सहारनपुर से अमेरिका के अलग-अलग शहरों के लोगों से करोड़ों ठगे गए। तरीका था, पॉप-अप मैसेज के जरिए लोगों के कंप्यूटर या लैपटॉप में वायरस भेजना। फिर ठीक करने के बहाने पूरे सिस्टम को हैक कर लेते थे। इनके टारगेट पर अमूमन बुजुर्ग लोग ही होते थे। जालसाजी के लिए सहारनपुर के एक होटल में सेटअप बनाया गया। 7 कमरों में कंप्यूटर सेट लगाकर 24-24 घंटे ये गिरोह काम कर रहा था। पुलिस ने शुक्रवार को होटल से असम, पश्चिम बंगाल, नगालैंड और मणिपुर के 11 लोगों को अरेस्ट किया। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि कई लोगों को इन्होंने फर्जी रिपोर्ट दिखाकर डराया था। धमकाते थे कि आपने प्रतिबंधित वेबसाइट पर ट्रांजैक्शन किया है। बचाने के लिए रुपए ऐंठते थे। पकड़े गए आरोपियों में 4 महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस उनसे पूछताछ करके ये जानने का प्रयास कर रही है कि अमेरिका के किन-किन शहर में कितने लोगों के साथ जालसाजी हुई है? इसका डेटा अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। अब पढ़िए पूरा मामला… होटल में 24 घंटे चलता था कॉल सेंटर
एसपी देहात सागर जैन ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से 20 दिन पहले सूचना मिली कि होटल रिडेक्शन में बाहर के कई लोग रह रहे हैं। उन्होंने अपनी पहचान छिपा रखी है। किसी से अधिक बात नहीं करते। कई दिन बाद भी कमरा खाली नहीं किया। कमरे में दूसरे राज्यों की युवतियां भी आती जाती रहती हैं। वे 24 घंटे कंप्यूटर पर काम करते रहते हैं। उनकी गतिविधियां संदिग्ध दिख रही हैं। शक न हो इसलिए ड्रेस में करते थे काम
उन्हें रंगे हाथों पकड़ने का प्लान बनाया गया। शुक्रवार को फोर्स के साथ पुलिस घंटाघर के पास होटल रिडेक्शन पहुंची। अंदर तलाशी ली गई तो यहां पर 7 कमरों में फर्जी कॉल सेंटर चलते पाया गया। यहां पर 11 लोग ड्रेस में प्रोफेशनल तरीके से कम्प्यूटर पर काम कर रहे थे। उनमें 4 युवतियां भी थी। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से 14 लैपटॉप, 11 मोबाइल और 4,900 रुपए बरामद किए हैं। पुलिस थाने लाकर उनसे पूछताछ कर रही है। पकड़े गए लोगों की पहचान दिल्ली के रहने वाले रोहित शर्मा, सायरोनिलिया, करण सरीन, सोनिया और विक्रम, असम के रहने वाले अनींग दौलगुपुनू, मणिपुर की रहने वाली जसटीन उर्फ जेनगुलीन सिंगसन और सैमुअल, पश्चिम बंगाल के रहने वाले प्रयास और निकिता, नगालैंड की चेनायहुन और सायरोनिलिया के रूप में हुई है। अब ठगी का तरीका समझिए… डार्क वेब से अमेरिकी नागरिकों का डेटा खरीदते थे
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि रोहित शर्मा, अनिरुद्ध और रविंद्र सिंह कॉल सेंटर को चलाते थे। वे ठगी करने वाले गैंग के मास्टरमाइंड हैं। रोहित ने बताया- उनकी कंपनी डार्क वेब से अमेरिकी नागरिकों, खासतौर पर सीनियर सिटिजन का डेटा खरीदती थी। इसके बाद उनके कंप्यूटर सिस्टम पर पॉप अप मैसेज भेजा जाता था, जिसे खोलते ही वायरस एक्टिव हो जाता था। अवैध ट्रांजैक्शन के नाम पर डराते थे
