हमीरपुर पुल हादसा- तूफान नहीं, लापरवाही से स्लैब ढहा:डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर 3 दिन साइट नहीं गए, ठेकेदार ने मनमानी की

हमीरपुर में बेतवा नदी पर बन रहे पुल ने 6 मजदूरों की जान ले ली। हादसे के बाद राज्य सेतु निगम ने दावा किया कि आंधी-तूफान में स्लैब ढह गया। लेकिन हकीकत में निर्माण कंपनी और सेतु निगम के अफसरों की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। सेतु निगम के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर बीते तीन दिन से साइट पर नहीं गए। उन्होंने पुल बनाने वाली कंपनी के ठेकेदार के भरोसे काम छोड़ दिया। पैसे बचाने के लिए ठेकेदार ने कमजोर सपोर्ट लगा दिए, जो तूफान आने पर ढह गया। सीएम की सख्ती के बाद सेतु निगम के एमडी धर्मवीर सिंह ने सहायक अभियंता (AE) को सस्पेंड कर दिया है। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। पहले जानिए हादसे के पीछे की लापरवाहियां… लापरवाही 1. केबल डाली, शुक्रवार को कसना था; आंधी में ढह गया हादसे की तकनीकी वजह बेहद चौंकाने वाली है। पुल के भारी-भरकम ‘सेगमेंट स्लैब’ को पिलर पर रोकने के लिए जो सपोर्ट सिस्टम लगाया गया था, वह बेहद कमजोर था। द शेल्टर के निदेशक विजय प्रताप सिंह दावा करते हैं कि सेगमेंट की कास्टिंग नीचे करके उसे ऊपर चढ़ाया गया था। गुरुवार को उसमें केबल तो डाल दी गई थी, लेकिन उसे खींचा (टाइट) नहीं गया था। हमारा प्लान शुक्रवार को केबल खींचकर उसे सेट करने का था। इसी बीच रात में तूफान आ गया। सवाल. अगर केबल खींचकर ब्लॉक को लॉक नहीं किया गया था, तो उसे आंधी-तूफान के भरोसे अस्थाई और कमजोर सपोर्ट पर क्यों छोड़ दिया गया? यूपी के राहत विभाग ने भी अलर्ट जारी किया था कि 28 से 31 मई तक आंधी-तूफान आएगा। फिलहाल, तकनीकी नियमों के मुताबिक, ऐसे भारी स्ट्रक्चर को बिना लॉक किए छोड़ना ही सबसे बड़ी लापरवाही है। लापरवाही 2. ठेकेदार के भरोसे पूरा काम, 3 दिन से प्रबंधक नहीं गए सेतु निगम के निलंबित सहायक अभियंता गजेंद्र चौधरी ने सेगमेंट स्लैब लगाने की पूरी प्रक्रिया को अपनी निगरानी में कराने के बजाय ठेकेदार के अनुभवहीन इंजीनियर्स और मजदूरों के भरोसे छोड़ दिया। वहीं, उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार पिछले दो-तीन दिनों से मौके पर ही नहीं गए थे। उन्होंने टेंडर की शर्तों और सामग्री की गुणवत्ता की जांच करना भी जरूरी नहीं समझा। लापरवाही 3. मजदूरों के लिए नहीं था शेल्टर, आंधी में भागते रहे श्रमिक कानपुर के नौबस्ता (बाबा नगर) स्थित ‘द शेल्टर’ कंपनी बुनियादी नियमों को ताक पर रखकर काम करा रही थी। साइट पर काम करने वाले श्रमिकों के रहने के लिए कोई शेड या उचित प्रबंध नहीं था। अगर कंपनी ने वहां उनके ठहरने की सही व्यवस्था की होती, तो आंधी-तूफान आने पर मजदूरों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर नहीं भागना पड़ता। जो खुद शक के घेरे में, वही करेगा जांच पुल गिरने के बाद सेतु निगम ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय विभागीय जांच कमेटी बना दी है। संयुक्त प्रबंध निदेशक, मुख्य परियोजना प्रबंधक (डिजाइन) और कानपुर के मुख्य परियोजना प्रबंधक (CPM) वीके सेन को कमेटी में शामिल किया गया है। यह पूरा प्रोजेक्ट कानपुर के सीपीएम वीके सेन के ही सुपरविजन में चल रहा था। ऐसे में दोषी अफसर को ही जांच कमेटी में रखने पर विभाग के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, निगम के एमडी धर्मवीर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि वीके सेन को केवल कमेटी के सामने तथ्य और तकनीकी रिकॉर्ड पेश करने के लिए रखा गया है, वे फैसला नहीं लेंगे। ठेकेदार का राजनीतिक कनेक्शन कंपनी द शेल्टर के निदेशक विजय प्रताप सिंह भाजपा के कानपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री पवन प्रताप सिंह के भाई हैं। उनका भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह चौहान, विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह और कानपुर के विधायकों से भी संबंध हैं। सरकार का एक्शन, मुख्यमंत्री ने कहा- जांच करिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे के तुरंत बाद सख्ती दिखाते हुए सेतु निगम के एमडी धर्मवीर सिंह को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए। मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए मुआवजा देने और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा- मामले की जांच की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। घटना से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… यूपी में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 की मौत:अफसर बोले- आंधी-बारिश के चलते हादसा, 3 मजदूरों को बचाया गया यूपी के हमीरपुर में बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का स्लैब शुक्रवार देर रात 2 बजे गिर गया। हादसे में 6 मजदूरों की मौत हो गई। स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) ने मलबे में फंसे 3 मजदूरों को निकाला। साढ़े 7 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। उत्तर प्रदेश ब्रिज कॉरपोरेशन के एमडी धर्मवीर सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया कि आंधी-बारिश के कारण स्लैब गिरा और नीचे सो रहे मजदूर दब गए। हादसे की जांच कराई जाएगी। पढ़िए पूरी खबर…