गंगा का जलस्तर बढ़ा तो हम लोगों को घर छोड़कर बाढ़ राहत कैंप में जाना पड़ा। लेकिन, अब जलस्तर घट गया है तो अपने घर की सफाई कर रहे हैं। 2 दिन से नगर निगम को शिकायत की। लेकिन, कोई सफाई के लिए नहीं आया। घर का बहुत-सा सामान खराब हो गया है। इसी रास्ते से शव लेकर लोग आते-जाते हैं। हम लोगों को बीमारी का भी खतरा है। यह कहना है वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट के रहने वाले भारत का। दरअसल, वाराणसी के गंगा और वरुणा क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के कारण हजारों लोग घर छोड़ गए थे। अब गंगा का जलस्तर जैसे-जैसे घट रहा है। लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। घर पहुंचने पर देखा तो कई के घर से बर्तन बाढ़ में बह गए। लोग साफ सफाई कर रहे हैं। लेकिन, बाढ़ का पानी घटने पर सिल्ट ने लोगों को परेशान कर दिया है। कीचड़-गंदगी से मच्छर भी बढ़ रहे हैं, जिससे बीमारी का खतरा है। दैनिक भास्कर टीम ने प्रमुख गंगा घाटों और मोहल्ले के लोगों से बातचीत की। जाना कैसे वो रहते हैं? कितना सामान खराब हो गया? प्रशासन से क्या मदद मिली? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… खुद पंप लगाकर साफ कर रहे
सबसे पहले हम वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पहुंचे। जहां पर कुछ लोग अंतिम संस्कार के लिए शव लिए खड़े थे। घाट जाने वाले मेन रूट पर स्थानीय लोग पंप लगाकर साफ सफाई कर रहे थे। लोगों ने बातचीत में कहा- ये पंप प्रशासन की ओर से नहीं, बल्कि हमने खुद लगवाई है। गली में जाने पर हमारी मुलाकात पंकज यादव हुई। उन्होंने बताया कि गंगा का पानी घट रहा है। लेकिन, घर के सामने दलदली मिट्टी जमा हो गई है। जो हम पर्सनल मशीन लगाकर साफ कर रहे हैं। पंकज ने कहा- मिट्टी लगने के कारण हमारे घर के बर्तन, बेड, दरवाजा सब कुछ खराब हो गए हैं। हम उसको साफ कर रहे हैं। इस रास्ते से लोग शव लेकर जाते हैं। हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि यह रास्ता ठीक हो जाए, जिससे उन लोगों को भी आने-जाने में समस्या न हो। एक पुरानी टीवी थी, वो भी नहीं बची
विक्रम चौधरी ने बताया- हम लोगों को शवदाह करने में दिक्कत हो रही है। अभी गंगा का जलस्तर घाट से नीचे नहीं उतरा है। लेकिन, गली में मिट्टी जमा हो गई है। उसे हम लोग साफ कर रहे हैं। गली में कुछ लोग किराए का मकान लेकर रहते थे। उनके घर का बर्तन, टीवी खराब हो गया है। कुछ लकड़ियां भी खराब हुई हैं, जिसे हम लोग साफ कर रहे हैं। घाट जाने वाले रास्ते पर कफन बेचने वाले दुकानदारों की दुकान में मिट्टी घुस गई है। घर के बर्तन बाढ़ में बह गए
विजय यादव ने कहा- पानी घट गया है, लेकिन घर में सीलन है। अभी हमारे घर की गली साफ नहीं हुई है, बल्कि सिल्ट जमा हुई है। अभी हमारे परिवार के लोग दूसरे मकान में हैं। कुछ लोग रिश्तेदारों के घर पर रुके हैं। अभी गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है। इसलिए हमें डर है कि जब पूरी तरह से गंगा का जलस्तर घट जाएगा, तब हम सभी अपने घर में रहने के लिए आएंगे। प्रशासन से अपील की है कि हमारे मोहल्ले में समय-समय पर दवा का छिड़काव किया जाए। यहां की गंदगी को तुरंत साफ कराया जाए। तीर्थ पुरोहित और नाविक साफ करा रहे घाट