उसके बाद उन्हें फोन करके जानकारी दी जाती थी कि उनके सिस्टम पर वायरल एक्टिव हो गया है। अगर वे कंप्यूटर ठीक कराना चाहते हैं तो उन्हें अपने कम्प्यूटर का एक्सेस उन्हें देना होगा। इसके लिए उनके कंप्यूटर पर अल्ट्रा व्यूअर नाम का ऐप डाउन लोड कराया जाता था। अल्ट्रा व्यूअर इंस्टॉल होते ही संबंधित व्यक्ति को फोन किया जाता था। उनसे झूठा दावा किया जाता था कि उनके द्वारा प्रतिबंधित वेबसाइट पर अवैध ट्रांजैक्शन हुए हैं। गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर उसे रिडीम कर पैसे में बदलते थे
इसके बाद उसे एक टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के लिए कहा जाता था। वहां उनकी टीम का दूसरा सदस्य बैंक अधिकारी बनकर बात करता। उन्हें ट्रांजैक्शन कैंसिल करने के नाम पर डराता था। उनसे गूगल प्ले, टारगेट, एप्पल और नाइक के गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए दबाव बनाता था। वे जैसे ही गिफ्ट कार्ड खरीदते थे। कार्ड की डिटेल मांगते थे। डिटेल मिलते ही गैंग के मास्टर माइंड अनिरुद्ध और रविंद्र सिंह को भेजी जाती थी। वे उन्हें रिडीम कर पैसे में बदलते थे। पुलिस ने बताया कि मामले में पकड़े गए सभी आरोपी पेशेवर ठग हैं। कई राज्यों में पहले भी साइबर अपराध में शामिल रह चुके हैं। अब इनके नेटवर्क और मास्टरमाइंड अनिरुद्ध और रविंद्र सिंह की तलाश की जा रही है। ————————- ये खबर भी पढ़िए- ऐशन्या बोलीं- आंखों के सामने पति को मारा…दृश्य भूलता नहीं: प्रेमानंद महाराज का जवाब- हर इंसान की उम्र निश्चित, काल ऐसे संयोग बना देता है पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के परिवार ने मथुरा में प्रेमानंदजी महाराज से मुलाकात की। इस दौरान शुभम की पत्नी ऐशन्या ने कहा- महाराज मेरे पति को आंखों के सामने मार दिया गया। मैं उस दृश्य को भूल नहीं पा रही हूं। इस पर प्रेमानंद महाराज ने ऐशन्या को समझाया। कहा- भगवान का नियम निश्चित होता है। जिसका जब समय तय होता है, वो उतना ही रहता है। पढ़ें पूरी खबर…
एसपी देहात सागर जैन ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से 20 दिन पहले सूचना मिली कि होटल रिडेक्शन में बाहर के कई लोग रह रहे हैं। उन्होंने अपनी पहचान छिपा रखी है। किसी से अधिक बात नहीं करते। कई दिन बाद भी कमरा खाली नहीं किया। कमरे में दूसरे राज्यों की युवतियां भी आती जाती रहती हैं। वे 24 घंटे कंप्यूटर पर काम करते रहते हैं। उनकी गतिविधियां संदिग्ध दिख रही हैं। शक न हो इसलिए ड्रेस में करते थे काम
