पीलीभीत की एक महिला को बरेली के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। परिजनों से महिला को घर ले जाने के लिए कहा। घर पर भी महिला के अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगी। पति महिला को एंबुलेंस से लेकर घर लौटने लगा। बरेली-हरिद्वार नेशनल हाईवे-74 पर अचानक एंबुलेंस के रास्ते में एक गड्ढा आ गया। इशकी वजह से एंबुलेंस में जोरदार धक्का लगा। इसकी वजह महिला के शरीर में हलचल हुई और उसकी सांसें चलने लगीं। यह देखकर घरवाले घबरा गए और उसे तुरंत दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया। 13 दिन इलाज कराने के बाद अब महिला स्वस्थ होकर घर लौट आई है। महिला 22 फरवरी को घरेलू काम करते हुए अचानक बेहोश हो गई थी। तब उसे बरेली के अस्पताल में ले जाया गया था। वहां दो दिनों तक उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों ने शरीर में कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। मामला शहर कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
मामले को विस्तार से जानते हैं… कुलदीप शुक्ला (55) शहर कोतवाली में अपने परिवार के साथ रहते हैं। 22 फरवरी की शाम उनकी पत्नी विनीता शुक्ला (50) घर के काम के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। विनीता पीलीभीत कोर्ट में वरिष्ठ सहायक हैं। उन्हें तुरंत बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। 2 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद विनीता के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। उनकी आंखों की पुतलियां फैल गईं। डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन डेड’ जैसी स्थिति बताते हुए घर ले जाने की सलाह दी। पति कुलदीप ने भी भारी मन से विनीता को एंबुलेंस में रखा और पीलीभीत रवाना हो गए। कुलदीप कुमार शुक्ला बताते हैं- 24 फरवरी को हम घर लौट रहे थे। तभी बरेली हरिद्वार नेशनल हाईवे पर अचानक एंबुलेंस में गड्ढे की वजह से झटका लगा। झटका लगते ही विनीता के शरीर में हरकत होने लगी और उनकी सांसें चलने लगीं। पति बोले- परिवारवालों को अंतिम संस्कार की तैयारी के लिए कह दिया था
कुलदीप ने बताया- मैंने परिवारवालों से अंतिम संस्कार की तैयारी करने के लिए कह दिया था। विनीता की सांसें नहीं चल रही थीं। केवल दिल की धड़कन चल रही थी, वो भी समय के साथ धीमी होती जा रही थी। पत्नी की सांसें लौट आना मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। सांसें वापस आते ही मैंने परिवारवालों को अंतिम संस्कार की तैयारियों को तुरंत रोकने के लिए कहा। ग्लासको कामो स्केल 3 पर पहुंच गया था
इसके बाद कुलदीप पत्नी विनीता को तुरंत पीलीभीत के न्यूरोसिटी अस्पताल ले गए। न्यूरोसिटी अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर राकेश सिंह ने सबसे पहले बरेली के अस्पताल से विनीता की मेडिकल हिस्ट्री पता की। फिर उनका इलाज शुरू किया। डॉक्टर राकेश सिंह ने बताया- विनीता के ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्स नहीं मिले। जबकि, उनका ग्लासगो कोमा स्केल सामान्य यानी 15 अंकों से गिरकर 3 अंक पर आ गया था। यह पूरी तरह से ब्रेन के सक्रिय नहीं होने का संकेत देता है। आंखों की जांच में पुतलियों का फैलाव (मायड्रायसिस) पाया गया, जो दिमाग के निष्क्रिय होने का संकेत था। जांच के दौरान विनीता के पैरों पर दांतों के निशान भी मिले। इससे डॉक्टर को स्नेक प्वाइजनिंग (न्यूरोटॉक्सिन) का संदेह हुआ। इसी आधार पर उन्हें एंटी-वेनम और सपोर्टिव इलाज दिया गया। 13 दिन बाद घर लौटीं विनीता
इलाज के बाद महज 24 घंटे के भीतर विनीता के शरीर ने प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। बिना वेंटिलेटर 13 दिनों के इलाज के बाद विनीता अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह अपने पैरों पर चलकर घर लौट आई हैं। पति ने कहा- अब वह होश में हैं और हमसे बात भी कर रही हैं। स्वस्थ होने के बाद विनीता ने भावुक होकर कहा- मुझे याद ही नहीं कि मेरे साथ क्या हुआ। उनके पति कुलदीप ने इसे भगवान का आशीर्वाद और डॉक्टरों की मेहनत का परिणाम बताया है। ————————— यह खबर भी पढ़ें… शियाओं का नंगे पांव मातम, ट्रम्प-सऊदी प्रिंस की तस्वीरें रौंदी; लखनऊ में 21वें रमजान में जुलूस निकाला
