यूपी में आज छुट्‌टी- योगी का ऐलान:सरकार 75 जिलों में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाएगी, CM कानपुर में रहेंगे

यूपी में सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सार्वजनिक छुट्‌टी रहेगी। योगी सरकार ने रविवार दोपहर 3 बजे शासनादेश जारी कर दिया। सरकारी ऑफिस और स्कूल बंद रहेंगे। हालांकि बैंक खुले रहेंगे। 2017 में योगी सरकार ने महापुरुषों की जयंती पर मिलने वाली 15 सार्वजनिक छुट्टियां रद्द कर दी थीं। इनमें महर्षि वाल्मीकि जयंती की छुट्टी भी शामिल थी। सरकार ने कहा था कि इस दिन स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में कार्यक्रम आयोजित कर महापुरुषों के बारे में जानकारी दी जाएगी। बाद में वाल्मीकि समाज और विभिन्न संगठनों की मांग पर सरकार ने यह फैसला बदल दिया और वाल्मीकि जयंती पर सार्वजनिक अवकाश बहाल कर दिया। पिछले साल भी वाल्मीकि जयंती पर छुट्‌टी घोषित की गई थी। 75 जिलों में वाल्मीकि जयंती मनाएगी सरकार, योगी बिठूर जाएंगे यूपी के सभी 75 जिलों में 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। मुख्यमंत्री योगी कानपुर के बिठूर पहुंचेंगे। वाल्मीकि आश्रम में रामायण पाठ और पूजा में शामिल होंगे। मान्यता है कि इसी आश्रम में महाकाव्य रामायण की रचना हुई और माता सीता को आश्रय मिला था। यहीं भगवान श्रीराम के पुत्रों लव-कुश का जन्म हुआ। सीएम बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रवासियों को 411 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे। चित्रकूट में रामलीला, भजन संध्या और वाल्मीकि आरती महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली चित्रकूट के लालापुर में बड़ा कार्यक्रम होगा। यहां रामलीला का मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ और भजन संध्या आयोजित की जाएगी। नदी के घाट पर वाल्मीकि आरती भी होगी। इसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मौका विधानसभा चुनाव से पहले दलितों को साधने के लिए भाजपा का मेगा इवेंट राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सीएम योगी का महर्षि वाल्मीकि जयंती पर कानपुर के बिठूर दौरा केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं है। इस दौरे के जरिए सरकार धार्मिक विरासत के संरक्षण, दलित समाज से जुड़ाव और विकास कार्यों को एक साथ सामने रख रही है। इसके राजनीतिक मायने पांच प्रमुख पॉइंट्स से समझे जा सकते हैं। 1. दलित समाज तक पहुंच बनाने की कोशिश
महर्षि वाल्मीकि दलित समाज, विशेषकर वाल्मीकि समुदाय के लिए गहरी आस्था और सम्मान के प्रतीक हैं। ऐसे में उनकी जयंती पर मुख्यमंत्री का बिठूर पहुंचना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। प्रदेश के 75 जिलों में वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रमों और धार्मिक स्थलों के विकास के जरिए सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह समाज के विभिन्न वर्गों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को महत्व देती है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी जैसे दल भी दलित और पिछड़े वर्गों के बीच अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा के लिए इन समुदायों के साथ अपना जुड़ाव मजबूत बनाए रखना अहम है। 2. हिंदुत्व के साथ सामाजिक समरसता का संदेश
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद भाजपा की राजनीति में धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा प्रमुख रहा है। महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों का विकास इसी का हिस्सा माना जा सकता है। रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि को भगवान राम की कथा से जोड़कर प्रस्तुत करना भाजपा के उस प्रयास को मजबूत करता है, जिसके तहत वह विभिन्न जातीय समूहों को साझा धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर जोड़ना चाहती है। विपक्ष के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण के मुकाबले भाजपा हिंदू समाज के भीतर व्यापक सामाजिक एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, इसका चुनावी असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संदेश अलग-अलग समुदायों के बीच कितना स्वीकार किया जाता है। 3. विकास और विरासत को साथ रखने की रणनीति
बिठूर में 411 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास इस दौरे का महत्वपूर्ण पहलू है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ विकास परियोजनाओं को जोड़कर सरकार यह बताना चाहती है कि उसकी प्राथमिकता विरासत का संरक्षण करने के साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना भी है। सड़क, पेयजल, बिजली, पर्यटन और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं स्थानीय लोगों के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। यदि इन परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधाओं को बढ़ावा मिल सकता है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव से पहले सरकार के लिए अपनी विकास योजनाओं और उपलब्धियों को जनता के सामने रखना जरूरी होता है। 4. धार्मिक पर्यटन से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
बिठूर, अयोध्या और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों के विकास से पर्यटन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। बेहतर सड़कें, यातायात, ठहरने की सुविधाएं और पर्यटन स्थलों का सुंदरीकरण श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसका लाभ स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों, परिवहन सेवाओं, गाइड और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को मिल सकता है। इस तरह धार्मिक विरासत का संरक्षण केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ता है। हालांकि, रोजगार और आय में वास्तविक वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किस स्तर तक होता है और स्थानीय लोगों को इसका कितना लाभ मिलता है। 5. मध्य यूपी में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने पर जोर
कानपुर और उसके आसपास का क्षेत्र उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए मध्य यूपी में अपना जनाधार मजबूत बनाए रखना और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच समर्थन बढ़ाना अहम होगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिले झटके के बाद दलितों, पिछड़ों और अन्य सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाना पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। ******************* यह खबर भी पढ़िए:- भाजपा नेता की 50 लाख की फॉर्च्यूनर चोरी, VIDEO:प्रयागराज में लंगड़ाते हुए पहुंचा चोर, गेट खोला…50 सेकंड में लेकर चला गया प्रयागराज में एक चोर भाजपा नेता की 50 लाख रुपए की फॉर्च्यूनर चोरी करके ले गया। वह लंगड़ाते हुए कार तक पहुंचा। ड्राइवर की दूसरी साइड गेट के पास लेटकर नीचे कुछ किया। फिर गेट खोला और महज 50 सेकंड में गाड़ी लेकर चला गया। फॉर्च्यूनर चोरी की घटना सीसीटीवी में कैद हो गई। इसमें दिख रहा है कि चोर सिर पर गमछा बांधे है। हाथ में एक झोला है। घटना कैंट थाना इलाके की गुरुवार रात 10:30 बजे की है। भाजपा नेता पीयूष जायसवाल ने सीसीटीवी फुटेज देकर पुलिस से शिकायत की। पीयूष जायसवाल कारोबारी हैं। वह भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष हैं। पढ़ें पूरी खबर…