बलिया के रसड़ा से 3 बार बसपा विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत अब बेटे प्रिंस यूकेश सिंह के हाथों में सौंपने की तैयारी साफ दिख रही है। बसपा प्रमुख मायावती ने न सिर्फ उन्हें राजनीतिक रूप से स्थापित करने का संकेत दिया है। बल्कि यूपी पदाधिकारियों की बैठक में पहली बार शामिल हुए युकेश को फ्रंटलाइन में जगह देकर यह भी साबित कर दिया कि पार्टी में उन्हें विशेष तवज्जो मिलेगी। वो सिर्फ उमाशंकर सिंह के उत्तराधिकारी नहीं, पार्टी का युवा चेहरा बनाए जा सकते हैं। उमाशंकर सिंह का 5 अगस्त, 2026 को ब्लड कैंसर से निधन हो गया था। 6 अगस्त को मायावती ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की थी। इस दौरान मायावती के 2 बार पैर छूकर आशीर्वाद लेने के दृश्य भी चर्चा में रहे थे। तब मायावती ने कहा था कि परिवार चाहे तो बेटे को राजनीति में आगे लाया जाएगा, पार्टी पूरा समर्थन करेगी। आज वही बात पार्टी कार्यालय में 75 जिलों की बैठक में दिखाई भी दी। जेन-जी का प्रतिनिधित्व और आकाश आनंद से ट्यूनिंग जेन-जी चेहरा बन सकते हैं- युकेश सिंह युवा हैं। उनकी उम्र करीब 26 साल है। बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद भी जेन-जी पीढ़ी से आते हैं। आकाश की तरह युकेश भी विदेश से पढ़कर आए हैं। दोनों के बीच उम्र और सोच की समानता से पार्टी में युवा नेतृत्व को मजबूती मिल सकती है। मायावती इस जोड़ी के जरिए न सिर्फ उमाशंकर सिंह की कमी को पूरा करना चाहती हैं, बल्कि पार्टी में युवा चेहरों को आगे बढ़ाकर बसपा अपने भविष्य की झलक भी दिखाने की कोशिश में है। बता दें, यूपी में जेन-जी वोटर करीब 2.07 करोड़ हैं। क्षत्रिय नेतृत्व की कमी पूरी करेंगे- सिर्फ इतना ही नहीं, मायावती बसपा में क्षत्रिय नेतृत्व की कमी भी दूर करना चाहती हैं। उमाशंकर सिंह पार्टी में क्षत्रिय चेहरे की भूमिका निभा रहे थे। अब उनके युवा बेटे की बदौलत मायावती उसी जगह को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेंगी। पारिवारिक और बिजनेस बैकग्राउंड प्रिंस युकेश सिंह उमाशंकर सिंह के इकलौते बेटे हैं। परिवार मूलरूप से बलिया के रसड़ा क्षेत्र के खानवार (खनवर) गांव का है। मां पुष्पा सिंह परिवार की कंपनी सीएस इन्फ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, जबकि बहन यामिनी सिंह शादीशुदा हैं। युकेश की शादी फरवरी- 2024 में कनिका सिंह से हुई थी। कनिका यूपी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के भाई बृजेश सिंह की बेटी हैं। शादी लखनऊ के ताज होटल में हुई थी और खुद मायावती उसमें शामिल हुई थीं। बिजनेस के मोर्चे पर भी यूकेश सिंह सक्रिय हैं। वे सीएस इन्फ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के सीईओ हैं। 