बेटे की हत्या हुई…हाईकोर्ट ने दोषियों को रिहा किया:बदायूं में 9 साल पहले प्रेम प्रसंग में हुआ था मर्डर, पीड़ित बोले- अब हमें परेशान करेंगे

अब गांव छोड़ना पड़ेगा…पता चला है कि दो चार दिन में वो लोग यहां वापस आ जाएंगे। इसके बाद रंजिशन हमें परेशान करेंगे। वो लोग ताकतवर हैं, पैसे वाले हैं। ऐसे में अब हमें ही गांव छोड़कर जाना पड़ेगा। चले जाएंगे, जहां भी सुरक्षित लगेगा वहां रहेंगे। मेहनत-मजदूरी करके जैसे यहां वक्त काट रहे हैं, वैसे ही वहां भी काटेंगे। उन लोगों से टक्कर लेना हमारे बस का नहीं है। ये कहना है बदायूं के वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव उरैना निवासी पप्पू का। दरअसल, पप्पू के बेटे गोविंद की प्रेम प्रसंग के चलते 14 मई 2017 को हत्या हुई थी। गोविंद का जिस युवती से प्रेम प्रसंग था, उसे भी मार डाला गया था। दिनदहाड़े हुई इस वारदात में आशा के पिता किशनलाल और मां जलधारा समेत उसके दो भाई विजयपाल व रामवीर के खिलाफ मुकदमा लिखा गया था। हाईकोर्ट ने रद्द की चारों आरोपियों की सजा आज इस दोहरे हत्याकांड में 9 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। सेशन कोर्ट से चार अभियुक्तों को सुनाई गई फांसी की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने विजयपाल, किशनलाल, रामवीर और जलधारा को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बता दें, 14 मई 2017 की सुबह गोविंद और आशा की धारदार से हत्या कर दी गई थी। गोविंद के पिता पप्पू ने मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। दैनिक भास्कर गोविंद के घर पहुंचा इस घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम गोविंद के गांव उरैना पहुंची। घर में हमें गोविंद की मां और पिता मिले। दोनों ही कोर्ट के फैसले से परेशान थे। उनका कहना था, बेटे को इंसाफ नहीं दिला पाए इसका दुख है। अब वो आरोपी हम लोगों को परेशान करेंगे, इसका डर है। बता दें, गोविंद का परिवार बहुत गरीब है। ये लोग एक कच्चे मकान में रहते हैं। गोविंद के पिता खेती-किसानी करके घर चलाते हैं। छोटे बेटे ने बताया..भाई को मार दिया गोविंद के पिता ने बताया, हम पढ़े लिखे नहीं हैं इसलिए नहीं पता कि कितनी तारीख या कौन सा महीना था। इतना पता है कि खेतों में गेहूं उठ रहे थे। मैं भूसे की गठरी लेकर घर लौट रहा था तो रास्ते में शोर सुना। छोटे बेटे ने आकर बताया कि गोविंद को मार दिया गया है। यह सुनकर मौके पर पहुंचा तो गोविंद की लाश किशनलाल के घर में थी और आशा की घर के दरवाजे पर पड़ी थी। हम लोगों को गांव के लोगों ने बताया, किसने ये सब किया है। हम लोग गरीब लोग हैं, उन लोगों से लड़ने की ताकत नहीं है। केस किया था वो भी हार गए। अब देखो हमारा क्या होता है। शादी के लिए बुलाया..फिर मार दिया वहीं मां चंपा देवी ने बताया, हमारा भी हंसता खेलता परिवार था। पैसा भले ही कम थे लेकिन किसी को कुछ दे नहीं रहे थे तो किसी के सामने हाथ भी नहीं फैलाते थे। चार बेटियां और दो बेटे थे। बड़े बेटे गोविंद का प्रेम प्रसंग पता लगा तो आशा के घरवालों से बात की गई। वो लोग शादी को राजी थे। शादी की बात और तारीख तय करने के बहाने ही घर से गोविंद को कॊल करके बुलाया था और बाद में उसे मार डाला। अब यहां नहीं रहेंगे वो लोग आएंगे तो हमें भागना पड़ेगा। गांव वालों में है आरोपियों का डर वहीं आरोपियों का गांव में रसूख भी ऐसा है कि पूरे गांव में उनके बारे में कोई कुछ बताने को राजी नहीं है। जिससे भी घर का पता पूछा तो बिना कुछ कहे इशारे से रास्ता बता दिया। पहुंचने पर पता चला आरोपियों का घर बंद पड़ा है। आरोपियों को हाइकोर्ट से राहत मिली है, इसको लेकर बात करना चाही तो गांव वालों का कहना था कि हमें इस मामले में मत डालो। वो लोग आने वाले हैं, आप तो चले जाओगे लेकिन वो लोग लौटकर हमसे बुराई मानेंगे। जब इतना बड़ा कांड करने से नहीं चूके तो भला हम क्या चीज हैं। हमें इसको लेकर कुछ नहीं बोलना। विवेचना अधिकारी से चूक हुई- एडीजीसी मामले में एडीजीसी प्रदीप भारती ने बताया कि इस पूरे मामले में विवेचना अधिकारी के स्तर से भी चूक हुई। उन्होंने आलाकत्ल के रूप में कुल्हाई की बरामदगी दिखाई। जबकि मौके से गड़ासा मिला था। ऐसे में हथियार बरामदगी को संदिग्ध माना गया। जबकि गवाह का मुकर जाना भी एक बड़ी वजह रहा। इसी कारण हाइकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष दोष सिद्ध नहीं कर सका।