स्थान : नेवादा गांव (प्रयागराज) दिन : 2 बजे दोपहर, रविवार नेवादा गांव की मेन रोड के किनारे एक खेत में पंडाल दिखा। ये घास, सूखे-पुवाल और टीन शेड से बनाया गया था। बाहर माहौल मेला जैसा था, अंदर एक मंच था, करीब 3 हजार लोग मौजूद थे। दरबार में कुछ महिलाएं झूम रही थीं, कोई रो रही थी। कोई चीख-चीखकर इधर-उधर कूद रहा था। एक तरफ प्रोजेक्टर पर पादरी ईसाई धर्म से जुड़ी प्रेयर स्पीकर पर सुना रहे थे। लोग कतार में पास्टर के लिबाज में खड़े शख्स से आशीर्वाद ले रहे थे। पुलिस के पहुंचते ही पंडाल के अंदर अफरा-तफरी मच गई। जो महिलाएं इधर-उधर कूद रही थी, वो बाहर की तरफ भागी, कुछ लोग पुलिस के सामने खड़े हो गए और वापस जाने के लिए दबाव बनाने लगे। पुलिस पीछे हटी, मगर फिर बजरंग दल के साथ स्थिति पर काबू पाया।थानेदार महेश मिश्रा मौके से अनिल कुमार, कृष्ण कुमार और संजय को पकड़ कर थाने ले आए। इसके बाद एक और अरेस्टिंग हुई। 23 जून को पुलिस ने चारों लोगों को जेल भेज दिया। हिंदू संगठनों का आरोप है कि प्रयागराज में 5 साल से ‘यीशु दरबार’ की आड़ में धर्मांतरण का खेल चल रहा था। इस दरबार के प्रभाव में आसपास के 50 गांव के लोग हैं, कोई सटीक आंकड़ा तो नहीं हैं, मगर 500 से ज्यादा लोगों का धर्मांतरण होने की आंशका है। धर्मांतरण का केस दर्ज हुआ है। क्या वाकई इतने लोगों का धर्मांतरण किया गया? यीशु दरबार में क्या होता था? ये समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम प्रयागराज से 42Km दूर बहरिया ब्लॉक के नेवादा गांव में पहुंचे। पढ़िए रिपोर्ट… दरबार से जुड़ी महिलाएं बोलीं- जबरदस्ती नहीं आए रेनू के बच्चा नहीं हो रहा था, प्रार्थना में आने के 2 महीने में गर्भवती हो गई
गांव के बाहर ही मेन रोड के किनारे खेत पर घासफूस से बना हुआ स्ट्रक्चर दिख गया। लोगों ने बताया कि यहीं पर यीशु दरबार चलता था। हम वहां पहुंचे, तो कुछ लोग इकट्ठा थे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। बातचीत शुरू हुई तो नेवदा गांव की रेनू ने कहा- मुझे बच्चा नहीं हो रहा था। मजदूरी करके जो पाई-पाई इकट्ठा करते, वो इलाज में खर्च हो जाते। यीशु दरबार में आने के बाद 2 महीने के अंदर मैं गर्भवती हो गई। फिर मुझे एक बेटी हुई। यहां आने के लिए किसी ने जबरदस्ती नहीं की। हम आज भी मंदिर जाते हैं। मैं रेगुलर यीशु दरबार में प्रवचन सुनने आती रही, मंदिर भी जाती हूं। मदद मिल रही, तो इसमें गलत क्या?
