ये 10 शब्द माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान के हैं, जो उसने झांसी जेल पहुंचने से पहले एक दरोगा से फोन पर कहा था। इसके कुछ मिनट बाद ही अबान की मौत हो गई। अली को जब भाई के मौत की खबर मिली तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। बोला- ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया।’ वह पूरी रात करवटें बदलता रहा। रोता रहा। पढ़ें पूरी खबर…