मुरादाबाद की सपा सांसद रुचिवीरा और कांठ से सपा विधायक कमाल अख्तर के बीच का टकराव सुर्खियों में है। इस कलह को खत्म कराने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कमाल अख्तर से विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक का पद छीन चुके हैं। बावजूद इसके ये मामला ठंडा पड़ता नजर नहीं आ रहा है। इस बीच रुचिवीरा के भाजपा में जाने की खबरें भी तेजी से फैलीं। दैनिक भास्कर ने रुचि वीरा से सवाल किए। उन्होंने भाजपा में जाने की अटकलों पर कहा- किसी के पास कोई सबूत हो तो पेश करे। मेरी विचारधारा कभी भाजपा से मेल नहीं खाती। मैं सपा की सिपाही हूं, मरते दम तक सपा में रहूंगी। कमाल अख्तर से टकराव पर रुचिवीरा ने कहा- अखिलेशजी ने उन्हें (कमाल अख्तर) जो मैसेज दिया है, उसे मानें। सपा में गुटबाजी से लेकर आजम की रिहाई की कोशिशों तक के सवाल पर रुचिवीरा ने बेबाकी से जवाब दिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल- आपके और कमाल अख्तर के बीच टकराव की असल वजह क्या है? जवाब- टकराव की तो कोई बात नहीं है। मैं सांसद हूं और वो विधायक हैं। मुझे विधायक का चुनाव लड़ना नहीं, जो टकराव होगा। वो एपिसोड अब ओवर हो चुका है। पार्टी में तमाम लोग होते हैं तो मतभेद भी हो सकता है, लेकिन ऐसा कुछ उल्लेखनीय नहीं है। सवाल- आपके और कमाल अख्तर के बीच अखिलेश ने सुलह करा दी थी, लेकिन हालात नहीं बदले? जवाब- कोई भी बात है तो हमें अपने मुखिया को बताना चाहिए। हर पार्टी में छोटी-मोटी बातें होती हैं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत टकराव नहीं है। न ही जमीन, जायदाद या कारोबार का कोई टकराव है। लेकिन, जाहिर है कि चुनाव नजदीक है तो हमें नेता से मिलते रहना चाहिए। यदि अभी भी कोई बयानबाजी कर रहा है तो ये गलत है। जब एपिसोड बंद हो गया और राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निपटा दिया, तो अब बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। सवाल- कमाल अख्तर ने तो आपको चुनाव भी लड़ाया। आपके रिश्ते अच्छे थे, तो ऐसा टकराव क्यों? जवाब- मैं सपा की निष्ठावान सिपाही हूं। किसी भी कार्यक्रम में मुझे साथ में रखने से कुछ न कुछ वोट प्लस ही होगा। मुझे लगता है कि ये इतना बड़ा मामला नहीं था। भाजपा ने मीडिया के जरिए इसे तूल दिया है। किसी कार्यक्रम में फोटो में आना या पोस्टर में फोटो होना, न होना, मेरे लिए बड़ी बात नहीं है। मैं लोगों के दिलों में रहती हूं। मुझे पोस्टर में रहने की जरूरत नहीं है। सवाल- कहा जा रहा कि आप बेटी को मुरादाबाद नगर सीट से चुनाव लड़ाना चाहती हैं, इसलिए टकराव रहा? जवाब- मुरादाबाद में कोई एक व्यक्ति बताए, जिससे मैंने कहा हो कि मैं अपनी बेटी को यहां से चुनाव लड़ाना चाहती हूं। ये दुष्प्रचार हो सकता है। ये भाजपा की योजना भी हो सकती है। मैं पहले भी कह चुकी हूं कि मेरी बेटी का न तो मुरादाबाद जिले से चुनाव लड़ने का कोई इरादा कभी था, न कभी होगा। सवाल- कहा जा रहा है कि आप भाजपा के संपर्क में हैं और भाजपा में जा सकती हैं? जवाब- कोई भी व्यक्ति ऐसा सुबूत दे…। मेरी विचारधारा भाजपा से नहीं मिलती। मेरे ससुर तीन बार विधायक रहे और मंत्री रहे हैं। मैं सेक्युलर सोच की हूं। हां, कुछ छुटभैय्ये ऐसा लिख रहे हैं कि केंद्र से सपा के 37 सांसदों के लिए गाइडलाइन आ गई है। मैं इन लोगों से यह कहना चाहती हूं कि कम से कम परिवार के लोगों को और निष्ठावान लोगों को तो छोड़ दीजिए। न तो मैं किसी के टच में हूं और न ही कोई इसे साबित कर सकता है। भाजपा और भाजपा के विधायक मेरी लोकप्रियता से डरे हैं। मैं जैसे हर सुख-दुख में लोगों के बीच में रहती हूं, उसकी वजह से मैं भाजपा विधायकों के लिए चैलेंज बन गई हूं। सवाल- स्पीकर के साथ आपकी फोटो को वायरल करके आपके भाजपा में जाने की बातें कही जा रही हैं।
