यूपी के 41 जिलों में आज बारिश का अलर्ट:गोंडा में 500 बीघा जमीन नदी में समाई, ललितपुर में पुल के ऊपर पानी बह रहा

पूर्वी यूपी के 41 जिलों में आज बारिश का अलर्ट है। बुधवार सुबह लखऊन के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। कई इलाकों में बादल छाए हुए हैं। वहीं दो से तीन दिनों में पश्चिमी यूपी से मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी। इस मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक 6% कम बारिश दर्ज की गई है। 14 जिलों में बारिश का कोटा आधा भी नहीं हो पाया है। सबसे कम बारिश देवरिया, कुशीनगर, शामली, गाजियाबाद और कानपुर देहात में हुई है। यहां कोटे से 63% से 75% तक कम बारिश हुई है। हालांकि, पहाड़ों पर हुई भारी बारिश का असर अब भी प्रदेश की नदियों में दिखाई दे रहा है। सीतापुर में चौका नदी पर बना पुल डूब गया है। बच्चे घुटनों तक पानी में स्कूल जाने को मजबूर हैं। गोंडा में एक महीने में 500 बीघा जमीन घाघरा (सरयू) नदी में समा चुकी है। वहीं, उन्नाव की गलियों में नाव चल रही है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मध्य बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र मजबूत होकर आगे बढ़ रहा है। आज से पूर्वांचल में बारिश शुरू होगी। 24 सितंबर तक इसका असर पश्चिमी यूपी तक पहुंच जाएगा। बाढ़ की तस्वीरें देखिए… लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने बताया- 21 सितंबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों से वापस लौट गया है। अब यूपी से इसके वापस लौटने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम बना है। इससे 23 से 26 सितंबर के बीच पूरे यूपी में फिर से बारिश होगी। आज कहां होगी बारिश, जानिए पश्चिमी यूपी से पहले विदा होगा मानसून अल-नीनो का गेहूं, चना और सरसों की बुआई पर असर अल-नीनो का सबसे बड़ा असर रबी की फसलों पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञ के मुताबिक, सबसे पहले गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों की बुआई पर असर पड़ सकता है। अगर सितंबर के आखिर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खेतों में नमी कम रह जाएगी। इससे खासकर बुंदेलखंड में रबी की समय पर बुआई मुश्किल हो सकती है। इसके बाद फसल के बढ़ने के समय अगर पर्याप्त ठंड नहीं पड़ी और फरवरी-मार्च में गर्मी जल्दी बढ़ गई, तो फसल को दोहरा नुकसान हो सकता है। गेहूं में दाना भरने के समय तापमान ज्यादा बढ़ने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहेगी। अल-नीनो के देर से मजबूत होने का फायदा नहीं, बल्कि नुकसान की आशंका ज्यादा है। मानसून अगर थोड़ा जल्दी लौटता है, सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश कम रहती है, सर्दियों में न्यूनतम तापमान बढ़ा रहता है और मार्च में गर्मी जल्दी बढ़ती है, तो इसका असर फसलों की बुआई पर पड़ना तय है। सर्दियों पर असर- शीतलहर के दिन कम रह सकते हैं सर्दियों पर असर- शीतलहर के दिन कम रह सकते हैंअल-नीनो के असर से यूपी में सामान्य से ज्यादा तापमान रह सकता है। इससे सर्दियों पर 2 तरह से असर दिख सकता है। पहला- शीतलहर वाले दिनों में कमी आ सकती है। सर्दियों में सामान्य शीतलहर 8 से 10 दिन की होती है। जो 2 से 3 दिन के अलग-अलग चरणों में आती है। इस बार ये 4 से 6 दिन तक सीमित रह सकती है। दूसरा- तापमान में गिरावट पिछले साल के बराबर नहीं होगी। उदाहरण के लिए 2025 की सर्दियों में मेरठ, कानपुर, आगरा, अयोध्या, बरेली का तापमान अलग-अलग तारीखों पर 2 से 3 डिग्री तक पहुंच गया था। इस बार तापमान इतना नीचे आने की उम्मीद कम जताई जा रही है। हालांकि इसका कोहरे से कोई संबंध नहीं होगा। क्योंकि कोहरा स्थानीय वायुमंडल में नमी और हवा की स्पीड से बनता है।