वाराणसी के रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में रविवार को शामिल होने आया हाथी अचानक बेकाबू हो गया। सुबह करीब 10:30 बजे पंचवटी क्षेत्र में शुरू हुआ उसका तांडव देर रात तक जारी रहा। हाथी ने अपने ही महावत को पटक दिया। उसे लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसे 50 टांके लगे। 20 मकानों के दरवाजे, गेट और बिजली के खंभों को तोड़ दिया। बिजली की 33 हजार वोल्ट की लाइन बंद करानी पड़ी। इसके बाद वह एक बाग में चला गया। जहां घेराबंदी के दौरान उसने 10 से अधिक पेड़ उखाड़ दिए। हाथी को नियंत्रित करने के लिए पुलिस, वन विभाग और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। हाथी को काबू करने के लिए मालिक ने आजमगढ़ से तीन महावत बुलाए। गोरखपुर से मदद लेनी पड़ी। पुलिस ने पंचवटी मैदान और आसपास के क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोक दी। जिस रामलीला में हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, वहां इतने विशाल और शक्तिशाली जानवर को लाने से पहले उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, व्यवहार और आपात स्थिति से निपटने की क्या तैयारी की गई थी? क्या वन विभाग के पास हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के लिए जरूरी उपकरण और प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध थे? भीड़भाड़ वाले आयोजन में हाथी को लाने की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा किस स्तर पर हुई? पढ़िए रिपोर्ट… पुलिस ने बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोकी पंचवटी क्षेत्र में हाथी अचानक अनियंत्रित हो गया। महावत ने उसे काबू करने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उसे ही पटक दिया। इसके बाद हाथी गलियों और मकानों के आसपास घूमने लगा। उसने कई दरवाजों और गेट को नुकसान पहुंचाया। बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने से खतरा और बढ़ गया। पुलिस ने पंचवटी मैदान और आसपास के क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोक दी। पुलिसकर्मियों और वन विभाग की टीम ने हाथी की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उसे घेरने का प्रयास किया। एक बाग में रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वहां भी हाथी ने कई पेड़ उखाड़ दिए। बाद में जब वह सड़क की ओर बढ़ा, तो पुलिस और वनकर्मी उसे नियंत्रित करने में जुटे रहे। गोरखपुर चिड़ियाघर से जाइलेजीन इंजेक्शन मंगाया गया DFO चंदौली बी. शिवशंकर ने बताया कि काशी वन्यजीव अभयारण्य में हाथी जैसे बड़े जानवर नहीं हैं। उनके मुताबिक, चीतल और अन्य वन्यजीवों को पकड़ने के लिए पिंजरे आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन हाथी को नियंत्रित करना अलग तरह की चुनौती है। रामनगर में बेकाबू हाथी को नियंत्रित करने के लिए गोरखपुर चिड़ियाघर से जाइलेजीन (Xylazine) इंजेक्शन मंगाया गया। बड़े जानवरों को शांत करने में इस्तेमाल होने वाली इस दवा का प्रयोग पशु चिकित्सक की निगरानी और सलाह पर ही किया जाना चाहिए। दवा की मात्रा और जानवर की स्थिति का आकलन विशेषज्ञ पशु चिकित्सक करता है। हाथी को लाने से पहले उसकी सुरक्षा और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई थी? क्या स्थानीय वन विभाग को हाथी की स्थिति और आयोजन की जानकारी दी गई थी? साथ ही, हाथी के बेकाबू होने पर उसे नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई थी? इसको लेकर अधिकारी और आयोजन समिति के पदाधिकारी कुछ भी बालने से बच रहे हैं। पहले हाथी से लड़ा फिर बेकाबू हो गया प्रत्यक्षदर्शी अमर ने बताया कि सुबह घटना से पहले दो हाथियों के बीच लड़ाई हुई थी। इसके बाद महावत दूसरे हाथी को वहां से हटाकर इस हाथी को चारा खिलाने के लिए ले जा रहा था। इसी दौरान हाथी ने अपनी जंजीर तोड़ दी। उसने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। हाथी ने मेरे सामने एक खाली जमीन पर लगे गेट को तोड़ दिया। इसके बाद आगे बढ़ते हुए बिजली के खंभे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। एक महावत ने बताया कि उसकी आंखों के सामने हाथी उसके भाई को कुचल रहा था। हमने पीछे से लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चलाए, तब जाकर किसी तरह उसकी जान बच सकी। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। हम लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं कि हाथी को किसी तरह काबू में किया जाए, लेकिन प्रशासन के पास इससे निपटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। रामनगर में हाथियों के उत्पात का पुराना इतिहास, 1976 और 1999 में भी मचा था तांडव रामनगर में हाथी के बेकाबू होने की घटना ने पुराने हादसों की यादें ताजा कर दी हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वर्ष 1976 में महाराजा विभूति नारायण सिंह का हाथी मंगलाप्रसाद दो बार बेकाबू हुआ था। उस दौरान जनहानि की बात भी सामने आई थी। हाथी को नियंत्रित करने के लिए गोखुरू बिछाए गए थे। वहीं, 1999 में गिरिजा मंदिर के पास पीएसी क्षेत्र में उत्पात मचाने वाले हाथी को काबू नहीं किया जा सका, जिसके बाद उसे गोली मार दी गई थी। बाद में उसे उसी इलाके में दफनाए जाने की बात स्थानीय लोगों ने बताई। अब जानिए किसकी थी हाथी वाराणसी की रामलीला में बेकाबू होकर उत्पात मचाने वाला हाथी आजमगढ़ के बरदह थाना क्षेत्र के अस्वनिया गांव निवासी शिबली सिंह उर्फ जसवंत सिंह का है। घटना के बाद जसवंत सिंह का मोबाइल फोन बंद हो गया। उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन एक बार कॉल लगने के बाद फोन स्विच ऑफ हो गया। गांव के लोग भी इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे हैं। जसवंत सिंह सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से जुड़े हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के कार्यक्रमों में भी उनकी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। जसवंत सिंह का छतरपुर में इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज भी संचालित होता है। हाथी के परिवहन के लिए क्या हैं नियम? हाथी को धार्मिक आयोजन या रामलीला में शामिल करने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, लेकिन उसके स्वामित्व और परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और केंद्र सरकार के Captive Elephant (Transfer or Transport) Rules, 2024 में हाथियों के परिवहन से संबंधित शर्तें तय की गई हैं।