मुरादाबाद में सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान के चाचा हाजी मोहम्मद उस्मान ने सर्किट हाउस में नमाज पढ़ी। इसका शुक्रवार को वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठन भड़क गए। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रोहन सक्सेना ने कहा- प्रशासन ने किस नियम से नमाज अदा करने की अनुमति दी? प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि सपा नेता को किस हैसियत से सर्किट हाउस परिसर में नमाज अदा करने के लिए जगह दी गई। क्या किसी विधायक के रिश्तेदार को सरकारी भवन में इस तरह की अनुमति देने का कोई नियम है। अगर नहीं है तो सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एडीएम सिटी अंकित श्रीवास्तव ने बताया- जांच चल रही है। कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद PWD जेई की तहरीर पर मझोला थाने में FIR दर्ज की गई। वहीं हाजी उस्मान ने कहा- ये इबादत का मामला है। कोई गुनाह नहीं किया। हाजी उस्मान सपा के जिला उपाध्यक्ष हैं। वे पहले भी विवादों में रहे हैं। मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान बिलारी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा में मोहम्मद उस्मान ने भाषण दिया था। मामले में उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। अब विस्तार से पढ़िए… सपा की बैठक के बाद पढ़ी नमाज सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान का सर्किट हाउस में नमाज अदा करते हुए वीडियो गुरुवार (3 सितंबर) का है। यूपी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव सर्किट हाउस में ठहरे हुए थे। उन्होंने सपा नेताओं के साथ समीक्षा बैठक की थी। समीक्षा बैठक खत्म होने के बाद मोहम्मद उस्मान ने सर्किट हाउस से बाहर निकल कर लॉन के पास नमाज अदा की थी। वीडियो एक सपा कार्यकर्ता ने ही बना लिया था। इसमें वह एक कार के बगल में नमाज अदा करते नजर आ रहे हैं। भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों में बहस वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत आस्था का मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग सरकारी परिसर में धार्मिक गतिविधि और उसके वीडियो के प्रचार को लेकर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर सपा के स्थानीय नेतृत्व या मुरादाबाद जिला प्रशासन की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रोहन सक्सेना ने सर्किट हाउस में नमाज अदा किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी सामाजिक संगठनों को बैठक के लिए सर्किट हाउस में जगह देने में आनाकानी करते हैं, तो फिर यहां नमाज अदा करने की अनुमति कैसे दी गई। पहले भी विवादों में रहे मोहम्मद उस्मान हाजी मोहम्मद उस्मान पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी रहे हैं। वह अपने पैतृक गांव इब्राहीमपुर के प्रधान रह चुके हैं। हाजी उस्मान बिलारी के पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद इरफान के छोटे भाई और मौजूदा बिलारी विधायक के चाचा हैं। पहली बार हाजी मोहम्मद उस्मान का नाम जाति प्रमाणपत्र विवाद में भी सामने आ चुका है। एक शिकायत के बाद जिला स्तरीय सत्यापन समिति ने मामले की जांच की थी। जांच में विधायक मोहम्मद फहीम और उनके चाचा मोहम्मद उस्मान के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की झोझा जाति के प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए थे। इसके बाद प्रशासन ने विधायक मोहम्मद फहीम, हाजी मोहम्मद उस्मान और उनकी दो बेटियों फरहीन जहां और समरीन जहां के OBC जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए थे। सपा नेता उस्मान बोले- नमाज पढ़ना इबादत का मामला सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान ने बताया- मुझे नहीं पता कि यह वीडियो कब का है। ऐसा कई बार होता है कि कहीं जाते हैं और नमाज का वक्त हो जाता है तो वहीं नमाज पढ़ लेते हैं। संभव है, मैंने भी ऐसे ही किसी मौके पर नमाज पढ़ी हो। अपने देश में भी परंपरा है कि शैक्षणिक कार्यक्रम से पहले सरस्वती वंदना होती है और सरकारी निर्माण से पहले भूमि पूजन किया जाता है। ऐसे मामलों में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। यह इबादत का मामला है। मेरे नमाज पढ़ने से न तो कोई रास्ता जाम हुआ और न ही किसी को कोई परेशानी हुई। ADM बोले- कार्रवाई करेंगे, देर रात FIR दर्ज मुरादाबाद के एडीएम सिटी अंकित श्रीवास्तव ने बताया- विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव का प्रोटोकॉल जिला प्रशासन को मिला था। इसी के तहत उनके लिए सर्किट हाउस में नियमानुसार ठहरने की व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान उनसे मिलने पहुंचे सपा नेता के सर्किट हाउस में नमाज अदा करने का मामला सामने आया है। प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद PWD जेई अनित कुमार ने मझोला थाने में तहरीर दी। इसमें बताया कि सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान ने सर्किट हाउस के रास्ते में अपनी गाड़ी खड़ी कर दी और उसके पीछे नमाज पढ़ी। गाड़ी खड़ी होने और नमाज पढ़ने के कारण सर्किट हाउस में आने-जाने वाले लोगों और वाहनों को परेशानी हुई। तहरीर पर बीएनएस की धारा 285 और 292 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। हाईकोर्ट ने कहा था- सार्वजनिक जगहों पर नमाज का अधिकार किसी को नहीं मई, 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढ़ने को लेकर एक फैसला सुनाया था। जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा था- सार्वजनिक भूमि पर सभी का समान अधिकार होता है। इसका एक-तरफा उपयोग कानूनी तौर पर स्वीकार्य नहीं है। हाई कोर्ट के निर्णय का मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समर्थन किया था। मौलाना ने कहा था कि इस्लाम में साफ-साफ कहा गया है कि ऐसी जगह पर नमाज न पढ़ी जाए, जहां पर कोई विवाद हो, या कोई तमाशा खड़ा हो, या किसी को ऐतराज हो, या आपत्ति हो। सर्किट हाउस एक सरकारी संपत्ति है, जो जनता के कर टैक्स के पैसों से बनती है, लेकिन यह आम जनता के लिए खुली सार्वजनिक संपत्ति नहीं होती है। ………………………………………… यह खबर भी पढ़ें हत्या के बाद 20 दिन तक ‘जिंदा’ रहा फोटोग्राफर: प्रयागराज में मर्डर करने वाला दोस्त गर्लफ्रेंड से चैट करता रहा; 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