जवाब- लोकसभा स्पीकर ओम बिड़लाजी पिछले साल मुरादाबाद आए थे। मेरी जिम्मेदारी है कि मेरे सदन के अध्यक्ष मेरे क्षेत्र में आए हैं तो मैं कम से कम एक बुके देकर उनका स्वागत करूं। ये मेरी जिम्मेदारी भी है और मेरा अधिकार भी है। स्थानीय सांसद होने के नाते मैंने स्पीकर का स्वागत किया था। ये तस्वीर उसी वक्त की है। राजनीति में ये शिष्टाचार सामान्य बात है। सवाल- आपने महिला सांसद को पार्टी में दरकिनार करने की बात कही थी, क्या आपको समय नहीं दिया जाता? जवाब- मैं जब भी वक्त मांगती हूं, मुझे पार्टी नेतृत्व की ओर से वक्त मिलता है। एक -दो दिन आगे पीछे हो सकता है। वे (अखिलेश) पूर्व मुख्यमंत्री हैं और होने वाले मुख्यमंत्री हैं। उनकी व्यस्तता होती है, लेकिन मेरे नेता मुझे वक्त भी देते हैं और मेरी बात भी सुनते हैं। सवाल- आपके और कमाल अख्तर के टकराव का लाभ किसको मिलेगा? जवाब- भाजपा इसको भुनाना चाहती है। जिस मजबूती से सपा चुनाव मैदान में आ रही है, उससे भाजपा की नींद उड़ी है। पिछले आम चुनाव में सपा ने 37 सीटें यूपी में जीती हैं। हम संघर्ष करने वाले लोग हैं। सपा संघर्ष करने वाली पार्टी है। यहां कोई तोड़फोड़ नहीं है। भाजपा मुंगेरीलाल के हसीन सपने न देखे। सब एक साथ मिलकर भाजपा को हराएंगे और अखिलेश यादव को फिर से यूपी का मुख्यमंत्री बनाएंगे। सवाल- आजम खां आपके राजनीतिक गुरु हैं। सांसद बनने के बाद आपने उनकी रिहाई के लिए क्या कोशिशें कीं? जवाब- आजम साहब के साथ जो भी हो रहा है, वो आजाद हिंदुस्तान में किसी भी लीडर के साथ नहीं हुआ है। वे बहुत बड़े सेकुलर नेता हैं। आजम साहब ने पूरा जीवन सपा को समर्पित किया है। उनकी बनाई यूनिवर्सिटी से सभी को फायदा हुआ है। उन्हें टारगेट किया जा रहा है। वे क्रिमिनल नही हैं। मैं और सपा के नेता, सभी चाहते हैं कि आजम साहब बाहर आएं और चुनाव में हमें दिशा-निर्देश दें। लेकिन, सरकार ने तय कर रखा है कि बाहर आने ही नहीं देना है। सरकार से लड़ना मुश्किल बात है, लेकिन हमें भरोसा है कि एक न एक दिन न्याय जरूर मिलेगा। सवाल- क्या सपा सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ बढ़ रही है? जवाब- पहली बात ये है कि अखिलेश यादव का परिवार हो या हम हों, हम सभी सनातन धर्म को और शंकराचार्य जी को मानने वाले लोग हैं। शंकराचार्य का पद हमेशा से सम्मानित रहा है। पहले भी यदि राजा गलत होता था तो शंकराचार्य उसे निर्देश देकर करेक्शन का काम करते थे। लेकिन, सरकार अब उन्हीं की सही बात मानने के लिए तैयार नहीं है। हम सब और हमारी पार्टी के मुखिया सनातन को मानने वाले लोग हैं। इसमें नया क्या है, वे सदा से ही पूजनीय हैं। सवाल- कमाल अख्तर को क्या मैसेज देना चाहती हैं? जवाब- मैं मैसेज देने वाली कौन होती हूं। मैसेज तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने दिया है, उसी का अनुपालन करें। मैं