‘लखनऊ एयरपोर्ट पर कदम पड़ा तो आई जान में जान’:जेद्दा से लौटा परिवार, बोला- धमाकों के बीच 10 दिन कमरे में कैद रहे

मध्य-पूर्व में इजराइल और ईरान के जंग का असर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों पर भी दिखने लगा है। हालात बिगड़ने की आशंका पर उत्तर प्रदेश के कई लोग अपने परिवार के साथ भारत लौट आए हैं। लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे यात्रियों ने बताया कि पिछले कई दिनों से वे डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे थे। सुरक्षित अपने देश लौटने की दुआ कर रहे थे। दैनिक भास्कर ने लखनऊ एयरपोर्ट पर आए एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट से आए यात्रियों से बात की। इन्हीं में बाराबंकी के रहने वाले मोहम्मद जाहिद भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि वहां हालात कैसे बदल गए? किस तरह डर का माहौल बन गया? भारत में बैठे उनके परिवार वाले किन चिंताओं से गुजर रहे थे? दो देशों के बीच बढ़ते तनाव का उन पर क्या असर पड़ा? पढ़िए उनकी जुबानी…। दो महीने पहले काम की तलाश में गए थे जेद्दा बाराबंकी के रहने वाले मोहम्मद जाहिद बताते हैं कि- वो दो महीने पहले काम की तलाश में जेद्दा गए थे, जहां वह टैक्सी चलाते थे। रोजगार के लिए वह अपने साथ अपनी पत्नी और दो बच्चों को भी लेकर गए थे। लेकिन इजराइल-ईरान विवाद के बाद अचानक हालात बदल गए और वहां डर का माहौल बनने लगा। जाहिद आगे कहते हैं कि- “मैं तो अपने पूरे परिवार के साथ वहां गया था। मेरी पत्नी और दो बच्चे भी मेरे साथ थे। ऐसे में दिल में हमेशा डर बना रहता था कि अगर हालात बिगड़ गए तो क्या होगा। बस यही दुआ करते थे कि सब कुछ जल्दी खत्म हो जाए और हम सुरक्षित रहें।” “घर वाले पूछते थे, फ्लाइट बंद है तो वापस कैसे आओगे” जाहिद बताते हैं कि जब वह बाराबंकी में अपने घर वालों से फोन पर बात करते थे तो परिवार के लोग काफी चिंतित रहते थे। उन्होंने कहा, “घर वाले बार-बार यही पूछते थे कि जब फ्लाइट ही बंद हैं तो वापस कैसे आओगे। हमने टिकट भी कराई थी, लेकिन उसी समय फ्लाइट रद्द हो गई। उस वक्त मैं खुद भी सोच रहा था कि आखिर अपने वतन वापस कैसे लौटूंगा।” उन्होंने कहा, “जैसे ही फ्लाइट शुरू हुई, हम तुरंत अपने परिवार के साथ वापस आ गए। अब जब तक वहां हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते, तब तक वापस जाने का कोई इरादा नहीं है। जंग जैसे माहौल में विदेश में रहना बहुत डरावना होता है।” डेढ़ साल के बच्चे के साथ भारत लौटी नाजिया जेद्दा से ही लखनऊ लौटीं नाजिया भी अपने दो छोटे बच्चों के साथ भारत पहुंची हैं। उनकी गोद में डेढ़ साल का छोटा बच्चा था, जबकि बड़ी बेटी करीब पांच साल की है। नाजिया बताती हैं कि पिछले दस दिनों से उन्होंने लगातार डर के माहौल में दिन गुजारे। उनके पति काम के लिए बाहर जाते थे, इसलिए हर समय उनके मन में चिंता बनी रहती थी। फ्लाइट बंद होने के कारण लौटना नहीं था आसान नाजिया बताती हैं कि भारत में उनके परिवार वाले लगातार फोन करके उन्हें वापस आने के लिए कहते थे, लेकिन उस समय उड़ानें बंद होने के कारण लौटना आसान नहीं था। घर वाले फोन पर कहते थे कि हालात ठीक नहीं हैं, वापस आ जाओ। लेकिन फ्लाइट ही नहीं चल रही थी। हम बस इंतजार कर रहे थे कि कब उड़ान शुरू हो और हम अपने देश लौट सकें। सुरक्षित लौटने पर जताई राहत लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचने के बाद दोनों परिवारों ने राहत की सांस ली। उनका कहना है कि फिलहाल स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं हुई थी, लेकिन अगर हालात बिगड़ते तो उन्हें उम्मीद थी कि भारत सरकार और भारतीय दूतावास उनकी मदद जरूर करते। जाहिद ने बताया कि भारतीय दूतावास की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे थे, जिससे वहां रह रहे लोगों को स्थिति की जानकारी मिलती रहती थी। माहौल काफी तनावपूर्ण और घबराहट भरा जेद्दा से लौटे एक अन्य यात्री ने बताया कि वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण और घबराहट भरा था। लोगों के बीच पैनिक का माहौल बन गया था और कई उड़ानें भी रद्द हो गई थीं, जिसके कारण लोगों को वापस भारत लौटना पड़ा। उन्होंने कहा, “हालात को लेकर हम लोग काफी परेशान हो गए थे। सुरक्षित भारत लौटने के बाद राहत मिली है। इसके लिए हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।” ………… ये खबर भी पढ़ें… ईरान-अमेरिका युद्ध से यूपी के 25 लाख लोग फंसे:होली में भी घर नहीं आ पाएंगे, जानिए क्यों खाड़ी देश जाते हैं युवा गोंडा के 27 साल के दिनेश वर्मा इन दिनों दुबई में फंसे हैं। 1 मार्च को उनका मुंबई आने का टिकट था, लेकिन क्षेत्र में जारी बमबारी के कारण एयरपोर्ट बंद हो गया। वे भारत नहीं लौट पाए। दुबई में कुक का काम करने वाले दिनेश को वापस उनके कमरे पर भेज दिया गया। वे होली और अपने भांजे विनोद वर्मा की 11 मार्च को बस्ती में होने वाली शादी में शामिल नहीं हो सकेंगे। पढ़िए पूरी खबर…