रेनू कहती हैं, मैं 4 साल से आ रही थी, गांव में लोग मुझे बांझ कहने लगे थे। यहां आने के बाद पति का काम धंधा भी अच्छा चलने लगा है। यहां गरीब जरूरतमंद लोगों को इलाज के लिए मदद भी मिलती है। राजेश कुमार और उनकी पत्नी उषा देवी भी यहीं पंडाल में मिले। उन्होंने कहा- हमारे गांव में कुछ लोग आए थे, उन्होंने बताया कि ईसाई धर्म अपनाने से फायदा होगा। हम 5 हफ्ते से दरबार में आ रहे थे। हमारी तबीयत खराब रहती थी, इसलिए हम आए। अभी धर्म परिवर्तन नहीं किया, लेकिन यहां आने के बाद विचार कर रहे थे। महिला निर्मला कहती हैं- हम लोग बहुत गरीब थे। प्रार्थना में आने के बाद से हमें फायदा हुआ, परिवार में सुख समृद्धि आई, तो कुछ लोगों से देखा नहीं जा रहा। यहां हर तरफ के लोग आते हैं। उनके फायदे के लिए झाड़-फूंक, इलाज के लिए रुपए देकर मदद कराई जाती है, तो गलत क्या है? इस गरीबी में अगर कोई लोगों की मदद कर भला कर रहा है, तो उसे करने देना चाहिए। BJP नेता बोले- फादर को अरेस्ट नहीं किया
BJP के मंडल अध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव कहते हैं- दरबार में 50 गांवों के भोले-भाले लोगों को बरगलाकर लाया जाता था। इनके टारगेट पर ऐसे लोग होते थे, जो कि गरीब हैं। नौकरी नहीं है। परिवार का कोई सदस्य बीमार है। लोगों को यीशु का चमत्कार समझाया जाता था। हिंदू प्रतीक जैसे कलावा, लॉकेट और तिलक लगाने के लिए मना किया जाता था। धीरे-धीरे लोगों को लगने लगा था कि यीशु की प्रार्थना से ही उनका भला हो रहा है। ऐसे लोग हिंदू धर्म छोड़ रहे थे। गांव के अवधेश कुमार बताते हैं- यीशु दरबार के लिए हर रविवार मेला लगता था। दोपहर में ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। करीब दो-ढाई हजार लोगों के यहां आने से सड़क पर जाम की स्थिति हो जाती थी। इतना ही नहीं, पंडाल के अंदर हमेशा सौ-डेढ़ सौ लोग रहते थे। पंडाल के अंदर क्या कुछ चलता था? किसी बाहरी को कुछ पता नहीं चल पाता था। पुलिस को बताया जाता था, लेकिन पुलिस वाले आकर रुपए ही वसूलते थे। मऊआइमा से जिला पंचायत सदस्य अभिषेक यादव कहते हैं- मुझे गांव के लोगों ने ही बताया था कि यहां हिंदू धर्म मानने वालों को गुमराह किया जा रहा है। मैंने पुलिस के अधिकारियों को पूरा मामला बताया। तब रविवार को ACP फूलपुर दरबार में पहुंचे। धर्म का खेल सबके सामने आया। पुलिस ने आयोजन करने वाले 4 लोगों को मौके से पकड़ा। मामले का खुलासा कैसे हुआ… लड़कों ने कहा- पादरी जॉब से पहले ईसाई बनने को कहते
दरबार से निकलने के बाद भास्कर टीम ने गांव के लोगों से बातचीत शुरू की। कैमरे पर आए बिना युवकों ने बताया कि यीशु दरबार में खुद को पादरी कहने वाले व्यक्ति अनिल कुमार ने उन्हें मिशनरी स्कूल और अस्पताल में चपरासी की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। शुरुआत में वह लोग भी यीशु दरबार जाते थे। 2 साल बाद भी पादरी अनिल नौकरी नहीं दिला सके, वह कहते थे कि नौकरी से पहले तुम्हें ईसाई बनना होगा। यह बात नेवादा के कई युवकों से कही गई थी। इन्हीं लड़कों ने इकट्ठा होकर थाना में शिकायत दर्ज कराई। लोकल नेताओं तक मामला पहुंचने के बाद हंगामा शुरू हुआ। ACP ने कहा- पादरी को ढूंढ रहे, तब फंडिंग की इन्क्वायरी होगी