सुमित सिंह ने बताया- अब वाराणसी के गंगा घाट किनारे ऐसे बहुत से त्योहार आने वाले हैं, जिसमें महिलाएं आती हैं। लेकिन, अभी घाट पर मिट्टी जमा है। गंगा का जलस्तर घट से नीचे चला गया है। इसलिए हम लोग पंप लगाकर जल्द से जल्द मिट्टी को साफ करने की कोशिश कर रहे हैं। नगर निगम से भी अपील की है कि वह भी पंप लगाकर जल्द से जल्द हमारा सहयोग करें, जिससे अभी मिट्टी गीली है। जल्दी सफाई हो जाएगी। घाट किनारे जो दुकान थीं, उसमें पूरी तरह से मिट्टी घुसी हुई है। दुकान खराब हो गई है। अब जानिए प्रशासन की क्या है तैयारी
नगर निगम जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने कहा-बाढ़ का पानी कम होने के बाद सफाई व कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। मणिकर्णिका घाट पर सतुआ बाबा आश्रम, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अस्सी घाट, कोनिया, ढ़ेलवारिया आदि क्षेत्रों में नगर निगम की टीम पानी का जल स्तर कम होने के बाद सिल्ट साफ कर रही है। सोडियम हाइपो क्लोराइड, चूने, ब्लीचिंग पाउड व फागिंग कराई गई हैं। हमारे पास पर्याप्त पंप है। जहां भी जरूरत पड़ेगा लगाया जाएगा। 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रही गंगा
वाराणसी में गंगा अब चेतावनी बिंदु से नीचे चली गई है। 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा घाट रही है। लेकिन, अभी भी सभी घाटों का आपसी संपर्क टूटा हुआ है। घाट के सीढ़ियों की साफ सफाई की जा रही है। घाट आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वह गहरे पानी में जाकर स्नान न करें नाव का संचालन पूरी तरह से बंद है। अभी भी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की छत पर सौदा हो रहा है। वहीं, हरिश्चंद्र घाट के गलियों में प्रशासन गंदगी को साफ कर रहा है। ———————– ये खबर भी पढ़िए- किन्नर और उसके भाई की हत्या, शव बेड में छिपाया: कानपुर में 4 दिन से सड़ रही थीं लाशें; प्रेम-प्रसंग में मर्डर की आशंका कानपुर में किन्नर और उसके मुंहबोले भाई की हत्या कर दी गई। किन्नर का शव दीवान में ठूंसा मिला, जबकि उसके भाई का शव जमीन पर पड़ा था। घटना का पता उस वक्त चला, जब 4 दिन से फोन न उठाने पर मां, पिता और बहन पहुंचे। देखा तो दरवाजा बाहर से बंद था। घर के अंदर से तेज बदबू आ रही थी। अंदर गए तो देखा, दोनों की लाश पड़ी हुई थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पढ़ें पूरी खबर…
सबसे पहले हम वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पहुंचे। जहां पर कुछ लोग अंतिम संस्कार के लिए शव लिए खड़े थे। घाट जाने वाले मेन रूट पर स्थानीय लोग पंप लगाकर साफ सफाई कर रहे थे। लोगों ने बातचीत में कहा- ये पंप प्रशासन की ओर से नहीं, बल्कि हमने खुद लगवाई है। गली में जाने पर हमारी मुलाकात पंकज यादव हुई। उन्होंने बताया कि गंगा का पानी घट रहा है। लेकिन, घर के सामने दलदली मिट्टी जमा हो गई है। जो हम पर्सनल मशीन लगाकर साफ कर रहे हैं। पंकज ने कहा- मिट्टी लगने के कारण हमारे घर के बर्तन, बेड, दरवाजा सब कुछ खराब हो गए हैं। हम उसको साफ कर रहे हैं। इस रास्ते से लोग शव लेकर जाते हैं। हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि यह रास्ता ठीक हो जाए, जिससे उन लोगों को भी आने-जाने में समस्या न हो। एक पुरानी टीवी थी, वो भी नहीं बची
