आजमगढ़ हत्याकांड-5 साल की बेटी मां-पापा, भाई को ढूंढ रही:परिवार में सिर्फ दादी और 2 बेटियां बचीं; पिता ने मां-भाई, 2 पंडितों को मार डाला था

आजमगढ़ में पत्नी, बेटे और दो पुजारियों की हत्या करने वाला आरोपी एनकाउंटर में मारा गया। इस पूरी घटना के बाद परिवार में सिर्फ मासूम 2 बेटियां और उनकी दादी बची हैं। दोनों बेटियां मां-पिता और भाई को तलाश रही हैं। 5 साल की बड़ी बेटी को तो अभी भी समझ में नहीं आ रहा कि मां-पिता और भाई अब कभी नहीं आएंगे। मामा उसकी देखभाल कर रहे हैं, लेकिन बेटी बार-बार मां-पापा को याद कर रोने लगती है। वह पूछती है- भाई शौर्य कहां है, मुझे उसके साथ खेलना है। लेकिन, उसके सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं है। वहीं, 7 महीने की बेटी अभी इस दर्द से अनजान है कि उसके मां-पिता और भाई हमेशा के लिए उससे दूर हो चुके हैं। एक ही परिवार की 2 बेटियां इस हादसे को अपने-अपने तरीके से जी रही हैं। एक अपनों को ढूंढ रही है और दूसरी अभी यह समझने की उम्र में भी नहीं है कि उसने क्या खो दिया? पढ़िए, एक परिवार के उजड़ने की कहानी… पहले पूरा मामला जानिए आजमगढ़ जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर अहिरौला थाना इलाके में शंभूपुर गांव है। यहां मंगलवार (22 सितंबर) शाम 6 बजे अरविंद सिंह (42) ने पत्नी बबीता, बेटे शौर्य (9), पुजारी महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (55) की गोली मारकर हत्या कर दी। अब परिवार में मां कमला देवी (70), दो बेटियां परी (5) और शांभवी (7 महीने) बची हैं। पकड़े जाने के डर से अरविंद सिंह ने अपने 3 बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया था। 7 घंटे बाद उसने बेटे पर भी गोली चला दी। इसके बाद ATS, SOG ने अरविंद सिंह को मार गिराया था। पुलिस के मुताबिक, परिवार को शक था कि अरविंद को उसके भाई सुनील की आत्मा परेशान कर रही है। इसलिए पत्नी और मां महामृत्युंजय जाप करा रही थीं। इससे अरविंद नाराज था। मंगलवार शाम 6 बजे इसी बात को लेकर पत्नी से बहस हुई। कहा- तेरे चक्कर में मेरे भाई की हत्या हो गई। अब तू यहां ड्रामा कर रही है। इसके बाद उसने पुजारियों से आधार कार्ड मांगा और उनसे कहासुनी करने लगा। इसी बीच, गुस्से में कमरे से लाइसेंसी रिवॉल्वर लेकर आया, फिर पत्नी और दो पुजारियों को गोली मार दी। अरविंद सिंह की फायरिंग में बेटी परी (5) भी घायल हुई हैं। गोली उसके हाथ को छूकर निकल गई, जिससे उसे मामूली चोट आई है। उसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे के बाद वह सहमी हुई है। बुधवार शाम करीब 7 बजे अरविंद, पत्नी बबीता और बेटे शौर्य सिंह का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। चिता को अरविंद की भतीजी वर्षा ने मुखाग्नि दी। वहीं, पुजारी महेंद्र पाठक का अंतिम संस्कार फूलपुर के दुर्वासा धाम और पुजारी अखिलेश मिश्रा का अंतिम संस्कार अंबेडकर नगर के कमहिरया घाट पर किया गया। 9 घंटे चला पोस्टमॉर्टम, 5 लोगों को कुल 8 गोलियां लगीं पांचों शवों के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया बुधवार को करीब 9 घंटे चली। एडिशनल CMO डॉ. आलेंद्र कुमार, डॉ. एचएल सरोज और डॉ. संजय गौड़ की टीम ने वीडियोग्राफी की निगरानी में पोस्टमॉर्टम किया। गोली लगने से सिर के चीथड़े उड़ गए थे। हत्यारोपी के पंचायतनामा के लिए लोग तैयार नहीं हुए पोस्टमॉर्टम हाउस पर पति-पत्नी और बेटे का शव पड़ा था। गांव से कोई भी व्यक्ति पंचायतनामा के लिए दोपहर तक