‘उत्तर प्रदेश के नेशनल हाईवे अमेरिका के जैसे होंगे। ये वचन, मैं आपको देना चाहता हूं।’ – नितिन गडकरी, 13 जुलाई, 2026 ये दावा महज 18 दिन में ही गलत साबित हो गया। 63 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे 18 दिन में 84 जगहों पर धंस चुका है। आखिरकार, NHAI को एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित करना पड़ा। कंपनी के 3 अफसरों को हटा दिया। अब IIT खड़गपुर की टीम एक्सप्रेस-वे की जांच करेगी। हकीकत जानने दैनिक भास्कर ग्राउंड पर पहुंचा। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए 18 दिन में दुर्दशा कैसे हुई एक्सप्रेस-वे पर लखनऊ से कानपुर की तरफ जाने वाली लेन पर 39 जगह पैचवर्क किया जा चुका है। 200 मीटर दायरे में मरम्मत चल रही है। 100 मीटर के एरिया में सड़क दोबारा बनाई गई। इसी तरह कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन पर 45 जगह मरम्मत की जा चुकी है। कुल 84 जगहों पर मरम्मत की गई है। 30 जुलाई को गिट्टी से लदा एक ट्रक एक्सप्रेस-वे पर धंस गया था। जब पहिया बाहर निकाला, तो पूरा ट्रक ही पलट गया। NHAI ने उस जगह करीब 1000 स्क्वायर फीट एरिया की सड़क को उखाड़ा। 2 फीट गड्ढा किया और उसे फिर से बनाया। करीब 12 घंटे बाद ही उसी जगह दोबारा 1 से 2 इंच की दरार हो गई। मजदूर बोला- 2 इंच गिट्टी, 2 इंच डामर, पैसा बर्बाद कर रहे जो ट्रक पलट गया था, वह हमीरपुर के गोलू कुमार का था। हम पहुंचे तो मजदूर गिट्टी दूसरी गाड़ी में शिफ्ट कर रहे थे। उन्होंने कहा- 2 इंच गिट्टी और 2 इंच डामर डालकर सड़क बनाई जा रही है। सड़क मजबूत नहीं है। पब्लिक के पैसे की बर्बादी है। ट्रक पलटने से हमारे मालिक का ₹1.5 लाख का नुकसान हो गया। एक्सप्रेस-वे पर कटाव रोकने वाले शोल्डर धंसे एक्सप्रेस-वे के किनारे बना ‘शोल्डर’ भी धंस गया है। ये बारिश के पानी से मुख्य सड़क पर होने वाले कटाव को कम करता है। नाली भी टूटी मिलीं। लखनऊ के सीनियर इंजीनियर शैलेंद्र सिंह कहते हैं- ऐसा लगता है कि मिट्टी बिछाकर फाउंडेशन बनाते हुए अनियमितता बरती गई। आमतौर पर 50 सेंटीमीटर की परत में मिट्टी डाली जाती है, जो रोलर चलाने के बाद दबकर 40 सेंटीमीटर रह जाती है, लेकिन यहां ऐसा लगता है कि बीच-बीच में 1 से 2 मीटर मिट्टी इकट्ठा डलवा दी गई। उसे सही से लेवल नहीं किया गया। एक्सपर्ट से वजह समझते हुए हम लखनऊ की तरफ चल पड़े। 5 किमी के बाद गाड़ी में बबल यानी असामान्य उछाल महसूस हुआ। गाड़ी से उतरने पर पता चला कि NHAI ने यहां 3 से 4 दिन पहले ही सड़क बनाई है। 10 किमी के सफर में 8 पॉइंट ऐसे मिले, जहां रोड पर उछाल और झटके महसूस हुए। बीच में करीब 1 फीट का गड्ढा हो गया था। एक्सप्रेस-वे पर 2 से 3 इंच की दरार एक्सप्रेस-वे पर बीच-बीच में 2 से 3 इंच की दरार है। इसके ऊपर खड़े होने पर पैरों के नीचे हल्का कंपन महसूस हुआ। जैसे किसी दलदली मिट्टी पर खड़े हों। इस पर से जैसे ही ट्रक गुजरता है, वैसे ही सड़क दब जाती है। देखकर लगा कि अगर बारिश का पानी यहां जमा होगा तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। 