तो यही कहूंगी कि हमें भाजपा से लड़ना है। हमें आपस में नहीं लड़ना है। हो सकता है किसी के आपसी विचार न मिलते हों या हमारी अपनी-अपनी महत्चकांक्षा हो, लेकिन पार्टी हमारे लिए सर्वोपरि है। अगर सरकार बनती है और अखिलेश मुख्यमंत्री बनते हैं तो हम सभी की ताकत बढ़ेगी। ऐसे में हम ज्यादा ताकत से लोगों के काम आ सकेंगे। सवाल- अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर क्या कहेंगी? जवाब- देश के लिए बड़ा दुर्भाग्य है। सनातन धर्म के लोगों की आस्था पर हमला है। पहले इन लोगों ने राम के नाम का लाभ उठाया और अब राम के चंदे की चोरी कर रहे हैं। ये बड़ी डकैती है। सरकार को इस्तीफा देना चाहिए। जिसकी वजह से आप सत्ता में हैं, उसी के मंदिर में चोरी करके आप लोगों की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं। वर्तमान जज की कमेटी बनाकर जांच कराई जाए। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से इस मामले में न्याय की उम्मीद नहीं है। अब जानिए सांसद और विधायक के बीच विवाद क्यों हुआ? दरअसल, सपा सांसद रुचिवीरा ‘पीडीए सम्मेलन’ में न बुलाए जाने से नाराज हैं। वे मानती हैं कि इसके पीछे विधायक कमाल अख्तर का हाथ था। हालांकि, कमाल अख्तर का कहना है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में रुचिवीरा को बहन मानकर उनके लिए मेहनत की। जिस पीडीए सम्मेलन में न बुलाए जाने की बात की जा रही है, वह अमजद पठान को महानगर उपाध्यक्ष बनाए जाने के मौके पर हुआ था। 14 जून को आयोजन मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में राज्यसभा सांसद जावेद अली की तरफ से किया गया था। आगे जानिए, लखनऊ की मीटिंग में क्या हुआ… अखिलेश के सामने भिड़े सांसद-विधायक सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अखिलेश यादव के सामने सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच खूब कहासुनी हुई। रुचि वीरा ने पार्टी कार्यक्रमों में न बुलाने और पोस्टरों में फोटो न लगाए जाने आरोप लगाया। वहीं, कमाल अख्तर ने रुचि वीरा की ओर से कराए गए मुशायरे और आजम खान के जन्मदिन कार्यक्रम में खुद को न बुलाए जाने का आराेप लगाया। अखिलेश के साथ हो रही बैठक में मौजूद एक अन्य व्यक्ति खुशनूद को लेकर भी काफी बहस हुई। बैठक में मौजूद खुशनूद, रुचि वीरा के पक्ष में बात रख रहे थे। इस पर कमाल अख्तर ने ऐतराज जताया और बोले- जावेद अली सांसद हैं, मैडम भी सांसद हैं, मैं विधायक हूं, ये जयवीर जिलाध्यक्ष हैं? ये कौन हैं ? इसका यहां क्या काम है? इस पर रूचि वीरा ने कहा- ये खुशनूद है और ये मेरे साथ आया है। तब कमाल अख्तर बोले- हमारे साथ भी बाहर बहुत लोग हैं, उन्हें भी बुला लूं? विवाद बढ़ने पर अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर और रुचि वीरा को रोका और खुशनूद से पूछा कि कहां के रहने वाले हो? खुशनूद ने बताया कि वो बिजनौर का रहने वाला है। तब अखिलेश ने कहा कि जब बिजनौरवालों को बुलाऊंगा, तब तुम बोलना। इसके बाद रूचि वीरा ने भी खुशनूद को चुप रहने को कहा। ———————- ये खबर भी पढ़िए- सपा विधायक कमाल अख्तर का मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा: बोले- अखिलेशजी का आदेश था; सांसद रुचि वीरा ने शिकायत की थी कमाल अख्तर की मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा से अनबन चल रही है। विवाद को सुलझाने के लिए 25 जून को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में दोनों के साथ बैठक भी की थी। रुचि वीरा और कमाल अख्तर ने एक-दूसरे पर गुटबाजी के आरोप लगाए थे। पूरी खबर पढ़ें…