लखनऊ में आज 21वें रमजान का जुलूस निकाला गया। नम आंखों के साथ शिया समुदाय के लोग हजरत अली के ताबूत की जियारत किया। ईरान-इजराइल जंग के विरोध में जुलूस के रास्ते में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीरें सड़क पर चिपकाई गईं। पढ़ें पूरी खबर…
मामले को विस्तार से जानते हैं… कुलदीप शुक्ला (55) शहर कोतवाली में अपने परिवार के साथ रहते हैं। 22 फरवरी की शाम उनकी पत्नी विनीता शुक्ला (50) घर के काम के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। विनीता पीलीभीत कोर्ट में वरिष्ठ सहायक हैं। उन्हें तुरंत बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। 2 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद विनीता के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। उनकी आंखों की पुतलियां फैल गईं। डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन डेड’ जैसी स्थिति बताते हुए घर ले जाने की सलाह दी। पति कुलदीप ने भी भारी मन से विनीता को एंबुलेंस में रखा और पीलीभीत रवाना हो गए। कुलदीप कुमार शुक्ला बताते हैं- 24 फरवरी को हम घर लौट रहे थे। तभी बरेली हरिद्वार नेशनल हाईवे पर अचानक एंबुलेंस में गड्ढे की वजह से झटका लगा। झटका लगते ही विनीता के शरीर में हरकत होने लगी और उनकी सांसें चलने लगीं। पति बोले- परिवारवालों को अंतिम संस्कार की तैयारी के लिए कह दिया था
कुलदीप ने बताया- मैंने परिवारवालों से अंतिम संस्कार की तैयारी करने के लिए कह दिया था। विनीता की सांसें नहीं चल रही थीं। केवल दिल की धड़कन चल रही थी, वो भी समय के साथ धीमी होती जा रही थी। पत्नी की सांसें लौट आना मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। सांसें वापस आते ही मैंने परिवारवालों को अंतिम संस्कार की तैयारियों को तुरंत रोकने के लिए कहा। ग्लासको कामो स्केल 3 पर पहुंच गया था
इसके बाद कुलदीप पत्नी विनीता को तुरंत पीलीभीत के न्यूरोसिटी अस्पताल ले गए। न्यूरोसिटी अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर राकेश सिंह ने सबसे पहले बरेली के अस्पताल से विनीता की मेडिकल हिस्ट्री पता की। फिर उनका इलाज शुरू किया। डॉक्टर राकेश सिंह ने बताया- विनीता के ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्स नहीं मिले। जबकि, उनका ग्लासगो कोमा स्केल सामान्य यानी 15 अंकों से गिरकर 3 अंक पर आ गया था। यह पूरी तरह से ब्रेन के सक्रिय नहीं होने का संकेत देता है। आंखों की जांच में पुतलियों का फैलाव (मायड्रायसिस) पाया गया, जो दिमाग के निष्क्रिय होने का संकेत था। जांच के दौरान विनीता के पैरों पर दांतों के निशान भी मिले। इससे डॉक्टर को स्नेक प्वाइजनिंग (न्यूरोटॉक्सिन) का संदेह हुआ। इसी आधार पर उन्हें एंटी-वेनम और सपोर्टिव इलाज दिया गया। 13 दिन बाद घर लौटीं विनीता
इलाज के बाद महज 24 घंटे के भीतर विनीता के शरीर ने प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। बिना वेंटिलेटर 13 दिनों के इलाज के बाद विनीता अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह अपने पैरों पर चलकर घर लौट आई हैं। पति ने कहा- अब वह होश में हैं और हमसे बात भी कर रही हैं। स्वस्थ होने के बाद विनीता ने भावुक होकर कहा- मुझे याद ही नहीं कि मेरे साथ क्या हुआ। उनके पति कुलदीप ने इसे भगवान का आशीर्वाद और डॉक्टरों की मेहनत का परिणाम बताया है। ————————— यह खबर भी पढ़ें… शियाओं का नंगे पांव मातम, ट्रम्प-सऊदी प्रिंस की तस्वीरें रौंदी; लखनऊ में 21वें रमजान में जुलूस निकाला
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