इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को पुलिस की लापरवाही पर यूपी सरकार पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है। दोपहर करीब 3 बजे कोर्ट ने कहा- अगर पुलिस समय पर अपना काम करती तो 3 जुलाई को ही जमानत पर फैसला हो जाता। पुलिस की लापरवाही से मामला 10 दिन से ज्यादा लटका रहा। इस मामले में हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी, दरोगा और सर्किल अधिकारी यानी CO को तलब किया था। सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी से पूछा कि बेल याचिका में 10 दिन की देरी क्यों हुई। इस पर SHO ने कहा- कांवड़ यात्रा को लेकर व्यस्त था। अन्य दोनों अफसरों ने भी अलग-अलग जवाब दिए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की रकम याचिकाकर्ताओं को दी जाएगी। बाद में सरकार चाहे तो जांच कर संबंधित पुलिस अधिकारियों से इसकी वसूली कर सकती है। मामला दहेज मृत्यु केस में आरोपी सास-ससुर की जमानत से जुड़ा था। दोनों को जमानत दी गई। अब पढ़िए पूरा मामला… बिजनौर में दर्ज हुआ था दहेज हत्या का केस बिजनौर के चांदपुर थाना क्षेत्र में दहेज हत्या का केस दर्ज हुआ था। इस केस में सास-ससुर आरोपी बनाए गए थे। जमानत के लिए दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि दहेज के लिए महिला को प्रताड़ित किया गया था। गवाहों के बयान भी पति-पत्नी के सामान्य घरेलू विवाद की ओर इशारा करते हैं। इसलिए दोनों आरोपियों को जमानत दे दी गई। पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी हाईकोर्ट ने मामले में पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि संयुक्त निदेशक (अभियोजन) कार्यालय ने 17 जून को जमानत याचिका की कॉपी पुलिस पैरोकार को उपलब्ध करा दी थी। इसके बाद 19 जून को पुलिस अधीक्षक को अलर्ट भेजा गया और 29 जून को रिमाइंडर भी जारी किया गया। इसके बावजूद पुलिस ने अदालत को आवश्यक निर्देश और केस डायरी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे सुनवाई प्रभावित हुई। कोर्ट के निर्देश के बाद भी नहीं भेजी गई केस डायरी
अदालत ने कहा कि 3 जुलाई को सीसीटीएनएस पोर्टल से केस डायरी का पीडीएफ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन पुलिस ने केवल आरोपियों का आपराधिक इतिहास भेजा। आवश्यक केस डायरी उपलब्ध नहीं कराई गई। स्थिति को देखते हुए संबंधित थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक और सर्किल अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ा। अफसरों ने छुट्टी और कांवड़ ड्यूटी का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी ने अवकाश और कांवड़ यात्रा की ड्यूटी को देरी का कारण बताया। वहीं दरोगा ने इसे ‘कम्युनिकेशन गैप’ बताया। सर्किल अधिकारी ने कहा कि उनके साथ तैनात हेड कांस्टेबल ने हाईकोर्ट से प्राप्त संदेशों की जानकारी नहीं दी थी। अदालत ने अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के रवैये पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना। 3 जुलाई को ही हो सकता था फैसला हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस समय पर आवश्यक निर्देश और केस डायरी उपलब्ध करा देती, तो जमानत याचिका का निस्तारण 3 जुलाई को ही हो सकता था। अधिकारियों की लापरवाही के कारण मामला 10 दिनों से अधिक समय तक लंबित रहा। इसी आधार पर अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया। निर्देश दिया कि यह राशि याचिकाकर्ताओं को भुगतान की जाए। साथ ही बिजनौर के पुलिस अधीक्षक को संबंधित अधिकारियों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने और जरूरत पड़ने पर यह राशि उनसे वसूलने के निर्देश दिए। अदालत ने अपने आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और बिजनौर के पुलिस अधीक्षक को भी भेजने का आदेश दिया है। ————————– ये खबर भी पढ़ें बुलंदशहर में बीच सड़क डबल मर्डर, 15 मिनट तक फायरिंग, दो युवकों के सीने पर गोली मारी, कार चढ़ाई यूपी के बुलंदशहर में मंगलवार रात 9.30 बजे दो लोगों की हत्या कर दी गई। पैसों के लेनदेन को लेकर दो पक्षों में बीच सड़क विवाद हो गया। पहले दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। देखते ही देखते मारपीट होने लगी। फिर दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई। करीब 15 मिनट तक दोनों तरफ से फायरिंग होती रही। इसके बाद एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर कार चढ़ा दी। पूरी खबर पढ़ें
अदालत ने कहा कि 3 जुलाई को सीसीटीएनएस पोर्टल से केस डायरी का पीडीएफ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन पुलिस ने केवल आरोपियों का आपराधिक इतिहास भेजा। आवश्यक केस डायरी उपलब्ध नहीं कराई गई। स्थिति को देखते हुए संबंधित थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक और सर्किल अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ा। अफसरों ने छुट्टी और कांवड़ ड्यूटी का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी ने अवकाश और कांवड़ यात्रा की ड्यूटी को देरी का कारण बताया। वहीं दरोगा ने इसे ‘कम्युनिकेशन गैप’ बताया। सर्किल अधिकारी ने कहा कि उनके साथ तैनात हेड कांस्टेबल ने हाईकोर्ट से प्राप्त संदेशों की जानकारी नहीं दी थी। अदालत ने अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के रवैये पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना। 3 जुलाई को ही हो सकता था फैसला हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस समय पर आवश्यक निर्देश और केस डायरी उपलब्ध करा देती, तो जमानत याचिका का निस्तारण 3 जुलाई को ही हो सकता था। अधिकारियों की लापरवाही के कारण मामला 10 दिनों से अधिक समय तक लंबित रहा। इसी आधार पर अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया। निर्देश दिया कि यह राशि याचिकाकर्ताओं को भुगतान की जाए। साथ ही बिजनौर के पुलिस अधीक्षक को संबंधित अधिकारियों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने और जरूरत पड़ने पर यह राशि उनसे वसूलने के निर्देश दिए। अदालत ने अपने आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और बिजनौर के पुलिस अधीक्षक को भी भेजने का आदेश दिया है। ————————– ये खबर भी पढ़ें बुलंदशहर में बीच सड़क डबल मर्डर, 15 मिनट तक फायरिंग, दो युवकों के सीने पर गोली मारी, कार चढ़ाई यूपी के बुलंदशहर में मंगलवार रात 9.30 बजे दो लोगों की हत्या कर दी गई। पैसों के लेनदेन को लेकर दो पक्षों में बीच सड़क विवाद हो गया। पहले दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। देखते ही देखते मारपीट होने लगी। फिर दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई। करीब 15 मिनट तक दोनों तरफ से फायरिंग होती रही। इसके बाद एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर कार चढ़ा दी। पूरी खबर पढ़ें