मायावती बोलीं- मगरमच्छ जैसे आंसू बहाकर राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं:चंद्रशेखर पर निशाना, कहा- हिंसा और सड़क जाम से न्याय नहीं मिलता

बसपा अध्यक्ष मायावती ने बिना नाम लिए नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- कुछ संगठन और राजनीतिक दल अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए दलित और वंचित वर्गों के लोगों को गुमराह कर सड़कों पर उतार रहे हैं। वे हिंसा, हंगामा और सड़क जाम जैसी परिस्थितियां पैदा करते हैं। इसके बाद उनके नेता घटनास्थल पर पहुंचकर मगरमच्छ की आंसू बहाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, बल्कि मौजूदा हालात में इन वर्गों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। शुक्रवार को बसपा मुख्यालय पर पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो प्रेस कांफ्रेंस कर रही थीं। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों का पूरा लाभ लेने के लिए केंद्र और राज्यों की राजनीतिक सत्ता की ‘मास्टर चाबी’ भी अपने हाथों में लेनी होगी। पढ़िए मायावती के प्रेस कांफ्रेंस की प्रमुख बातें… 1- सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करनी होगी मायावती ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दलित वर्गों के लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए वोट की महत्वपूर्ण ताकत दिलाई। इन अधिकारों का पूरा लाभ लेने के लिए इन वर्गों को केंद्र और राज्यों की राजनीतिक सत्ता की ‘मास्टर चाबी’ भी अपने हाथों में लेनी होगी। इसी विचार पर अमल करते हुए कांशीराम ने बसपा का गठन किया। 2- कोई लड़ाई कानून के दायरे में लड़ी जानी चाहिए पूर्व सीएम मायावती ने कहा- बाबा साहब ने सलाह दी थी कि किसी भी अन्याय या जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई कानून के दायरे में रहकर ही लड़ी जानी चाहिए। संघर्ष भी संवैधानिक और कानूनी तरीके से होना चाहिए। यदि किसी मामले में निचली अदालत से न्याय न मिले, तो सर्वोच्च अदालत तक जाना चाहिए। भारतीय संविधान में इसकी पूरी व्यवस्था है। 3- सड़क पर उतरना समस्या का समाधान नहीं मायावती ने कहा कि इसके बजाय मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज, हरदोई और अन्य राज्यों की तरह बार-बार सड़कों पर उतरना समाधान नहीं है। जो संगठन और राजनीतिक दल अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए इन वर्गों के लोगों को गुमराह कर सड़कों पर उतारते हैं, वे हिंसा, हंगामा और सड़क जाम जैसी परिस्थितियां पैदा करते हैं। 4- नेता राजनीतिक रोटियां सेंकते, पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ी मायावती ने कहा कि हिंसा और हंगामा या सड़क जाम से मुश्किलें पैदा होती। उनके नेता घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। लेकिन इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, बल्कि मौजूदा हालात में इन वर्गों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। एकजुटता और अपने वोट की ताकत से सत्ता की ‘मास्टर चाबी’ हासिल करनी है। यही लाख दुखों की एक दवा है। इसके लिए बसपा लगातार प्रयासरत है। इस मार्ग से हमें बिल्कुल भी नहीं भटकना है। 5- आगामी चुनावों को लेकर सतर्क रहें मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा और अन्य स्थानीय चुनावों का जिक्र करते हुए जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही ऐसे दल और संगठन फिर से सक्रिय हो रहे हैं। लोग इनके बहकावे में न आएं और पूरी तरह सतर्क व सावधान रहें। अब जानिए मेरठ की घटना के बारे में… मेरठ की ललिता गौतम 15 मई को लापता हुई थी। उसका शव 17 मई को रोहटा इलाके में मिला था। मुख्य आरोपी 18 मई को गिरफ्तार हो चुका है। बाद में पुलिस ने सबूत मिटाने के आरोप में एक और आरोपी को पकड़ा है। भीम आर्मी से जुड़े लोग 8 जुलाई को परिवार को भड़का कर डीएम कार्यालय धरना देने पहुंचे। वहां ये प्रदर्शनकारी बिना अनुमति सड़क जाम कर दिया। फिर डीएम गेट तोड़ते हुए पुलिस पर हमला कर दिया। ये प्रदर्शन 6 घंटे चला। जाम में दो एंबुलेंस भी फंस गई थी। पुलिस पर भी लोगों ने पथराव किया। इसमें 11 लोग घायल हो गए। बाद में पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं 30 से अधिक पर एफआईआर दर्ज किया है। सहारनपुर की घटना सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के लालवाला गांव में जमीन और मूर्ति लगाने को लेकर ठाकुरों और दलितों के बीच हुए जातीय संघर्ष हुआ था। करीब दो महीने पहले हुए इस जातीय संघर्ष के दौरान सांसद चंद्रशेखर और उनकी पार्टी ने प्रदर्शन किया था।