मुलायम की ‘कन्या विद्या धन योजना’ अखिलेश फिर लॉन्च करेंगे:दावा- चुनाव जीते तो 12वीं पास छात्राओं को देंगे ₹50 हजार-लैपटॉप

अखिलेश यादव दावा कर रहे हैं कि यूपी में सपा सरकार बनी तो ‘कन्या विद्याधन योजना’ फिर शुरू कर सकते हैं। इसके तहत 12वीं पास छात्राओं को ₹50 हजार दिए जाएंगे। पहले इस योजना में ₹30 हजार मिलते थे। सिर्फ इतना ही नहीं, चुनाव से ठीक पहले वे अपनी पुरानी योजनाओं को भी नए सिरे से चर्चा में ला रहे हैं। बेरोजगारी भत्ता, कन्या विद्याधन और मेधावी छात्रों को लैपटॉप बांटने जैसी योजनाओं के भरोसे वो फिर मास्टरस्ट्रोक लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें जेन-जी के साथ यूपी की 7 करोड़ से ज्यादा महिला वोटर्स को खासतौर पर ध्यान में रखते हुए ऐलान किए जा रहे हैं। कन्या विद्याधन मुलायम ने शुरू की, अखिलेश ने मॉडर्न बनाया कन्या विद्याधन योजना मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में शुरू हुई थी। इसके तहत 12वीं पास छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए 20 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती थी। मार्च, 2012 में सत्ता संभालने के बाद अखिलेश यादव ने न सिर्फ इस योजना को जारी रखा, बल्कि इसकी राशि बढ़ाकर 30 हजार रुपए कर दी। यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई से अच्छे अंकों के साथ 12वीं पास करने वाली छात्राओं के बैंक खातों में ये पैसे भेजे जाते थे। अब एक बार फिर से अखिलेश यादव ने इसे चालू करने का वादा किया है। सपा सरकार बनने पर इसकी राशि भी बढ़ाकर 50 हजार की जाएगी। पार्टी प्रवक्ता मनोज यादव कहते हैं- सपा सरकार में गरीब महिलाओं को हर महीने 500 रुपए पेंशन दी गई। छात्राओं को कन्या विद्याधन योजना के तहत ₹30 हजार की सहायता दी गई। 2027 में सपा की सरकार बनने पर महिलाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की जाएंगी। अखिलेश महिलाओं से जुड़ी इन 5 योजनाओं का भी जिक्र कर रहे अखिलेश के वादों और यूपी के बजट में कितना तालमेल चुनाव के समय में भाजपा अखिलेश के इन दावों पर सवाल उठाती है, क्योंकि इन वादों को पूरा करने के लिए भारी भरकम बजट की जरूरत होगी। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार कहते हैं- जब सपा ने 2012 में लैपटॉप और कन्या विद्याधन बांटा था, तब यूपी का कुल बजट लगभग 2.10 लाख करोड़ रुपए हुआ करता था। आज प्रदेश सरकार का वार्षिक बजट बढ़कर 7.36 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। यानी सपा सरकार के समय से तीन गुना बड़ा है। बड़े बजट से सरकार के लिए गुंजाइश बढ़ जाती है कि वो लोक-कल्याणकारी योजनाओं पर ज्यादा खर्च कर सके। 2027 के चुनाव में ‘आधी आबादी’ क्यों है सबसे बड़ा फैक्टर? उत्तर प्रदेश में चुनाव के समीकरण अब केवल जातिगत जोड़-तोड़ तक सीमित नहीं रहे हैं। 2022 के यूपी चुनाव में 46.38% महिलाओं और 53.60 पुरुषों ने वोट किया। वहीं, 2024 में करीब 46.66% महिलाओं ने वोट दिया था। भाजपा जहां ‘लखपति दीदी’, राशन और ‘उज्ज्वला योजना’ के दम पर महिला वोटों पर अपनी पकड़ मजबूत मानती है। वहीं, अखिलेश यादव अपने ‘पीडीए’ सोशल इंजीनियरिंग में महिलाओं को सबसे अगली कतार में रख रहे हैं। अगर सपा 12वीं पास बेटियों को सीधे 50 हजार रुपए की राशि, महिलाओं को 40 हजार सालाना पेंशन और कारोबार शुरू करने के लिए महिलाओं को 2 लाख रुपए तक का लोन देने के अपने वादे को जनता के बीच पहुंचाने में कामयाब होती है, तो यह 2027 के चुनाव में सबसे बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है। ————————– यह खबर भी पढ़ें – सुरेंद्र कोली फांसी से बरी हुआ, फंदे पर लटका मिला, जहां दुकान खोली, वहां सदाराम बनकर रहा नोएडा के चर्चित निठारी कांड को लेकर नवंबर, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शक कितना भी गहरा क्यों न हो, पुख्ता सबूत की जगह नहीं ले सकता। इस वाक्य के बाद 13 मामलों में फांसी की सजा पा चुके सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया गया। 19 साल तक जेल में बंद रहा सुरेंद्र छूटने के बाद उत्तराखंड में अपने गांव गया। पहचान बदली और हरिद्वार में चाय की दुकान खोल ली। 18 सितंबर को अचानक एक खबर आई- निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर जान दी। पढ़िए पूरी खबर…