सपा मुखिया अखिलेश यादव ने दिवंगत पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी को अंतिम विदाई दी। लखनऊ में शनिवार सुबह अखिलेश ने राम गोविंद चौधरी के पार्थिव शरीर पर फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान अखिलेश भावुक नजर आए। उन्होंने कहा- उनका जाना समाजवादी आंदोलन और पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी राम गोविंद चौधरी को श्रद्धांजलि दी। यूपी विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार देर रात निधन हो गया था। उन्होंने संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGI) में अंतिम सांस ली। वह 80 साल के थे और दो साल से दिल की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके परिवार में पत्नी कलावती देवी और एक बेटा है। इससे पहले सितंबर 2025 में राम गोविंद चौधरी लखनऊ के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। तब अखिलेश यादव उनसे मिलने पहुंचे थे। इस दौरान राम गोविंद चौधरी ने बिस्तर पर पड़े-पड़े अखिलेश के सामने डॉक्टरों से कहा था- “चुनाव जीतना है। अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाना है। आप लोग भी सुन लो।” अखिलेश बोले- रामगोविंद चौधरी समाजवादी आंदोलन के नेता रहे छात्र जीवन से समाजवादी आंदोलन से जुड़े राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1946 को बलिया जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम द्वारिका चौधरी और मां का नाम तिलेश्वरी देवी था। उन्होंने टीडी कॉलेज, बलिया से पोस्ट ग्रेजुएशन और एलएलबी की पढ़ाई की। चौधरी छात्र जीवन से ही समाजवादी विचारधारा से जुड़ गए थे। आपातकाल के दौरान उन्होंने संपूर्ण क्रांति आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल भी गए। उस समय बलिया के ज्यादातर कार्यकर्ता 19 महीने बाद जेल से बाहर आए थे, लेकिन राम गोविंद चौधरी 25 महीने बाद रिहा हुए थे। राम गोविंद चौधरी, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के करीबी रहे। शिक्षा और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दे वे लगातार उठाते रहे। हाल के सालों में भी वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के तौर पर सक्रिय रहे। चंद्रशेखर से मुलाकात के बाद तेज हुआ राजनीतिक सफर ———————– ये खबर भी पढ़िए- ‘बाइज्जत बरी’ बृजभूषण सिंह को फिर महिला पहलवानों ने घेरा:कोर्ट में याचिका लगाई, बोलीं- निचली अदालत का फैसला नामंजूर, VIDEO भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर यौन शोषण केस में घिरते दिख रहे हैं। चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने के 3 अगस्त के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया तथा फैसले में यौन उत्पीड़न पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर पुरानी/रूढ़िवादी धारणाओं का सहारा लिया। VIDEO देखिए…