जवाब- लोकसभा स्पीकर ओम बिड़लाजी पिछले साल मुरादाबाद आए थे। मेरी जिम्मेदारी है कि मेरे सदन के अध्यक्ष मेरे क्षेत्र में आए हैं तो मैं कम से कम एक बुके देकर उनका स्वागत करूं। ये मेरी जिम्मेदारी भी है और मेरा अधिकार भी है। स्थानीय सांसद होने के नाते मैंने स्पीकर का स्वागत किया था। ये तस्वीर उसी वक्त की है। राजनीति में ये शिष्टाचार सामान्य बात है। सवाल- आपने महिला सांसद को पार्टी में दरकिनार करने की बात कही थी, क्या आपको समय नहीं दिया जाता? जवाब- मैं जब भी वक्त मांगती हूं, मुझे पार्टी नेतृत्व की ओर से वक्त मिलता है। एक -दो दिन आगे पीछे हो सकता है। वे (अखिलेश) पूर्व मुख्यमंत्री हैं और होने वाले मुख्यमंत्री हैं। उनकी व्यस्तता होती है, लेकिन मेरे नेता मुझे वक्त भी देते हैं और मेरी बात भी सुनते हैं। सवाल- आपके और कमाल अख्तर के टकराव का लाभ किसको मिलेगा? जवाब- भाजपा इसको भुनाना चाहती है। जिस मजबूती से सपा चुनाव मैदान में आ रही है, उससे भाजपा की नींद उड़ी है। पिछले आम चुनाव में सपा ने 37 सीटें यूपी में जीती हैं। हम संघर्ष करने वाले लोग हैं। सपा संघर्ष करने वाली पार्टी है। यहां कोई तोड़फोड़ नहीं है। भाजपा मुंगेरीलाल के हसीन सपने न देखे। सब एक साथ मिलकर भाजपा को हराएंगे और अखिलेश यादव को फिर से यूपी का मुख्यमंत्री बनाएंगे। सवाल- आजम खां आपके राजनीतिक गुरु हैं। सांसद बनने के बाद आपने उनकी रिहाई के लिए क्या कोशिशें कीं? जवाब- आजम साहब के साथ जो भी हो रहा है, वो आजाद हिंदुस्तान में किसी भी लीडर के साथ नहीं हुआ है। वे बहुत बड़े सेकुलर नेता हैं। आजम साहब ने पूरा जीवन सपा को समर्पित किया है। उनकी बनाई यूनिवर्सिटी से सभी को फायदा हुआ है। उन्हें टारगेट किया जा रहा है। वे क्रिमिनल नही हैं। मैं और सपा के नेता, सभी चाहते हैं कि आजम साहब बाहर आएं और चुनाव में हमें दिशा-निर्देश दें। लेकिन, सरकार ने तय कर रखा है कि बाहर आने ही नहीं देना है। सरकार से लड़ना मुश्किल बात है, लेकिन हमें भरोसा है कि एक न एक दिन न्याय जरूर मिलेगा। सवाल- क्या सपा सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ बढ़ रही है? जवाब- पहली बात ये है कि अखिलेश यादव का परिवार हो या हम हों, हम सभी सनातन धर्म को और शंकराचार्य जी को मानने वाले लोग हैं। शंकराचार्य का पद हमेशा से सम्मानित रहा है। पहले भी यदि राजा गलत होता था तो शंकराचार्य उसे निर्देश देकर करेक्शन का काम करते थे। लेकिन, सरकार अब उन्हीं की सही बात मानने के लिए तैयार नहीं है। हम सब और हमारी पार्टी के मुखिया सनातन को मानने वाले लोग हैं। इसमें नया क्या है, वे सदा से ही पूजनीय हैं। सवाल- कमाल अख्तर को क्या मैसेज देना चाहती हैं? जवाब- मैं मैसेज देने वाली कौन होती हूं। मैसेज तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने दिया है, उसी का अनुपालन करें। मैं तो यही कहूंगी कि हमें भाजपा से लड़ना है। हमें आपस में नहीं लड़ना है। हो सकता है किसी के आपसी विचार न मिलते हों या हमारी अपनी-अपनी महत्चकांक्षा हो, लेकिन पार्टी हमारे लिए सर्वोपरि है। अगर सरकार बनती है और