क्या अखिलेश आजम को मनाने जा रहे:मुलायम की कल्याण सिंह से दोस्ती पर अलग हुए थे; सपा बोली- अखिलेश ने बिना हो-हल्ला मदद की

आजम खान 23 सितंबर को जेल से बाहर आए। लेकिन उनका अगला कदम क्या होगा, यह चर्चा यूपी की राजनीति में बनी है। फिलहाल आजम खान दिल्ली में हैं और अपना इलाज करा रहे हैं। वहीं, अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को रामपुर पहुंच रहे। वे आजम के परिवार के साथ एक घंटे से ज्यादा रहेंगे। हालांकि, इसे लेकर दोनों ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है। अखिलेश यादव ने सिर्फ इतना कहा है कि मैं रामपुर जाऊंगा, कार्यक्रम जारी हाे चुका है। आजम खान न सिर्फ समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे हैं, बल्कि मुलायम सिंह के सबसे करीबी भी रहे हैं। वह बड़ा मुस्लिम चेहरा रहे हैं। ऐसे में क्या वजह है कि आजम की सपा से दूरी की बातें सामने आ रही हैं? क्या जेल में रहने के दौरान आजम खान की मदद सपा ने या अखिलेश यादव ने नहीं की? आजम इससे पहले समाजवादी पार्टी से कब-कब और क्यों नाराज हुए? उनके परिवार के लोग और समाजवादी पार्टी के समर्थक क्या कह रहे? इन सारे सवालों का जवाब इस खास खबर में पढ़िए… यह सवाल कैसे आया कि आजम को अखिलेश और सपा से मदद नहीं मिल रही
इसी साल जून महीने में तंजीन फातिमा आजम खान से मिलने सीतापुर जेल पहुंची थीं। बाहर निकल कर उन्होंने आजम खान की जेल में सेहत बिगड़ने पर कहा था- कोई मदद नहीं कर रहा। सिर्फ अल्लाह पर भरोसा है। इसके पहले और बाद में भी आजम के समर्थक सपा और अखिलेश पर मदद नहीं करने की बात कहते रहे थे। उनका मानना है कि सपा सिर्फ आजम के मुस्लिम वोटों के लिए इस्तेमाल करती है। जब उन्हें मदद की जरूरत पड़ी, तो पार्टी शांत बैठी रही। हालांकि, एक पॉडकास्ट में आजम के बेटे अब्दुल्लाह आजम ने कहा था कि कुछ लोग मदद करके दिखावा करते हैं। लेकिन, सपा और अखिलेश ने बिना किसी को बताए मदद की। सपा ने परिवार की हर जरूरत पूरी की। वरिष्ठ पत्रकार कुलसुम ताल्हा कहती हैं- अखिलेश यादव, मुलायम सिंह के बेटे हैं। मुलायम सिंह लोगों की ऐसी मदद करते थे कि उसे भी नहीं पता चलता था। अखिलेश यादव में भी वही गुण हैं। वे सत्ता में नहीं हैं, जो खुलकर उनकी मदद कर सकें। उन्होंने अपने तरीके से हर कदम पर आजम की मदद की, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से प्रचारित नहीं किया। इसकी एक वजह यह भी थी कि भाजपा इसे अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाकर तूल दे सकती थी। तब शायद आजम खान के लिए ज्यादा मुश्किलें हो सकती थीं। अखिलेश ने चुपचाप मदद की, दिखावा नहीं किया। न ही आगे अखिलेश इसके बारे में कोई बात करेंगे। आजम के मामले में क्या रही सपा की भूमिका
कुलसुम कहती हैं- समाजवादी पार्टी ने आजम खान को हर मौके पर तरजीह दी। यहां तक कि उनके कहने पर ही अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट में उनका केस लड़ने वाले कपिल सिब्बल को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा भेजा। 2022 में आजम को सुप्रीम कोर्ट से राहत दिलाने में कपिल सिब्बल की अहम भूमिका थी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई कहते हैं- अखिलेश यादव जो मदद करते हैं, उसका दिखावा नहीं करते। सत्ता हो या न हो, किसी के साथ गलत हुआ है और हमारे नेता को पता चला है, तो उन्होंने उसकी मदद जरूर की है। उसका प्रचार नहीं किया। इमरान उल्लाह अखिलेश यादव के सबसे करीबी लोगों में से एक हैं। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार में अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) के पद पर रहे। उन्होंने ज्यादातर समाजवादी पार्टी के नेताओं के केस लड़े हैं। आजम खान को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से जिन-जिन मामलों में जमानत मिली, उनमें इमरान उल्लाह का रोल अहम रहा है। क्यों अखिलेश यादव, आजम के घर जा रहे
वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा बताते हैं- आजम खान समय-समय पर समाजवादी पार्टी से अपनी नाराजगी का इजहार करते रहते थे। ऐसा नहीं है कि मुस्लिम वर्ग में भी उनकी स्वीकार्यता पैन इंडिया या पूरे यूपी में रही हो। कई मुस्लिम नेता ही उनकी भाषा शैली और उनके तेवर के कारण उनके विरोध में रहते थे। लेकिन मुलायम सिंह के करीबी होने की वजह से खुली मुखालफत कोई नहीं करता था। देश में मुस्लिमों की आबादी 16.51 फीसदी है। यूपी में करीब 20 फीसदी मुसलमान यानी 3.84 करोड़ हैं। देश के किसी राज्य में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी के अनुपात में यूपी चौथे नंबर पर है। यूपी की 147 विधानसभा सीटों पर ठीक-ठाक आबादी है। इनमें से पश्चिम में आधी सीटें हैं। अगर आजम की राह सपा से अलग होती है, तो सपा को मुस्लिम वोटों का बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। यही वजह है कि अखिलेश यादव, आजम खान को लेकर कोई रिस्क नहीं ले चाहते। वह खुद आजम खान से मिलकर सब कुछ सही करना चाहते हैं। अब जानिए कब-कब सपा से नाराज हुए आजम वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा कहते हैं- जब-जब उनकी मर्जी के मुताबिक काम नहीं हुआ, वे सपा से नाराज हो गए। मसलन, रामपुर से जया प्रदा को टिकट दे दिया गया तब वे नाराज हो गए। कल्याण सिंह से मुलायम सिंह ने हाथ मिला लिया तब नाराज हो गए। मुलायम सिंह ने अखिलेश को सीएम बनाने का नाम सुझाया तब नाराज हुए। आजम चाहते थे कि सपा के सांसद और विधायक जौहर यूनिवर्सिटी में अपनी निधि का एक हिस्सा दें। लेकिन, लोगों ने नहीं दिया तब भी वे नाराज हो गए। उनके विभाग में बिना उनकी मर्जी के सलाहकार की नियुक्ति कर दी गई, तब भी वे नाराज हो गए थे। 2009 का लोकसभा चुनाव: सपा ने आजम खान की मंशा के खिलाफ जाते हुए कल्याण सिंह से दोस्ती कर ली। इस पर आजम बेहद खफा हो गए और सपा से दूरी बना ली। आजम की नाराजगी तब और बढ़ गई, जब सपा ने रामपुर से अमर सिंह की सिफारिश पर जया प्रदा को टिकट दे दिया। आजम खान खुले तौर पर जया प्रदा का विरोध करने लगे। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया। फिरोजाबाद उपचुनाव में सपा की हार हुई, जिसका ठीकरा मुलायम सिंह ने कल्याण सिंह पर फोड़ा। इसके बाद कल्याण सपा से अलग हो गए। दिसंबर- 2010 में आजम खान सपा में फिर से लौट आए। 2024 में रामपुर का उपचुनाव: 2024 के लोकसभा चुनाव में रामपुर से सपा का प्रत्याशी कौन होगा, ये नॉमिनेशन के आखिरी दिन तय हो सका था। हुआ ये कि आजम रामपुर और मुरादाबाद से अपनी मर्जी का प्रत्याशी लड़ाना चाह रहे थे। अखिलेश यादव ने जेल में आजम से मुलाकात भी की थी। आजम ने अखिलेश के सामने एक अजीबोगरीब प्रस्ताव रख दिया। कहा कि रामपुर से अखिलेश यादव चुनाव लड़ जाएं। अखिलेश यादव इस बात पर राजी नहीं हुए। उन्होंने यहां से आखिरी दिन पार्लियामेंट की मस्जिद के इमाम मोहिबुल्ला नदवी को टिकट दे दिया। आजम ने उनका खुलेतौर पर विरोध किया और जेल से पत्र भी लिखा। लेकिन, इसका कोई खास फर्क नहीं पड़ा। नदवी लगभग एक लाख वोटों से जीत हासिल करने में कामयाब रहे। हालांकि आजम खान की करीबी रहीं रुचिवीरा को अखिलेश यादव ने एसटी हसन का टिकट काटकर मुरादाबाद से टिकट दे दिया। वह भी जीत हासिल करने में कामयाब रहीं। ———————————– यह खबर भी पढ़ें योगी बोले- बिना मांगे जहन्नुम का टिकट करा देंगे, लातों के भूत बातों से नहीं मानते, दुस्साहस करोगे तो बरेली जैसा पिटोगे बरेली में जुमे पर ‘आई लव मोहम्मद’ को लेकर हुए बवाल पर सीएम योगी ने कहा- अराजकता कतई स्वीकार नहीं है। बिना मांगे जहन्नुम का टिकट कटवा देंगे। लातों के भूत बातों से नहीं मानते। इनको लगता है कि सरकार अब भी झुककर काम करेगी, लेकिन अब दुस्साहस करोगे तो वैसे ही पिटोगे, जैसे बरेली में पीटे गए। पूरी खबर पढ़ें…