नहीं पहुंचा। बबीता के मायके पक्ष से महिलाएं आई थीं। उन्होंने बबीता और शौर्य के पोस्टमॉर्टम के लिए पंचायतनामा तैयार कराया। इसके बाद दोनों का पोस्टमॉर्टम हुआ। बबीता के मायकेवालों ने अरविंद सिंह के पंचायतनामा तैयार कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने अरविंद सिंह की मां, बहन, भतीजी आदि को गांव से लेकर आई। फिर पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई शाम 4 बजे शुरू हुई। इसके बाद उसके शव का पोस्टमॉर्टम किया गया। भाई की 8 साल पहले हुई थी हत्या, बालासाहेब ठाकरे के गनर थे 2018 में अरविंद के भाई सुनील सिंह की चचेरे भाइयों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। सुनील महाराष्ट्र में रहते थे और बालासाहेब ठाकरे के गनर थे। सुनील की पत्नी के भाई सूरज सिंह ने बताया- जीजा गांव में अरविंद के साथ भंडारा खाने पहुंचे थे। तभी चचेरे भाई मनीष सिंह और अवनीश ने दोनों को घेर लिया। सुनील को दौड़ाकर गोली मार दी। अरविंद के साथ मारपीट की। सूरज ने बताया- वारदात के बाद बहन ममता (सुनील की पत्नी) ने मनीष और अवनीश के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दोनों डेढ़ महीने पहले ही जेल से बाहर आए थे। उन्होंने बताया- बबीता का मनीष से अफेयर था। यह बात जीजा सुनील को पता चल गई थी। उन्होंने मनीष के खिलाफ चोरी, छिनैती और छेड़खानी समेत कई मामलों में शिकायत की थी। इसी रंजिश में मनीष ने सुनील की हत्या की थी। प्रत्यक्षदर्शी पुजारी बोला- पहले पत्नी, फिर दोनों पंडितों को गोली मारी पंडित हिमांशु ने पुलिस को बताया- अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की आत्मा उन्हें परेशान कर रही थी। इसलिए अरविंद की मां कमला देवी और पत्नी बबीता ने पूजा के लिए बुलाया था। 3 दिन से पूजा चल रही थी। मंगलवार को पूर्णाहुति थी। मैं, मेरे पिता अखिलेश मिश्रा, पंडित महेंद्र पाठक समेत 4 लोग पूजा करा रहे थे। सोमवार को अरविंद ने हमें अगले दिन न आने की चेतावनी दी थी। पूजा का विरोध कर रहा था। मंगलवार शाम 6 बजे वह बाजार से लौटा और पत्नी से बहस करने लगा। हम लोग समझाने पहुंचे, तो वह अपशब्द कहने लगा। उसने हमसे आधार कार्ड मांगा। हमने कहा- हम पुजारी हैं, आधार कार्ड लेकर क्यों घूमेंगे? न हम फेरी वाले हैं, न नेपाल या बांग्लादेश से आए हैं। लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहा। इसी बीच बबीता ने कहा- पंडितों का अपमान मत करो। इस पर अरविंद बोला- तेरे चक्कर में मेरे भाई की हत्या हो गई। अब तू यहां ड्रामा कर रही है। इसके बाद उसने पत्नी बबीता को गोली मार दी। हम भागने लगे तो उसने मेरे पिता को गोली मार दी। दूसरे पंडित महेंद्र चौखट तक पहुंचे थे, तभी उसने उन्हें भी गोली मार दी। मैंने दीवार कूदकर जान बचाई। उसकी मां भी बाहर भाग गईं। फायरिंग की आवाज सुनकर भीड़ जमा हो गई। यह देखकर अरविंद ने तीन बच्चों के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया। पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस पहुंची। —————————- ये खबर भी पढ़िए- बेटी रोई तो पिता ने पुलिस से चॉकलेट मंगवाई: कमरे में बंधक बनाकर 7 घंटे बैठा रहा, SP से बोला- पास आए तो भून दूंगा आजमगढ़ कांड… 4 हत्याएं, एक एनकाउंटर। 7 घंटे में पूरा परिवार बिखर गया। वजह थी- महामृत्युंजय जाप। हत्यारा अरविंद इसका विरोध कर रहा था। पत्नी और मां जाप कराने पर अड़ी थीं। इसी झगड़े में अरविंद ने पहले पत्नी और दो पुजारियों की हत्या कर दी। पढ़ें पूरी खबर…