‘अभी राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशी घोषित हुए। वहां पीडीए कहां दिखाई पड़ा? एक दौलतमंद उद्योगपति को सपा से टिकट दिया गया। उसमें पिछड़े के नाम पर अपने चाचा आए, दलित के नाम पर भी कोई नहीं आया। 2 पर ही खत्म हो गए। तीसरा आता तो शायद कोई अपराधी लाते…।’ यह कहना है भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी और भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल का। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में वह कहते हैं- यूपी में 4 बार सत्ता में रहने के बाद भी सपा हर वर्ग में बदनाम हो चुकी है। आज के वक्त में सपा ‘मुन्नी’ से भी ज्यादा बदनाम है। अब तो पार्टी कार्यालय में चाचा शिवपाल को भी आने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। अखिलेश ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को ‘चिरकुट’ कहा? इस पर प्रकाश पाल कहते हैं- यह बताता है कि अखिलेश अपने ही सहयोगियों दलों को किस निगाह से देखते हैं। वह कहते हैं- सपा में अब चाचा और परिवार का भाव खत्म हो चुका है। राज्यसभा टिकट में उद्योगपति को तरजीह देने और सहयोगी दलों के नेताओं पर तंज कसने को लेकर उन्होंने सपा मुखिया को घेरा। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल. सपा ‘पीडीए यात्रा’ में पिछड़ों-दलितों को साध रही। कैसे मुकाबला करेंगे? जवाब. हमें मुकाबला नहीं करना। सपा 4 बार सत्ता में रही है। इसके बाद भी समाज के सभी वर्गों में बदनाम पार्टी हो गई। पहले कुछ लोगों ने बताया कि पीडीए का मतलब है- पावर परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी। लेकिन, अब तो चाचा को भी भाव नहीं मिल रहा। सूचनाएं आ रही हैं कि शिवपाल और धर्मेंद्र को भी कार्यालय में बिना अखिलेश की अनुमति के प्रवेश नहीं मिलता। जब चाचा को ही पार्टी में भाव नहीं मिल रहा, तो अब पीडीए का नया अर्थ हो जाएगा- पावर ऑफ डिंपल अखिलेश। चाचा भी नहीं हैं, परिवार भी नहीं है। सवाल. अखिलेश यादव ने तीसरा उम्मीदवार क्यों नहीं उतारा? जवाब. हमको लगता है कि संभावित हार से पहले खुद ही चौंक गए और ट्वीट करके बच निकले। बयान दिया कि तीन नहीं, हमारी 403 पर लड़ाई है। मेरा कहना है कि जिसकी तीन पर लड़ने की हिम्मत नहीं हो, वो 403 पर कैसे लड़ेगा? सवाल. अखिलेश ने अजय राय को ‘चिरकुट’ कहा। इसे कैसे देखते हैं? जवाब. ये बहुत बड़ा सवाल है कि वो अपने सहयोगी दलों और उनके अध्यक्षों को किस हैसियत से देखते हैं कि उनको ‘चिरकुट’ कहते हैं। जब उनसे बड़ी पार्टी, जिसके ज्यादा सांसद हैं और जिस परिवार के भारत में कई पीढ़ियों से प्रधानमंत्री रहे हैं। उस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को जब वो चिरकुट समझते हैं, तो बाकी अपने लोगों के प्रति उनका क्या भाव होंगे, ये आप समझ सकते हैं। सवाल. सपा-कांग्रेस जातिगत जनगणना की मांग कर रही। क्यों नहीं करवा रहे? जवाब. राहुल गांधी और अखिलेश यादव लगातार हल्ला मचाते थे कि हम जातिगत जनगणना कराकर रहेंगे। लेकिन, जिस दिन पीएम मोदी ने इसकी घोषणा कर दी, अब कोई इसका श्रेय लेने नहीं आ रहा। कारण यह है कि प्रधानमंत्री ने हिंदुओं की जातिगत जनगणना के साथ मुसलमानों की भी जातिगत जनगणना की घोषणा की है। अब अगर ये लोग इसका श्रेय लेने आएंगे, तो इनको मुस्लिम दौड़ा लेंगे। मैं आपको बता दूं कि देश में 33 वक्फ बोर्ड हैं। एक भी पसमांदा, जो पिछड़ा वर्ग है, कहीं अध्यक्ष या सदस्य नहीं है। यही इनकी राजनीति का सच है। सवाल. सपा-बसपा के प्रदेश अध्यक्ष पाल समाज से हैं। क्या भाजपा के लिए चुनौती है? जवाब. सिर्फ पाल समाज को साधने की बात नहीं है। यह समाज भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा है। भाजपा ने पिछड़े समाज को सम्मान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछड़े समाज के हित में लगातार काम किया है। हमारा प्रयास है कि समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाएं पहुंचें और लोगों को उनका लाभ मिले। ———————————— भास्कर इंटरव्यू पढ़िए- आराधना मिश्रा ने कहा-अजय राय को हटाना रणनीति का हिस्सा, 2024 के बाद हम मजबूत हुए यूपी कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद फुल फॉर्म में हैं। उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की प्राथमिकताएं, सपा से गठबंधन, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और ब्राह्मण-सवर्ण वोटरों को लेकर खुलकर बात की। अजय राय को लेकर कहा- पद से किसी को हटाना, किसी को लाना…ये रणनीति का हिस्सा हो सकता है। मैं कांग्रेस के मजबूत सिपाही हूं। पढ़िए पूरी खबर…