जालौन में IAS रिंकू सिंह राही ने स्वतंत्रता आंदोलन और उसमें शामिल क्रांतिकारियों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा- भगत सिंह आज के हिसाब से बेवकूफ और बेकार बच्चे थे। वो घर के हिसाब से बागी थे। जब मैं इतिहास पढ़ता हूं, तो मन में सवाल उठता है कि किसानों का शोषण अंग्रेजों ने किया था या फिर हमारे ही देश के पटवारी ने। शुरुआत में स्वतंत्रता आंदोलन में सिर्फ 1 प्रतिशत लोगों ने हिस्सा लिया था। बाकी लोग अपने धर्म के अनुसार कर्मकांड और परिवार में ही लगे हुए थे। दरअसल, उरई के कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार सुबह 9 बजे स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम था। इसमें रिंकू सिंह भाषण दे रहे थे। इस दौरान डीएम राजेश कुमार पांडेय, ADM वित्त एवं राजस्व राजीव राज, ADM नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य, DPRO राम अयोध्या प्रसाद और EDM पुष्पेंद्र सिंह भी मौजूद थे। दैनिक भास्कर ने जब रिंकू सिंह से इस मामले में बात की तो उन्होंने कहा कि बयान को गलत तरीके से लिया जा रहा है। वह खुद भगत सिंह के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। उनके आदर्शों पर चलते हैं। रिंकू सिंह की कही 5 बातें पढ़िए… 1- किसानों का शोषण हमारे ही पटवारियों ने किया पटवारी इसी देश का आदमी था। क्या उस समय अंग्रेज कलेक्टर ने पटवारी से कहा था कि किसानों का शोषण करो? या फिर अपने अंग्रेज अधिकारी के सामने अच्छा कर्मचारी साबित होने और कागजी लक्ष्य पूरा करने के लिए पटवारी किसानों को पकड़कर ले आए? इतिहास में किसानों समेत आम लोगों के शोषण की पूरी कहानी भरी पड़ी है। अंग्रेजों के कुछ कलेक्टर और उच्च स्तर के अधिकारी थे। लेकिन, बाकी व्यवस्था में काम करने वाले ज्यादातर लोग हमारे ही देश के थे। किसानों का शोषण सिर्फ अंग्रेजों ने नहीं किया, बल्कि इसमें हमारे अपने लोग भी शामिल थे। 2- शुरुआत में 1% लोगों ने ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया अगर सही आकलन किया जाए तो शायद शुरुआत में 1 प्रतिशत लोग भी प्रत्यक्ष रूप से आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं हुए थे। बाकी लोग अपनी सामान्य दिनचर्या में लगे हुए थे। सुबह उठते, अपने धर्म के अनुसार कर्मकांड करते, काम पर जाते और परिवार के साथ समय बिताते थे। कुछ लोगों के मन में यह विचार आया और धीरे-धीरे आंदोलन की धारा आगे बढ़ी। उन्हें समझ में आया कि देश के लिए कुछ करना है। इसके बाद कुछ लोग अपने घरों से निकलकर आजादी की लड़ाई में शामिल हुए। हमारी पारंपरिक सोच रही है कि ‘हम और हमारा परिवार’। कुछ लोगों ने इससे आगे बढ़कर सोचा। उन्होंने माना कि भले ही उन्हें उनके माता-पिता ने जन्म दिया हो, लेकिन मानव जाति और देश के प्रति भी उनकी जिम्मेदारी है। ऐसे लोग अपनी पत्नी-बच्चों और माता-पिता को छोड़कर देश के लिए आगे आए और कुर्बानी दी। 3- भगत सिंह केवल घर के हिसाब से बागी थे रिंकू राही ने कहा कि क्या भगत सिंह के घरवाले नहीं थे? क्या चंद्रशेखर आजाद के घरवाले नहीं थे? वे घर के हिसाब से बागी थे। यही बागी लोग थे, जिन्होंने खुद को देश के साथ खड़ा किया। अपने परिवार की परवाह किए बिना देश के लिए आगे आए। आजादी एक ऐसा विचार था, जिसे लोगों ने समझा और उसके लिए लड़ाई लड़ी। आज के समय में हमें शायद उस भावना की और भी ज्यादा जरूरत है, जो भगत सिंह के मन में रही होगी। उन्होंने सवाल किया कि जब भगत सिंह देश के लिए काम कर रहे थे, तब क्या उन्होंने कभी सोचा होगा कि आगे चलकर उनके जीवन पर कोई बायोग्राफिकल स्केच बनाया जाएगा? 4- 30 साल पुराना केस आया, तो मुझे शर्म आ रही थी कल कोर्ट में एक केस आया था। यह 30 साल पुराना केस है। शर्म आ रही थी मुझे। कभी सोचा होगा कि एक SDM बैठेगा, उसके यहां 30 साल पुराना केस आएगा? शर्म आ रही थी मुझे कि आजादी के दीवानों को मैं सब तरह से धोखा दे रहा हूं। शायद उन्हें पता होता कि आगे ऐसा देश होगा, तो वो नहीं करते। उन्होंने सोचा ही नहीं होगा कि हम जैसे निकम्मे लोग भी हो सकते हैं। 