शंकराचार्य की ‘चतुरंगिणी’ सेना कैसी होगी?:योद्धाओं की पीली ड्रेस; हाथ में तलवार-भाले; सेनापति खुद अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी सेना तैयार कर रहे हैं। इसके सेनापति खुद शंकराचार्य होंगे। टास्क वो खुद देंगे, उनके आदेश पर ये सेना पूरे देश में मूवमेंट करेगी। अभी मौजूदा वक्त में 3 तरह के टास्क होंगे। पहला- गोरक्षा। दूसरा- धर्म की रक्षा। तीसरा- मंदिर रक्षा। इस सेना को बनाने की शुरुआत हिंदू नववर्ष यानी 19 मार्च से होगी। इस सेना में कोई नागा साधु नहीं, ब्लकि आम लोग होंगे। सेना में उन्होंने शामिल किया जाएगा, जो सनातन धर्म की रक्षा के लिए काम करना चाहते हैं। इन्हें तलवार, भाला चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि वक्त पड़ने पर वो मोर्चा ले सकें। इस सेना को शंकराचार्य ने ‘चतुरंगिणी सेना’ नाम दिया है। ये सेना कैसे मूवमेंट करेगी? कहां रहेगी? इसका संचालन कैसे होगा? ऐसे तमाम सवालों के जवाब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से पूछे। पढ़िए रिपोर्ट… पहले जानिए शंकराचार्य को सेना बनाने की जरूरत क्यों पड़ी… चतुरंगिणी सेना कैसी होगी, ये दैनिक भास्कर ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से ही पूछा… सवाल. ये सेना क्या शंकराचार्य की सुरक्षा के लिए है, या सनातन की रक्षा के लिए?
शंकराचार्य. यह सेना व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए है। जब धर्म सुरक्षित होगा, तो धर्माचार्य भी सुरक्षित होंगे। इसका मुख्य लक्ष्य मंदिर, गाय, और शास्त्र की रक्षा करना है। सवाल. ये सेना रक्षा कैसे करेगी? टास्क कौन तय करेगा?
शंकराचार्य. इस सेना के सर्वोच्च सेनापति खुद शंकराचार्य होंगे। इसके कामों को ‘परमधर्म संसद 1008’ के विद्वान तय करेंगे। शास्त्र क्या कहते हैं, यही उनका आधार होगा। ये सेना विचारों से भी सनातन की रक्षा करेगी, जरूरत पड़ने पर गो तस्करी, मंदिरों के अतिक्रमण और धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए पहुंचेगी। सवाल. क्या ये सेना यूपी में ही काम करेगी?
शंकराचार्य. नहीं, इस सेना का कोई राज्य या जिला नहीं होगा, बल्कि पूरे देश में ये सेना काम करेगी। जहां सनातन धर्म पर संकट होगा, ये सेना एक्टिव हो जाएगी। हमारी योजना है कि इसको ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर लागू कर देंगे। सवाल. ये सेना कैसी दिखेगी?
शंकराचार्य. सेना में सैनिक होंगे, वैसे ही दिखेंगे भी, लेकिन इनमें ‘साधुत्व’ का पुट होगा। इनकी वर्दी परम्परागत और पीले रंग की हो सकती है, जो एक अनुशासित सैनिक और एक धर्मयोद्धा का मिश्रण होगी। सवाल. क्या सेना में साधु संत या आम लोग भी शामिल हो सकते हैं?
शंकराचार्य. इसमें साधु-संत और आम नागरिक (गृहस्थ) दोनों शामिल हो सकते हैं। विशेषकर उन युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो धर्म के प्रति समर्पित हैं और शारीरिक रूप से सक्षम हैं।
अब सनातन की सेना ‘नागा साधुओं’ को जानिए
सनातन की सेना ‘नागा साधुओं’ को कहा जाता है। 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने नागा साधुओं का गठन किया था। उन्होंने ‘अखाड़ा’ परंपरा शुरू की, जो शस्त्र और शास्त्र (ज्ञान) दोनों में निपुण थे। उन्हें विदेशी आक्रमणकारियों से हिंदू धर्म, संस्कृति और मंदिरों की रक्षा के लिए एक ‘योद्धा-संत’ के रूप में संगठित किया था, ये त्रिशूल, तलवार चलाने में निपुण थे। नागा साधुओं ने धर्म की रक्षा कब-कब की, इसके कुछ संदर्भ मिलते हैं। 1664 में काशी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा के लिए नागा साधु आगे आए थे। मध्यकाल में नागा साधुओं ने मुगलों और अफगान लुटेरों से मंदिरों की रक्षा की थी। ये संन्यासी होते हुए भी संकट के समय धर्म के लिए प्राण देने को तैयार रहते थे। नागा साधु अखाड़ों (जैसे जूना, निरंजनी) से जुड़े होते हैं, जिन्हें हिंदू धर्म की ‘सैन्य विंग’ के रूप में देखा जाता है। मौजूदा वक्त में नागा साधु महाकुंभ, अर्द्धकुंभ के आयोजन के दौरान नजर आते हैं। स्नान, पूजन होने के बाद वो फिर से अपने अखाड़ों और हिमालय पर्वतों पर लौट जाते हैं। चतुरंगिणी का मतलब क्या है?
चतुरंगिणी सेना का जिक्र प्राचीन भारत में है। महाभारत में भगवान कृष्ण की नारायणी सेना भी एक चतुरंगिणी सेना थी। यह चार मुख्य अंगों- हस्ती (हाथी), अश्व (घोड़े), रथ, और पदाति (पैदल सैनिक) से मिलकर बनती थी। शतरंज खेल का आधार भी इसी चतुरंगिणी सेना को माना जाता है। क्योंकि इस खेल में भी हाथी, घोड़े और पैदल सैनिक होते हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जानिए
………. ये पढ़ें- शंकराचार्य की सिक्योरिटी में उतरी कल्कि सेना, रिटायर्ड विंग कमांडर ने बनाई; एक ही उद्देश्य- सनातन की रक्षा करना; VIDEO देखिए… लखनऊ में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की सुरक्षा कल्कि सेना ने संभाली। यह संगठन खुद को सनातन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित बताता है और संतों के साथ ही धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का दावा करता है। VIDEO में सेना का गठन कैसे हुआ, किसने किया और इसके उद्देश्य क्या-क्या हैं?