पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर सदर सीट क्यों चुनी:डेढ़ लाख वैश्य वोटरों पर नजर; भाजपा-सपा के लिए हो सकती है मुश्किल

यूपी की पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी बनाने का ऐलान किया है। पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है। वह मिर्जापुर सदर सीट से 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरेंगी। इस वक्त दिव्या मित्तल के दो कदम चर्चा में हैं। पहला- उन्होंने कोई राजनीतिक पार्टी जॉइन नहीं की। दूसरा- निर्दलीय उम्मीदवार न बनकर उन्होंने राजनीतिक दल बनाया। सीट भी उन्होंने सवर्ण वोटर के प्रभाव वाली मिर्जापुर सदर चुनी। 30 सितंबर को दिव्या मित्तल ने राजनीति में एंट्री का ऐलान किया था। कहा था- यूपी में ही रहूंगी। डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी। किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ूंगी। अकेले चलूंगी। मेरा मकसद राजनेता बदलना नहीं, बल्कि पूरी राजनीति बदलना है। मुझे पैसा और बाहुबल नहीं चाहिए। सबसे पहले जानते हैं, दिव्या ने मिर्जापुर सदर सीट को ही क्यों चुना? इसके 3 बड़े कारण नजर आते हैं… 1. वैश्य मतदाताओं का मजबूत गढ़ मिर्जापुर सदर विधानसभा क्षेत्र में 1.20 से 1.50 लाख वैश्य मतदाता हैं। दिव्या मित्तल खुद वैश्य समुदाय से आती हैं। पूर्वांचल की किसी भी एक सीट पर वैश्य समाज की यह सबसे बड़ी गोलबंदी मानी जाती है। मिर्जापुर जिले में पूर्व में जिलाधिकारी रहते हुए दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक कामकाज से अपनी जो पहचान बनाई थी, उसका सीधा फायदा उन्हें वैश्य वोटबैंक में मिलता दिख रहा है। 2. जनता से सीधे जुड़ाव का फायदा मिर्जापुर और देवरिया की डीएम रह चुकीं दिव्या मित्तल की पहचान एक कड़क और जनता से सीधे जुड़ने वाली अधिकारी की रही है। मिर्जापुर सदर क्षेत्र में वह पिछले कुछ समय से लगातार सक्रिय हैं। कभी महिलाओं के साथ गरबा-डांडिया उत्सव में शामिल होकर तो कभी गांवों और कस्बों में चौपाल लगाकर वह जनसंपर्क बढ़ा रही हैं। उनका यह ‘ओल्ड कनेक्शन’ चुनावी जमीन को मजबूत कर रहा है। 3. 2029 के लोकसभा चुनाव का विजन जानकारों का मानना है, मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट दिव्या मित्तल के लिए महज पहला पड़ाव है। 2027 के विधानसभा चुनाव के जरिए वह अपनी राजनीतिक साख मजबूत करेंगी। 2029 के मिर्जापुर या पूर्वांचल के किसी प्रमुख लोकसभा क्षेत्र के लिए अपनी दावेदारी का मजबूत आधार तैयार करेंगी। मिर्जापुर सदर का जातीय समीकरण जानिए मिर्जापुर जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं- छानबे, चुनार, मझवां, मड़िहान और मिर्जापुर सदर। इनमें से मिर्जापुर सदर का सामाजिक ताना-बाना दिव्या की रणनीति के मुफीद बैठता है- दिव्या के मैदान में आने से भाजपा-सपा, दोनों के लिए मुश्किल 2022 के विधानसभा चुनाव में मिर्जापुर सदर सीट से भाजपा के रत्नाकर मिश्रा मटियारी ने 1,18,263 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने सपा के कैलाश चौरसिया (77,921 वोट) को लगभग 41 हजार वोटों के अंतर से हराया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2022 में ब्राह्मण और वैश्य मतदाताओं के एकतरफा ध्रुवीकरण ने भाजपा को एकतरफा जीत दिलाई थी। हालांकि, 2027 में समीकरण बदल सकते हैं- भाजपा के विधायक अस्पताल में फल बांटते दिखे 14 नवंबर को भाजपा विधायक ने कहा था कि उन्हें केवल उन्हीं लोगों का वोट चाहिए जो भारत माता की जय, जय श्रीराम और