यूपी के 122 विधायक दलबदलू, 2027 तक क्या होगा?:मंत्री-सांसद भी पीछे नहीं, भाजपा के 30% MLA दूसरे दलों से आए; पूरी लिस्ट देखिए

यूपी की सियासत में पार्टी बदलने का शोर फिर तेज हो गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव के पहले कौन-सा नेता किस पार्टी में होगा, कहना बहुत मुश्किल है। यूं तो मौकापरस्ती देश के हर राज्य में है, लेकिन यूपी के पॉलिटिकल लीडर्स इसमें सबसे आगे हैं। कुछ नेता तो ऐसे हैं, जिन्होंने मौका पाकर हर पार्टी जॉइन की। कुछ नेता दोबारा आए, लेकिन मौका मिला तो फिर पार्टी छोड़ दी। यूपी सरकार में मंत्री दारा सिंह चौहान 5 बार पार्टी छोड़ चुके हैं। दैनिक भास्कर ने 15 साल का रिकॉर्ड खंगाला, तो दलबदलू नेताओं को लेकर यूपी की तस्वीर चौंकाने वाली निकली। यूपी के मौजूदा 399 विधायकों में 30% यानी 122 विधायक दलबदलू हैं। सांसद भी मौका पाकर दल बदलने में पीछे नहीं रहे। 2027 की सरगर्मी शुरू हो गई। राजभर दावा कर चुके हैं कि सपा में टूट तय है। डिप्टी सीएम केशव मौर्य भी कह चुके हैं कि 26 सपा विधायक भाजपा में आना चाहते हैं। पिछले दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक सवाल के जवाब में कहा था- जो डर जाएगा वह छोड़कर चला जाएगा। चर्चा ऐसी भी है कि भाजपा 40% विधायकों के टिकट काट सकती है। ऐसे में संभावना है कि अगले चुनाव तक कई नेताओं की झंडा-टोपी बदली नजर आ सकती है। पहले बात यूपी के विधायकों की 78 विधायक दूसरे दलों से होकर भाजपा में पहुंचे
दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- हमारे हर दूसरे सांसद ने दल बदला सपा के अच्छे प्रदर्शन के पीछे दूसरे दलों से आए नेता लोकसभा में यूपी के 80 सांसद हैं। इनमें सपा के सांसद सबसे ज्यादा दलबदलू हैं। 37 सांसदों में से 19 दल बदलकर सपा में पहुंचे हैं। ये करीब 51% होता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने अपने इतिहास का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 37 सीटें हासिल कीं। सपा की इस कामयाबी में उन नेताओं का बड़ा योगदान रहा, जो दूसरे दलों से आए थे। लोकसभा में यूपी से भाजपा के 33 सांसद हैं। इनमें 15 दूसरे दलों से होकर भाजपा में पहुंचे हैं। इस तरह पार्टी में करीब 45% सांसद दलबदलू हैं। सिर्फ 18 सांसद भाजपा कैडर के हैं। सहयोगी पार्टियों में रालोद के 50% सांसद इस कैटेगरी में आते हैं। रालोद के कुल 2 सांसदों में से एक दल बदलकर आए हैं। कांग्रेस में भी 50% सांसद सियासी मौका भांपकर पार्टी में आए हैं। कांग्रेस के 6 सांसदों में से 3 दलबदलू हैं। इनमें इमरान मसूद, राकेश राठौर और उज्ज्वल रमण सिंह आते हैं। जबकि राहुल गांधी, किशोरी लाल शर्मा और तनुज पुनिया खांटी कांग्रेसी हैं। 2 बार दल बदलने वाले बड़े चेहरे आगरा से भाजपा सांसद एसपी सिंह बघेल 2 बार पार्टी बदल चुके हैं। मुलायम सिंह यादव उन्हें राजनीति में लेकर आए। 1998 में वे पहली बार सपा के टिकट पर जलेसर से सांसद बने। रामगोपाल यादव से मतभेदों के बाद उन्होंने सपा छोड़ दी। 2010 में बसपा में शामिल होकर राज्यसभा गए। 2014 के चुनाव से ठीक पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। तब से लगातार (2014, 2019, 2024) भाजपा के टिकट पर आगरा से सांसद हैं। 1991 में भाजपा के टिकट पर पहली बार मथुरा से सांसद बने साक्षी महाराज 1996 और 1998 में फर्रुखाबाद से सांसद रहे। 1999 में भाजपा ने टिकट काटा, तो सपा में शामिल हो गए। 2006 में सांसद निधि घोटाले के स्टिंग ऑपरेशन में नाम आने के बाद उन्हें राज्यसभा से निष्कासित कर दिया गया। 2012 में वह फिर भाजपा में लौटे। फिर 2014, 2019 और 2024 में लगातार तीन बार उन्नाव से सांसद चुने गए। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल ‘नंदी’ अपने राजनीतिक करियर में 3 पार्टियों का हिस्सा रहे। 2007 में बसपा के टिकट पर इलाहाबाद शहर दक्षिणी से पहली बार विधायक चुने गए। मायावती सरकार में मंत्री बने। 2014 में अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें बसपा से निष्कासित किया गया। वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने 2 बार दल बदले। सपा के टिकट पर वह 1993 और 2002 में विधायक बने। 2009 में फतेहपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए। कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा सीट से जीते। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। यूपी सरकार के मंत्री भी दल बदलकर फायदा उठाते रहे हैं यूपी कैबिनेट में सबसे ज्यादा दल बदलने वाले मंत्री दारा सिंह चौहान हैं। वह अब तक 5 बार पार्टी बदल चुके हैं। कई मंत्री ऐसे भी हैं, जिन्होंने एक-दो या तीन बार दल बदलकर विधायक, सांसद और फिर मंत्री बनने तक का सफर तय किया। गठबंधन बदलने में भी माहिर हैं पार्टियां पार्टियां यहां गठबंधन भी खूब बदलती रही हैं। यूपी में इस समय NDA की सरकार है। इसमें भाजपा के साथ अपना दल (एस), राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), सुभासपा और निषाद पार्टी शामिल हैं। इनमें अपना दल और निषाद पार्टी शुरू से भाजपा के साथ ही रही हैं। लेकिन, रालोद और सुभासपा ने समय-समय पर अपने राजनीतिक साथी बदले। रालोद- कभी भाजपा, कभी सपा, कभी कांग्रेस के साथ राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग दलों से गठबंधन किया। पार्टी कभी भाजपा, कभी सपा, कभी कांग्रेस और बसपा के साथ बने महागठबंधन का हिस्सा रही। सबसे ज्यादा बार रालोद ने भाजपा और सपा के साथ चुनाव लड़ा। सुभासपा: कुछ सालों में बदलते रहे गठबंधन ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा भी कई बार अपना राजनीतिक साथी बदल चुकी है। ———————- ये खबर भी पढ़ें- जंतर-मंतर प्रदर्शन में डिंपल क्यों दिखीं सख्त, अखिलेश ने इंग्लैंड से फोन पर कहा- वांगचुक से मिलो दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के दौरान मैनपुरी की सपा सांसद डिंपल यादव पहली बार किसी बड़े विरोध प्रदर्शन में प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं। प्रदर्शन के दौरान उनका पुलिस से टकराव हुआ। लाठीचार्ज का मुखर होकर विरोध किया। घायल छात्रों से मुलाकात की और केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। ये भी पढ़िए…