एसीपी पंकज लवानिया के मुताबिक, पुलिस को मिली शिकायत के आधार पर डेढ़ दर्जन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जिसमे एक अन्य का नाम प्रकाश में आने पर उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस जांच के बाद ही तय होगा कि धर्मांतरण का उद्देश्य था या नहीं। हम पादरी को ढूंढ रहे हैं, ताकि फंडिंग का भी पता चल सके। पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धोखाखड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की है। बयानों में लड़कों को लालच देने की बात सामने आई है। ————————–
यह भी पढ़ें : शाह की नजर उतारने का VIDEO:वाराणसी के काल भैरव मंदिर में गृहमंत्री ने पूजा की; पहले भी 4 बार आ चुके केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिन के काशी दौरे पर हैं। रविवार शाम एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वे CM योगी आदित्यनाथ के साथ काल भैरव मंदिर पहुंचे। यहां दर्शन-पूजन के दौरान एक पुजारी ने शाह की दंड से नजर उतारी। शाह ने नजर क्यों उतरवाई, यह जानने दैनिक भास्कर की टीम काल भैरव मंदिर पहुंची। नजर उतारने वाले पंडित से बात की। पंडित पप्पू दुबे ने बताया कि यह काशी के काल भैरव का दंड विधान था, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। काल भैरव, दंड विधान और गृहमंत्री को लेकर डिटेल बातचीत की। पढ़िए पूरी खबर…
गांव के बाहर ही मेन रोड के किनारे खेत पर घासफूस से बना हुआ स्ट्रक्चर दिख गया। लोगों ने बताया कि यहीं पर यीशु दरबार चलता था। हम वहां पहुंचे, तो कुछ लोग इकट्ठा थे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। बातचीत शुरू हुई तो नेवदा गांव की रेनू ने कहा- मुझे बच्चा नहीं हो रहा था। मजदूरी करके जो पाई-पाई इकट्ठा करते, वो इलाज में खर्च हो जाते। यीशु दरबार में आने के बाद 2 महीने के अंदर मैं गर्भवती हो गई। फिर मुझे एक बेटी हुई। यहां आने के लिए किसी ने जबरदस्ती नहीं की। हम आज भी मंदिर जाते हैं। मैं रेगुलर यीशु दरबार में प्रवचन सुनने आती रही, मंदिर भी जाती हूं। मदद मिल रही, तो इसमें गलत क्या?
रेनू कहती हैं, मैं 4 साल से आ रही थी, गांव में लोग मुझे बांझ कहने लगे थे। यहां आने के बाद पति का काम धंधा भी अच्छा चलने लगा है। यहां गरीब जरूरतमंद लोगों को इलाज के लिए मदद भी मिलती है। राजेश कुमार और उनकी पत्नी उषा देवी भी यहीं पंडाल में मिले। उन्होंने कहा- हमारे गांव में कुछ लोग आए थे, उन्होंने बताया कि ईसाई धर्म अपनाने से फायदा होगा। हम 5 हफ्ते से दरबार में आ रहे थे। हमारी तबीयत खराब रहती थी, इसलिए हम आए। अभी धर्म परिवर्तन नहीं किया, लेकिन यहां आने के बाद विचार कर रहे थे। महिला निर्मला कहती हैं- हम लोग बहुत गरीब थे। प्रार्थना में आने के बाद से हमें फायदा हुआ, परिवार में सुख समृद्धि आई, तो कुछ लोगों से देखा नहीं जा रहा। यहां हर तरफ के लोग आते हैं। उनके फायदे के लिए झाड़-फूंक, इलाज के लिए रुपए देकर मदद कराई जाती है, तो गलत क्या है? इस गरीबी में अगर कोई लोगों की मदद कर भला कर रहा है, तो उसे करने देना चाहिए। BJP नेता बोले- फादर को अरेस्ट नहीं किया