30 साल से, 35 साल से केस चल रहा है एक, खाली पैमाइश का। आसानी से सुलझ सकता है, नहीं हो रहा। कारण हम हैं। 5- अंग्रेजों में भी काफी अच्छे ऑफिसर थे रिंकू ने कहा कि हम नहीं समझ पा रहे कि आजादी थी क्या और क्यों ली गई थी? शायद हम उनमें से हो गए हैं, जो 99 प्रतिशत से ज्यादा लोग थे। जब देश गुलाम था, तब भी जी रहे थे और अब भी जी रहे हैं। अगर हम अंग्रेजी फौज को छोड़ दें, तो उसका काम ही था कि कैसे भी जीतना है, मारकर जीतना है। लेकिन, सिविल सर्विसेज की बात करें तो जो कलेक्टर या दूसरे अधिकारी थे, उनमें भी काफी लोग अच्छे थे। वे भी काफी कुछ अच्छा करना चाहते थे। उन्होंने नई-नई चीजें लाकर दीं। पहले भी विवादों को लेकर चर्चा में रहे… बार एसोसिएशन ने राही की कार्यप्रणाली पर उठाए थे सवाल 4 अगस्त को जालौन बार एसोसिएशन ने SDM (न्यायिक) रिंकू सिंह राही की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 5 अगस्त से राजस्व अदालतों के बहिष्कार का ऐलान किया था। बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ओमनारायण सिंह ने इस संबंध में पत्र जारी किया था। पत्र के मुताबिक, अधिवक्ता तीन बार जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से रिंकू सिंह राही की शिकायत कर चुके थे। बार एसोसिएशन का आरोप था कि राही अदालत में अधिवक्ताओं और वादकारियों की गैरमौजूदगी में एकपक्षीय आदेश पारित करने की बात कहते हैं। वकीलों ने उनके साथ अदालत में अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया था। भाजपा ब्लॉक प्रमुख को धक्का देने का आरोप 29 जून को ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही पर मारपीट करने का आरोप लगाया था। उन्होंने इसका एक वीडियो भी दिखाया था। वीडियो में रिंकू सिंह ब्लॉक प्रमुख के साथ धक्का-मुक्की करते नजर आ रहे थे। वीडियो में रिंकू सिंह ब्लॉक प्रमुख के मोबाइल पर थप्पड़ मारते दिखे, जिससे मोबाइल जमीन पर गिर गया। इसके बाद उन्होंने दोनों हाथों से ब्लॉक प्रमुख को जोरदार धक्का देकर पीछे धकेल दिया। ब्लॉक प्रमुख ने इसकी शिकायत डीएम राजेश कुमार पांडेय से की थी। जानिए कौन हैं रिंकू सिंह राही… रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई, 1982 को हाथरस में एक दलित परिवार में हुआ था। वह थाना सासनी के गांव ऊसवा के रहने वाले हैं। दो भाइयों में बड़े रिंकू के पिता सौदान सिंह राही आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी। अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसकी मदद से उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर 7 गोलियां मारी गई थीं पीसीएस बनने के बाद 2008 में रिंकू सिंह की पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। रिंकू ने दैनिक भास्कर को बताया था- जांच में मुझे पता चला था कि 100 करोड़ रुपए गबन हुआ। इसके पीछे राजनीतिक पार्टी के अलावा पूरा गैंग था। उस समय बसपा सरकार थी। 26 मार्च, 2009 को रिंकू एक सहकर्मी के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे। तभी उन पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। इसमें रिंकू राही को सात गोलियां लगी थी। इनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा तक बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया था। साथ ही एक कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और वे आईएएस बने थे। ——————— ये खबर भी पढ़ेः- कन्नौज में ट्रैक्टर के पहिए में फंसकर युवक की मौत, स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों के लिए बूंदी लेने जा रहा था कन्नौज में स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों के लिए बूंदी लेने निकले 25 साल के युवक की ट्रैक्टर के पहिए और मडगार्ड के बीच फंसकर मौत हो गई। शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे वह ट्रैक्टर पर लिफ्ट लेकर बैठा था। गड्ढे में पहिया जाने से ट्रैक्टर उछला तो पहिए और मडगार्ड के बीच आ गया। पढ़ें पूरी खबर…