100 किमी की रफ्तार पर गाड़ी चलाना मुश्किल कानपुर से लखनऊ लौटते वक्त हम 50-60 किमी की स्पीड से तीसरी लेन में चल रहे थे। यहां 15 ऐसे पॉइंट मिले, जहां हमें अधिक उछाल महसूस हुए। NHAI ने इस एक्सप्रेस-वे पर अधिकतम स्पीड 100 किमी प्रति घंटे की रखी है। मगर, इस लेन पर 100 की स्पीड से चलाने पर उछाल इतना ज्यादा था कि गाड़ी अनियंत्रित हो रही थी। लखनऊ की एक प्राइवेट कंपनी के इंजीनियर अभिषेक गौर कहते हैं- एक्सप्रेस-वे धंस रहा है, इसका मतलब इसे बनाने में लापरवाही बरती गई। मौजूदा लेयर को हटाना पड़ेगा और फिर से बनाना होगा। एक्सप्रेस-वे बनाने वाली कंपनी भाजपा सांसद के भाई की एक्सप्रेस-वे को PNC इंफ्राटेक कंपनी ने बनाया। इसके मालिक भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई प्रदीप जैन हैं। 23 फरवरी, 2022 को एक्सप्रेस-वे का ठेका मिला था। अक्टूबर, 2024 को कंपनी पर नए टेंडर में भाग लेने पर बैन लगा दिया गया। साथ ही दो सहायक कंपनियां, PNC खजुराहो हाइवेज और PNC बुंदेलखंड हाइवेज को भी बैन कर दिया गया। ये CBI में दर्ज एक मामले को लेकर हुआ था। कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर NHAI के अधिकारियों को रिश्वत देने और अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश का आरोप लगा था। हालांकि, एक साल बाद ही बैन हटा दिया गया। एक्सप्रेस-वे की 1 किमी सड़क बनाने में 75 करोड़ खर्च 63 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे बनाने में कुल 4700 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यानी एक किमी पर करीब 75 करोड़ रुपए खर्च हुआ। यूपी में अब तक जितने भी एक्सप्रेस-वे बने, उसमें यह सबसे महंगा है। इससे करीब 10 गुना ज्यादा लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 18 दिसंबर, 2021 हुआ। 594 किमी एक्सप्रेस-वे बनाने में करीब 36,230 करोड़ रुपए खर्च हुआ था। यानी एक किमी तैयार करने में करीब 61 करोड़ रुपए का खर्च आया। इसका टोल भी महंगा है। हाईवे पर एक तरफ के सफर के 95 रुपए टोल लगता था। एक्सप्रेस-वे पर एक तरफ का टोल 275 रुपए, जबकि दोनों तरफ का टोल 415 रुपए वसूला जा रहा है। गडकरी ने जिन सड़कों से तुलना की, वो कितनी खास ————– ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें – लखनऊ-कानपुर की दूरी कितनी घटी, समय कितना बचा:एक्सप्रेस-वे का सफर 44 मिनट में, लेकिन कानपुर पहुंचने में 1 घंटा 47 मिनट लगेंगे क्या लखनऊ से कानपुर की दूरी अब 45 मिनट में तय होने लगी है? सरकार का दावा तो यही है कि एक्सप्रेस-वे बनने से समय बहुत बचेगा। मंगलवार को पब्लिक के लिए एक्सप्रेस-वे खुलने पर दैनिक भास्कर ने हकीकत जानी। क्या वाकई 45 मिनट में लखनऊ से कानपुर पहुंचा जा सकता है? अगर नहीं तो वजह क्या है? पढ़िए पूरी खबर…