2020 से कंपनी के प्रेसिडेंट रहे और 2025 में सीईओ बनाए गए। कंपनी का टर्नओवर 2024-25 में करीब 1000 करोड़ रुपए बताया जाता है। पिता की तरह भरोसे की राजनीति चुनी पहले सक्रिय राजनीति में ज्यादा नहीं दिखने वाले युकेश पिता की बीमारी के दौरान क्षेत्र में सक्रिय हो गए थे। अब मायावती के समर्थन से उनकी राजनीतिक भूमिका तेजी से बढ़ने की संभावना है। रसड़ा सीट पर 2027 विधानसभा चुनाव में बसपा की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। यूकेश के पिता उमाशंकर सिंह के अंतिम शव यात्रा में जिस तरह बलिया में लोग उमड़े थे, वो बताता है कि उनकी पिता की विरासत कितनी मजबूत है। उमाशंकर सिंह को आखिरी विदाई देने वालों में दल की दीवारें टूट गई थीं। सीएम योगी से लेकर कई कैबिनेट मंत्री और नेता पहुंचे थे। यूकेश के पास एक विकल्प भाजपा का दामन थाम कर आगे बढ़ने का भी था, लेकिन उन्होंने पिता की तरह भरोसे की राजनीति को चुना। रक्षाबंधन पर युकेश के 2 पोस्ट खास युकेश ने 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर अपने सोशल मीडिया X पेज पर दो पोस्ट किए। पहली पोस्ट में पिता उमाशंकर सिंह और बसपा प्रमुख मायावती की तस्वीर है, जो पिछले साल की है। जब रक्षाबंधन पर उमाशंकर सिंह बसपा प्रमुख से राखी बंधवाने पहुंचे थे। दूसरी पोस्ट में युकेश ने खुद की तस्वीर अपलोड की है। इसमें वह क्षेत्र की तमाम बेटियों-बहनों के साथ नजर आ रहे हैं। उनके दोनों हाथों पर बड़ी संख्या में राखी बंधी हैं। वह लिखते हैं- ‘आज रक्षाबंधन के अवसर पर हमारे आवास खनवर पर बड़ी संख्या में बहनों ने पधारकर और राखी बांधकर अपना आशीर्वाद दिया।’ इस तस्वीर में दीवार पर टंगी उमाशंकर सिंह की तस्वीर भी दिख रही है। वो भी क्षेत्र की बेटियों की सामूहिक शादी कराते थे। हर रक्षाबंधन पर इसी तरह क्षेत्र की बहनें उन्हें भी राखी बांधने पहुंचती थी। अब युकेश ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। क्या बसपा में जेन-जी को आगे बढ़ाने की तैयारी है इसका जवाब वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम देते हैं। वह कहते हैं- आकाश आनंद पहले से बसपा में जेन-जी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अब इसी कड़ी में युकेश सिंह का भी नाम जुड़ गया। पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के बेटे कपिल मिश्रा भी युवा हैं। वह भी सामाजिक तौर पर सक्रिय दिखते हैं। बसपा के बड़े आयोजन के दौरान उनका मेडिकल कैंप चर्चा में रहता है। इसी तरह प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल के बेटे अरुवेंद्र पाल भी पार्टी में सक्रिय हो रहे हैं। वे बहुत ही अच्छे वक्ता हैं। बीएचयू से पढ़ाई कर रहे अरुवेंद्र भी युवा हैं। सैयद कासिम कहते हैं- अगर चारों युवा चेहरों के सामाजिक आधार को भी देखें, तो ये यूपी जैसे राज्य के समीकरण में फिट बैठते हैं। आकाश आनंद दलितों के कोर जाटव समाज से आते हैं। बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे हैं। उनकी देख-रेख में वे आगे बढ़ रहे हैं। कपिल मिश्रा ब्राह्मण समाज से आते हैं। वहीं, युकेश क्षत्रिय और अरुवेंद्र पाल अति पिछड़े गड़रिया समाज से आते हैं। ———————————- ये यूपी एक्सप्लेनर भी पढ़ें – आकाश आनंद के तेवर भाजपा के लिए फायदेमंद, UP सरकार पर आक्रामक दिखे, फिर क्यों उल्टा पड़ रहा दांव…? मायावती के भतीजे आकाश आनंद का अखिलेश और राहुल को ‘अंकल’ कहने वाला बयान चर्चा में है, लेकिन वे प्रदेश की भाजपा सरकार पर सबसे ज्यादा आक्रामक दिखे थे। हाथरस में 10 अगस्त को उनकी वो आक्रामक छवि एक बार फिर नजर आई, जो 2024 लोकसभा चुनाव में दिखी थी। पढ़िए पूरी खबर…