अखिलेश मुख्यमंत्री बनते हैं तो हम सभी की ताकत बढ़ेगी। ऐसे में हम ज्यादा ताकत से लोगों के काम आ सकेंगे। सवाल- अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर क्या कहेंगी? जवाब- देश के लिए बड़ा दुर्भाग्य है। सनातन धर्म के लोगों की आस्था पर हमला है। पहले इन लोगों ने राम के नाम का लाभ उठाया और अब राम के चंदे की चोरी कर रहे हैं। ये बड़ी डकैती है। सरकार को इस्तीफा देना चाहिए। जिसकी वजह से आप सत्ता में हैं, उसी के मंदिर में चोरी करके आप लोगों की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं। वर्तमान जज की कमेटी बनाकर जांच कराई जाए। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से इस मामले में न्याय की उम्मीद नहीं है। अब जानिए सांसद और विधायक के बीच विवाद क्यों हुआ? दरअसल, सपा सांसद रुचिवीरा ‘पीडीए सम्मेलन’ में न बुलाए जाने से नाराज हैं। वे मानती हैं कि इसके पीछे विधायक कमाल अख्तर का हाथ था। हालांकि, कमाल अख्तर का कहना है कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में रुचिवीरा को बहन मानकर उनके लिए मेहनत की। जिस पीडीए सम्मेलन में न बुलाए जाने की बात की जा रही है, वह अमजद पठान को महानगर उपाध्यक्ष बनाए जाने के मौके पर हुआ था। 14 जून को आयोजन मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में राज्यसभा सांसद जावेद अली की तरफ से किया गया था। आगे जानिए, लखनऊ की मीटिंग में क्या हुआ… अखिलेश के सामने भिड़े सांसद-विधायक सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अखिलेश यादव के सामने सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच खूब कहासुनी हुई। रुचि वीरा ने पार्टी कार्यक्रमों में न बुलाने और पोस्टरों में फोटो न लगाए जाने आरोप लगाया। वहीं, कमाल अख्तर ने रुचि वीरा की ओर से कराए गए मुशायरे और आजम खान के जन्मदिन कार्यक्रम में खुद को न बुलाए जाने का आराेप लगाया। अखिलेश के साथ हो रही बैठक में मौजूद एक अन्य व्यक्ति खुशनूद को लेकर भी काफी बहस हुई। बैठक में मौजूद खुशनूद, रुचि वीरा के पक्ष में बात रख रहे थे। इस पर कमाल अख्तर ने ऐतराज जताया और बोले- जावेद अली सांसद हैं, मैडम भी सांसद हैं, मैं विधायक हूं, ये जयवीर जिलाध्यक्ष हैं? ये कौन हैं ? इसका यहां क्या काम है? इस पर रूचि वीरा ने कहा- ये खुशनूद है और ये मेरे साथ आया है। तब कमाल अख्तर बोले- हमारे साथ भी बाहर बहुत लोग हैं, उन्हें भी बुला लूं? विवाद बढ़ने पर अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर और रुचि वीरा को रोका और खुशनूद से पूछा कि कहां के रहने वाले हो? खुशनूद ने बताया कि वो बिजनौर का रहने वाला है। तब अखिलेश ने कहा कि जब बिजनौरवालों को बुलाऊंगा, तब तुम बोलना। इसके बाद रूचि वीरा ने भी खुशनूद को चुप रहने को कहा। ———————- ये खबर भी पढ़िए- सपा विधायक कमाल अख्तर का मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा: बोले- अखिलेशजी का आदेश था; सांसद रुचि वीरा ने शिकायत की थी कमाल अख्तर की मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा से अनबन चल रही है। विवाद को सुलझाने के लिए 25 जून को पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में दोनों के साथ बैठक भी की थी। रुचि वीरा और कमाल अख्तर ने एक-दूसरे पर गुटबाजी के आरोप लगाए थे। पूरी खबर पढ़ें…