मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग के लिए 3 बड़ी घोषणाएं कीं। पुलिस स्मृति दिवस पर उन्होंने कहा- अब प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अफसरों को वर्दी के लिए 6,400 नहीं, बल्कि 15,000 रुपए भत्ता मिलेगा। इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर का मोटरसाइकिल भत्ता भी 700 से बढ़ाकर 1,000 रुपए कर दिया गया है। वहीं, पुलिसकर्मियों को सिम कार्ड के लिए अब 2,000 की जगह 2,500 रुपए मिलेंगे। ‘पहले अपराधियों पर कार्रवाई से पुलिस डरती थी’ योगी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय ऐसा था, जब पुलिस थानेदार या एसपी अपराधियों पर कार्रवाई करने से पहले सोचते थे। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होते ही सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे। कार्रवाई करने वाले ज्यादाारियों पर ही गाज गिरती थी। उन्होंने दावा किया कि 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 815 दंगे हुए। मथुरा के जवाहर बाग कांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय पुलिस को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। योगी ने कहा- 2017 में सरकार बनने के बाद पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त किया गया। उन्होंने दावा किया कि आज प्रदेश में अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई हो रही है। कानून का राज स्थापित हुआ है। ‘9 साल में पुलिस भर्ती और ट्रेनिंग की क्षमता बढ़ाई’ मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश पुलिस की प्रशिक्षण क्षमता करीब 6,000 कर्मियों की थी, जिसे बढ़ाकर 60,000 से ज्यादा किया गया है। उन्होंने पुलिस भर्ती, महिला कर्मियों की संख्या बढ़ने और 7 बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू किए जाने का भी जिक्र किया। ‘प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए हर जिले में साइबर थाना और हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। महिला पीएसी की तीन बटालियन गठित करने और फॉरेंसिक संस्थान के निर्माण को भी पुलिस व्यवस्था में सुधार के प्रयासों का हिस्सा बताया।’ सीएम ने यूपी के 6 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी पुलिस स्मृति दिवस पर योगी ने उत्तर प्रदेश के 6 पुलिसकर्मी की शहादत को नमन किया। उनके परिवारों को सम्मानित किया। उन्होंने प्रदेश में 2017 के बाद अपराधियों के खिलाफ अभियानों के दौरान 18 पुलिसकर्मियों के शहीद होने और 1,953 के घायल होने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए 425 करोड़ रुपए से ज्यादा की सहायता दिए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण सरकार की प्राथमिकता है। योगी ने यूपी के जिन 6 पुलिसकर्मियों के परिवारों को सम्मानित किया। ये 2 अलग-अलग घटनाओं में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए थे। 4 अगस्त को तड़के करीब 3 बजे ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते धधकती लपटों और जहरीले धुएं के गुबार ने इलेक्ट्रॉनिक पीसीबी चिप मैन्युफैक्चरिंग की पूरी इमारत को चपेट में ले लिया। सायरन बचाते हुए एक दमकल गाड़ी वहां पहुंची। आग बचाने के लिए पहुंची टीम में तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव भी शामिल थे। सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री के अंदर रसायन और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान होने के कारण भड़कती आग पर काबू पाना था। धुएं के घने गुबार के बीच दिखाई देना लगभग नामुमकिन था। लेकिन, बिना अपनी जान की परवाह किए दमकलकर्मियों की टीम पाइप लेकर अंदर दाखिल हुई। सबसे आगे थे तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव। रोहित यादव वॉटर होज थामे सबसे आगे रहकर आग की सीधी लपटों पर पानी की बौछार कर रहे थे। तीर्थपाल सिंह पानी का दबाव और सप्लाई बनाए हुए थे। काफी मशक्कत के बाद जब टीम आग को काबू में करने के बेहद करीब थी, तभी अत्यधिक तापमान और भीषण गर्मी से कंपनी की पक्की दीवार और भारी लोहे का गार्डर कमजोर होकर भरभराकर नीचे आ गिरा। अचानक दीवार और लोहे का बीम गिरते ही तीर्थपाल सिंह, रोहित यादव समेत 5 जवान मलबे में दब गए। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और धुएं का गुबार छा गया। साथी जवानों और पुलिस बल ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद सभी दबे हुए कर्मियों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद फायरमैन रोहित यादव और ड्राइवर तीर्थपाल सिंह को बचाया नहीं जा सका। इस ऑपरेशन का सबसे भावुक पहलू यह था कि कंपनी में काम करने वाले 450 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रोहित यादव सिर्फ 32 साल के थे। वह अपने पीछे पत्नी और 2 छोटी बेटियां छोड़ गए हैं। वहीं, तीर्थपाल सिंह 48 साल के थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और बेटी हैं। जालौन के प्रॉपर्टी कारोबारी विजेंद्र मोर को अपहरण हो गया। आशंका जताई गई कि उनकी करोड़ों की जमीन हड़पने के लिए अपहरण और हत्या की साजिश रची गई। पुलिस को टिप मिली कि उन्हें हरियाणा ले जाया गया है। इस टीम में 4 पुलिसकर्मी और 1 शिकायतकर्ता शामिल थे। इनमें सब-इंस्पेक्टर मोहित कुमार यादव, सब-इंस्पेक्टर सत्यभान सिंह, कॉन्स्टेबल अशोक कुमार, कॉन्स्टेबल प्रदीप कुमार और विजेंद्र का रिश्तेदार अमरीक सिंह शामिल था। ये सभी स्कॉर्पियो से व्यापारी की तलाश में दबिश देने हरियाणा के जींद की ओर जा रहे थे। नूंह के पास केएमपी एक्सप्रेस-वे पर स्कॉर्पियो बेकाबू होकर दूसरी गाड़ी से टकरा गई। हादसे में सब इंस्पेक्टर सत्यभान, मोहित यादव, सिपाही प्रदीप और अशोक समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई। बाद में जांच में पता चला कि श्रीभगवान, संजीव उर्फ कोकिला, मोहित मलिक और अमरजीत सुहाग ने विजेंद्र को जबरन क्रेटा कार में बैठाकर किडनैप किया था। फिर उसकी हत्या कर लाश हमीरपुर के जलालपुर थाना क्षेत्र स्थित कूपरा जंगल में ले गए। वहां करीब 40 लीटर डीजल डालकर लाश जला दी, जिससे पहचान और सबूत पूरी तरह नष्ट हो जाएं। 29 जुलाई को कदौरा के चितैला फार्म हाउस से पुलिस ने मोहित मलिक और उसकी पत्नी सपना रानी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मोहित ने कारोबारी की हत्या करना स्वीकार कर लिया। साथ ही यह भी बताया कि लाश को ठिकाने कहां लगाया? पुलिस ने मोहित और सपना की निशानदेही पर कूपरा जंगल से कंकाल बरामद किया। ————- ये भी पढ़ें- भाजपा को राजा भैया की जरूरत क्यों पड़ी:कुंडा में क्षत्रिय 6%, दलित 26% फिर भी 33 साल से विधायक; गठबंधन हुआ तो किसे फायदा राजा भैया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात की खूब चर्चा हो रही है। इसे हालिया MLC चुनाव में समर्थन जुटाने से जोड़ा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव या MLC चुनाव हो, राजा भैया बिना शर्त भाजपा को समर्थन देते रहे हैं। तो अचानक भाजपा को ऐसी क्या जरूरत आ पड़ी कि खुद प्रदेश अध्यक्ष को राजा भैया से मिलने उनके घर जाना पड़ा? इस मुलाकात के मायने क्या हैं? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…