BJP के मंडल अध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव कहते हैं- दरबार में 50 गांवों के भोले-भाले लोगों को बरगलाकर लाया जाता था। इनके टारगेट पर ऐसे लोग होते थे, जो कि गरीब हैं। नौकरी नहीं है। परिवार का कोई सदस्य बीमार है। लोगों को यीशु का चमत्कार समझाया जाता था। हिंदू प्रतीक जैसे कलावा, लॉकेट और तिलक लगाने के लिए मना किया जाता था। धीरे-धीरे लोगों को लगने लगा था कि यीशु की प्रार्थना से ही उनका भला हो रहा है। ऐसे लोग हिंदू धर्म छोड़ रहे थे। गांव के अवधेश कुमार बताते हैं- यीशु दरबार के लिए हर रविवार मेला लगता था। दोपहर में ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। करीब दो-ढाई हजार लोगों के यहां आने से सड़क पर जाम की स्थिति हो जाती थी। इतना ही नहीं, पंडाल के अंदर हमेशा सौ-डेढ़ सौ लोग रहते थे। पंडाल के अंदर क्या कुछ चलता था? किसी बाहरी को कुछ पता नहीं चल पाता था। पुलिस को बताया जाता था, लेकिन पुलिस वाले आकर रुपए ही वसूलते थे। मऊआइमा से जिला पंचायत सदस्य अभिषेक यादव कहते हैं- मुझे गांव के लोगों ने ही बताया था कि यहां हिंदू धर्म मानने वालों को गुमराह किया जा रहा है। मैंने पुलिस के अधिकारियों को पूरा मामला बताया। तब रविवार को ACP फूलपुर दरबार में पहुंचे। धर्म का खेल सबके सामने आया। पुलिस ने आयोजन करने वाले 4 लोगों को मौके से पकड़ा। मामले का खुलासा कैसे हुआ… लड़कों ने कहा- पादरी जॉब से पहले ईसाई बनने को कहते
दरबार से निकलने के बाद भास्कर टीम ने गांव के लोगों से बातचीत शुरू की। कैमरे पर आए बिना युवकों ने बताया कि यीशु दरबार में खुद को पादरी कहने वाले व्यक्ति अनिल कुमार ने उन्हें मिशनरी स्कूल और अस्पताल में चपरासी की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। शुरुआत में वह लोग भी यीशु दरबार जाते थे। 2 साल बाद भी पादरी अनिल नौकरी नहीं दिला सके, वह कहते थे कि नौकरी से पहले तुम्हें ईसाई बनना होगा। यह बात नेवादा के कई युवकों से कही गई थी। इन्हीं लड़कों ने इकट्ठा होकर थाना में शिकायत दर्ज कराई। लोकल नेताओं तक मामला पहुंचने के बाद हंगामा शुरू हुआ। ACP ने कहा- पादरी को ढूंढ रहे, तब फंडिंग की इन्क्वायरी होगी
एसीपी पंकज लवानिया के मुताबिक, पुलिस को मिली शिकायत के आधार पर डेढ़ दर्जन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जिसमे एक अन्य का नाम प्रकाश में आने पर उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस जांच के बाद ही तय होगा कि धर्मांतरण का उद्देश्य था या नहीं। हम पादरी को ढूंढ रहे हैं, ताकि फंडिंग का भी पता चल सके। पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धोखाखड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की है। बयानों में लड़कों को लालच देने की बात सामने आई है। ————————–
यह भी पढ़ें : शाह की नजर उतारने का VIDEO:वाराणसी के काल भैरव मंदिर में गृहमंत्री ने पूजा की; पहले भी 4 बार आ चुके केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिन के काशी दौरे पर हैं। रविवार शाम एयरपोर्ट पहुंचने के बाद वे CM योगी आदित्यनाथ के साथ काल भैरव मंदिर पहुंचे। यहां दर्शन-पूजन के दौरान एक पुजारी ने शाह की दंड से नजर उतारी। शाह ने नजर क्यों उतरवाई, यह जानने दैनिक भास्कर की टीम काल भैरव मंदिर पहुंची। नजर उतारने वाले पंडित से बात की। पंडित पप्पू दुबे ने बताया कि यह काशी के काल भैरव का दंड विधान था, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। काल भैरव, दंड विधान और गृहमंत्री को लेकर डिटेल बातचीत की। पढ़िए पूरी खबर…