विक्रम चौधरी ने बताया- हम लोगों को शवदाह करने में दिक्कत हो रही है। अभी गंगा का जलस्तर घाट से नीचे नहीं उतरा है। लेकिन, गली में मिट्टी जमा हो गई है। उसे हम लोग साफ कर रहे हैं। गली में कुछ लोग किराए का मकान लेकर रहते थे। उनके घर का बर्तन, टीवी खराब हो गया है। कुछ लकड़ियां भी खराब हुई हैं, जिसे हम लोग साफ कर रहे हैं। घाट जाने वाले रास्ते पर कफन बेचने वाले दुकानदारों की दुकान में मिट्टी घुस गई है। घर के बर्तन बाढ़ में बह गए
विजय यादव ने कहा- पानी घट गया है, लेकिन घर में सीलन है। अभी हमारे घर की गली साफ नहीं हुई है, बल्कि सिल्ट जमा हुई है। अभी हमारे परिवार के लोग दूसरे मकान में हैं। कुछ लोग रिश्तेदारों के घर पर रुके हैं। अभी गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है। इसलिए हमें डर है कि जब पूरी तरह से गंगा का जलस्तर घट जाएगा, तब हम सभी अपने घर में रहने के लिए आएंगे। प्रशासन से अपील की है कि हमारे मोहल्ले में समय-समय पर दवा का छिड़काव किया जाए। यहां की गंदगी को तुरंत साफ कराया जाए। तीर्थ पुरोहित और नाविक साफ करा रहे घाट
सुमित सिंह ने बताया- अब वाराणसी के गंगा घाट किनारे ऐसे बहुत से त्योहार आने वाले हैं, जिसमें महिलाएं आती हैं। लेकिन, अभी घाट पर मिट्टी जमा है। गंगा का जलस्तर घट से नीचे चला गया है। इसलिए हम लोग पंप लगाकर जल्द से जल्द मिट्टी को साफ करने की कोशिश कर रहे हैं। नगर निगम से भी अपील की है कि वह भी पंप लगाकर जल्द से जल्द हमारा सहयोग करें, जिससे अभी मिट्टी गीली है। जल्दी सफाई हो जाएगी। घाट किनारे जो दुकान थीं, उसमें पूरी तरह से मिट्टी घुसी हुई है। दुकान खराब हो गई है। अब जानिए प्रशासन की क्या है तैयारी
नगर निगम जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने कहा-बाढ़ का पानी कम होने के बाद सफाई व कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। मणिकर्णिका घाट पर सतुआ बाबा आश्रम, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अस्सी घाट, कोनिया, ढ़ेलवारिया आदि क्षेत्रों में नगर निगम की टीम पानी का जल स्तर कम होने के बाद सिल्ट साफ कर रही है। सोडियम हाइपो क्लोराइड, चूने, ब्लीचिंग पाउड व फागिंग कराई गई हैं। हमारे पास पर्याप्त पंप है। जहां भी जरूरत पड़ेगा लगाया जाएगा। 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रही गंगा
वाराणसी में गंगा अब चेतावनी बिंदु से नीचे चली गई है। 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा घाट रही है। लेकिन, अभी भी सभी घाटों का आपसी संपर्क टूटा हुआ है। घाट के सीढ़ियों की साफ सफाई की जा रही है। घाट आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वह गहरे पानी में जाकर स्नान न करें नाव का संचालन पूरी तरह से बंद है। अभी भी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की छत पर सौदा हो रहा है। वहीं, हरिश्चंद्र घाट के गलियों में प्रशासन गंदगी को साफ कर रहा है। ———————– ये खबर भी पढ़िए- किन्नर और उसके भाई की हत्या, शव बेड में छिपाया: कानपुर में 4 दिन से सड़ रही थीं लाशें; प्रेम-प्रसंग में मर्डर की आशंका कानपुर में किन्नर और उसके मुंहबोले भाई की हत्या कर दी गई। किन्नर का शव दीवान में ठूंसा मिला, जबकि उसके भाई का शव जमीन पर पड़ा था। घटना का पता उस वक्त चला, जब 4 दिन से फोन न उठाने पर मां, पिता और बहन पहुंचे। देखा तो दरवाजा बाहर से बंद था। घर के अंदर से तेज बदबू आ रही थी। अंदर गए तो देखा, दोनों की लाश पड़ी हुई थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पढ़ें पूरी खबर…