वंदे मातरम बोलते हैं। जो भारत माता को नहीं मानता, उसका वोट उन्हें नहीं चाहिए। अगर वे राम भक्त होंगे और भारत माता की पूजा करेंगे, तो ही उनका वोट स्वीकार है। यहां का खाना खाकर देश के खिलाफ गाने वालों का समर्थन नहीं चाहिए। दिव्या मित्तल के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद 15 नवंबर को रत्नाकर मिश्रा के वीडियो सामने आए, जिसमें वह सरकारी अस्पताल में लोगों को फल बांट रहे थे। किसी दल की सदस्यता क्यों नहीं ली, क्यों बनाई पार्टी? दिव्या मित्तल ने किसी स्थापित पार्टी- भाजपा, सपा, बसपा या कांग्रेस का दामन थामने के बजाय अपनी नई राह चुनी। इसके पीछे के रणनीतिक कारण है। वह सीमित दायरे से बाहर निकलना चाहती हैं। अगर वह निर्दलीय चुनाव लड़तीं, तो उनकी राजनीतिक पहचान केवल मिर्जापुर सदर तक सीमित रह जाती। अपनी पार्टी बनाकर वह पूरे प्रदेश में ‘स्टार प्रचारक’ के रूप में अपनी छवि पेश कर सकती हैं। इसके अलावा यूपी के प्रमुख क्षेत्रीय दल अक्सर जातिगत राजनीति या अतीत के विवादों से घिरे रहते हैं। एक नई पार्टी बनाने से दिव्या को एक बेदाग, साफ-सुथरा और सुशासन केंद्रित मंच मिला है। किसी स्थापित दल के कैडर या अनुशासित नियमों के तहत काम करने के बजाय वह अपनी नीतियों को स्वतंत्र रूप से लागू कर सकती हैं। महिला वोटबैंक पर फोकस और पार्टी का एजेंडा बताया गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिव्या मित्तल का पूरा भाषण महिला केंद्रित रहा। उन्होंने साफ किया कि ‘जननीति पार्टी’ महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार, शिक्षा और स्वावलंबन को अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में रखेगी। उन्होंने जनता से सीधे संवाद की अपील करते हुए कहा कि वह आगामी महीनों में सीधे गांवों और ब्लाकों में जाकर लोगों के बीच रहेंगी। पार्टी ने जनता को आकर्षित करने के लिए तीन मुख्य संकल्प घोषित किए हैं। भविष्य की सुशासन नीतियों का खाका भी शेयर किया है। यूपी में 27 विधायक, मंत्री-सांसद वैश्य समाज से यूपी की कुल आबादी में वैश्य समुदाय की हिस्सेदारी 7 से 8% है। लेकिन, राजनीतिक रूप से यह समाज काफी असरदार है। वर्तमान यूपी विधानसभा में वैश्य समाज के 27 विधायक हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार में एक कैबिनेट मंत्री और दो राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी इसी समाज से हैं। लोकसभा में भी प्रदेश से 3 वैश्य सांसद मौजूद हैं। दिव्या मित्तल का यह नया राजनीतिक प्रयोग वैश्य राजनीति को किस दिशा में ले जाता है? क्या वह पारंपरिक पार्टी वफादारियों को तोड़कर एक नया विकल्प पेश कर पाएंगी? यह आगामी 2027 के चुनाव में देखना दिलचस्प होगा। —————————– यह खबर भी पढ़ें – पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने नई राजनीतिक पार्टी बनाई, नाम- जननीति भारत रखा, मिर्जापुर सदर से चुनाव लड़ेंगी यूपी की पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी बनाने का ऐलान किया है। पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है। गुरुवार दोपहर एक बजे फेसबुक पर वीडियो पोस्ट करके उन्होंने बताया कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में मिर्जापुर जिले की सदर सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगी। दिव्या ने कहा- ‘जननीति भारत’ में राज आपका होगा। जननीति भारत 2027 उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ेगी। 5 साल सरकार आपके हिसाब से चलेगी। पूरी खबर पढ़िए…