आगरा में करोड़पति साधु की उसके भतीजे ने अपने 2 दोस्तों के साथ मिलकर हत्या कर दी। उन्हें सिलबट्टे से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। शुक्रवार सुबह चाचा धर्मवीर सोलंकी का शव मिला था। चाचा साधु बन चुके थे। उन्होंने कुछ समय पहले अपने हिस्से की जमीन बेची थी। इसके बावजूद उसके पास 3 बीघे से ज्यादा जमीन थी। जिसकी कीमत करोड़ों में है। भतीजा इसी जमीन और पहले बेची गई जमीन की रकम पर कब्जा करना चाहता था। पुलिस ने आरोपी भतीजे को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि पारिवारिक झगड़े और जमीन के लिए चाचा को मार डाला। घटना अछनेरा थाना क्षेत्र की है। 2 तस्वीरें देखिए… अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… गांव सहाई में धर्मवीर सोलंकी रहते थे। वह 4 भाइयों में सबसे छोटे और अविवाहित थे। 3 भाई राजकुमार, वासुदेव और देशराज उनसे अलग रहते थे। घरवालों ने बताया कि धर्मवीर अकेले रहते थे। वह रोजाना मंदिर में पूजा करने के बाद गांव की परिक्रमा करते थे। सुबह 6 बजे पशुओं को चारा डालते थे। प्रधानी लड़ने की तैयारी कर रहे थे भतीजे सौरभ सोलंकी ने बताया- कुछ समय पहले चाचा ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेच दिया था, जिससे उन्हें लाखों रुपए मिले थे। ये रुपए उन्होंने बैंक में जमा कर दिए थे। इसके बावजूद उनके पास करीब 3 बीघे जमीन थी। धर्मवीर सोलंकी गांव के प्रधानी लड़ने की तैयारी कर रहे थे। सौरभ ने बताया- चाचा गांव के बाहर प्लाॅट पर बने एक कमरे में रहते थे। उन्होंने संन्यास ले लिया था और साधु बन गए थे। चाचा हर दिन सुबह अपनी गाय को चारा डालने आते थे। शुक्रवार सुबह 9 बजे तक जब चाचा नहीं आए, तो मैं उन्हें देखने प्लॉट पर आया। कमरे की बाहर से कुंडी लगी थी। मैंने फोन किया, तो मोबाइल की घंटी की आवाज कमरे से आने लगी। इस पर मैंने कमरा खोला, तो अंदर चाचा की लाश पड़ी थी। सिर पर चोट के निशान थे। शरीर पर भी निशान थे। सूचना मिलते ही डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉयड को भी मौके पर बुलाया गया। टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि धर्मवीर सोलंकी का अपने बड़े भाई राजकुमार के बेटे दुष्यंत से झगड़ा हो गया था। इसी आधार पर भतीजे दुष्यंत को गिरफ्तार किया गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर दुष्यंत ने हत्या की बात कबूल ली। अब पढ़िए आरोपी का कबूलनामा दुष्यंत ने पुलिस को बताया- चाचा मेरी जान का दुश्मन बन गया था। अगर मैं उसे नहीं मारता, तो वह मुझे मार डालता। इसलिए मैंने चाचा को ही रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। गुरुवार (24 सितंबर) रात मैं चाचा धर्मवीर के घर में छिपकर बैठ गया। मेरे साथ दोस्त शिवा भी था। चाचा के घर आने पर हमने अपने तीसरे साथी यश को भी फोन कर बुला लिया। इसके बाद चाचा के सिर पर सिलबट्टे से हमला कर दिया। चाचा की मौत के बाद शव को कपडे़ से घसीटते हुए कमरे में ले गए। फिर बाहर से कुंडी लगाकर हम तीनों भाग गए। आरोपी बोला- जमीन के लिए चाचा को मारा दुष्यंत ने पुलिस को बताया कि चाचा से कुछ दिन पहले झगड़ा हुआ था। इसके अलावा चाचा ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेच दिया था। मुझे लगता था कि चाचा जमीन बेचकर सारा रुपया खर्च कर देगा। मुझे भी रुपए की जरूरत थी। मुझे लगा कि जमीन बेचने की रकम चाचा के पास होगी। हत्या कर रुपए ले लेगा और भविष्य में मुझे उनकी जमीन भी मिल जाएगी। डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया- मृतक के भतीजे दुष्यंत से पूछताछ में पुलिस को मामला कुछ संदिग्ध लगा। इसके बाद कड़ाई से पूछताछ पर उसने जुर्म कबूल लिया। उसने अपने दोस्त शिवा के साथ मिलकर चाचा की बट्टे से सिर पर प्रहार कर हत्या की थी। ————————– ये खबर भी पढ़ें- कानपुर कारोबारी हत्याकांड, मां ने कहा था- इनका कुछ करो:अय्याशी से परेशान बेटे ने हत्या कराई करोड़पति परिवार। परिवार में कलह और अविश्वास। पिता-बेटे के बीच बढ़ती दूरी। यह कहानी कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड से जुड़ी है। पुलिस की जांच में परिवार के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान की कई परतें सामने आई हैं। पढ़ें पूरी खबर