उन्हें रंगे हाथों पकड़ने का प्लान बनाया गया। शुक्रवार को फोर्स के साथ पुलिस घंटाघर के पास होटल रिडेक्शन पहुंची। अंदर तलाशी ली गई तो यहां पर 7 कमरों में फर्जी कॉल सेंटर चलते पाया गया। यहां पर 11 लोग ड्रेस में प्रोफेशनल तरीके से कम्प्यूटर पर काम कर रहे थे। उनमें 4 युवतियां भी थी। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से 14 लैपटॉप, 11 मोबाइल और 4,900 रुपए बरामद किए हैं। पुलिस थाने लाकर उनसे पूछताछ कर रही है। पकड़े गए लोगों की पहचान दिल्ली के रहने वाले रोहित शर्मा, सायरोनिलिया, करण सरीन, सोनिया और विक्रम, असम के रहने वाले अनींग दौलगुपुनू, मणिपुर की रहने वाली जसटीन उर्फ जेनगुलीन सिंगसन और सैमुअल, पश्चिम बंगाल के रहने वाले प्रयास और निकिता, नगालैंड की चेनायहुन और सायरोनिलिया के रूप में हुई है। अब ठगी का तरीका समझिए… डार्क वेब से अमेरिकी नागरिकों का डेटा खरीदते थे
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि रोहित शर्मा, अनिरुद्ध और रविंद्र सिंह कॉल सेंटर को चलाते थे। वे ठगी करने वाले गैंग के मास्टरमाइंड हैं। रोहित ने बताया- उनकी कंपनी डार्क वेब से अमेरिकी नागरिकों, खासतौर पर सीनियर सिटिजन का डेटा खरीदती थी। इसके बाद उनके कंप्यूटर सिस्टम पर पॉप अप मैसेज भेजा जाता था, जिसे खोलते ही वायरस एक्टिव हो जाता था। अवैध ट्रांजैक्शन के नाम पर डराते थे
उसके बाद उन्हें फोन करके जानकारी दी जाती थी कि उनके सिस्टम पर वायरल एक्टिव हो गया है। अगर वे कंप्यूटर ठीक कराना चाहते हैं तो उन्हें अपने कम्प्यूटर का एक्सेस उन्हें देना होगा। इसके लिए उनके कंप्यूटर पर अल्ट्रा व्यूअर नाम का ऐप डाउन लोड कराया जाता था। अल्ट्रा व्यूअर इंस्टॉल होते ही संबंधित व्यक्ति को फोन किया जाता था। उनसे झूठा दावा किया जाता था कि उनके द्वारा प्रतिबंधित वेबसाइट पर अवैध ट्रांजैक्शन हुए हैं। गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर उसे रिडीम कर पैसे में बदलते थे
इसके बाद उसे एक टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के लिए कहा जाता था। वहां उनकी टीम का दूसरा सदस्य बैंक अधिकारी बनकर बात करता। उन्हें ट्रांजैक्शन कैंसिल करने के नाम पर डराता था। उनसे गूगल प्ले, टारगेट, एप्पल और नाइक के गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए दबाव बनाता था। वे जैसे ही गिफ्ट कार्ड खरीदते थे। कार्ड की डिटेल मांगते थे। डिटेल मिलते ही गैंग के मास्टर माइंड अनिरुद्ध और रविंद्र सिंह को भेजी जाती थी। वे उन्हें रिडीम कर पैसे में बदलते थे। पुलिस ने बताया कि मामले में पकड़े गए सभी आरोपी पेशेवर ठग हैं। कई राज्यों में पहले भी साइबर अपराध में शामिल रह चुके हैं। अब इनके नेटवर्क और मास्टरमाइंड अनिरुद्ध और रविंद्र सिंह की तलाश की जा रही है। ————————- ये खबर भी पढ़िए- ऐशन्या बोलीं- आंखों के सामने पति को मारा…दृश्य भूलता नहीं: प्रेमानंद महाराज का जवाब- हर इंसान की उम्र निश्चित, काल ऐसे संयोग बना देता है पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के परिवार ने मथुरा में प्रेमानंदजी महाराज से मुलाकात की। इस दौरान शुभम की पत्नी ऐशन्या ने कहा- महाराज मेरे पति को आंखों के सामने मार दिया गया। मैं उस दृश्य को भूल नहीं पा रही हूं। इस पर प्रेमानंद महाराज ने ऐशन्या को समझाया। कहा- भगवान का नियम निश्चित होता है। जिसका जब समय तय होता है, वो उतना ही रहता है। पढ़ें पूरी खबर…