‘जब अपनों ने ठुकराया, चचेरी सास ने सहारा दिया’:मथुरा में सिर पर बैठाकर 350 किमी की परिक्रमा करा रही बहू, बोली- ये मेरा फर्ज
‘जब मेरे अपनों ने मुझे त्याग दिया, तब मेरी चचेरी सास ने सहारा दिया। पति की मौत के बाद बच्चों के पालन-पोषण में मदद की। जिस चचेरी मां ने मुझे सब कुछ सौंप दिया, उस मां रूपी सास को अगर 84 कोस परिक्रमा करा रही हूं तो कौन-सा बड़ा काम कर रही हूं।’ ये बातें […]