लखनऊ के रहीमाबाद थाने में तैनात दरोगा गुड्डू प्रसाद पर डेढ़ लाख रुपए घूस मांगने के आरोप लगे हैं। इसका एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह एक मामले की विवेचना में आरोपी को बचाने के एवज में रकम मांग रहे हैं। कह रहे हैं कि इतना पैसा मिलेगा तो मैं भी लिख दिया करूंगा कि आरोपी घर में नहीं मिला। खोजने की कोशिश नहीं करूंगा। वीडियो सामने आने के बाद 9 जुलाई रात करीब साढ़े आठ बजे दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया। वह बैंक से धोखाधड़ी के एक मामले में विवेचना कर रहे थे। रिकवरी के लिए आरोपी के घरवालों को बचाने के एवज में थाने के बाहर बिचौलिये के साथ घूस फाइनल की। इसका वीडियो बिचौलिये ने रिकॉर्ड कर लिया। सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला समझ लीजिए- करेंद गांव के संतोष कुमार ने बैंक ऑफ इंडिया की गहदों शाखा में 27 फरवरी 2023 को गोल्ड लोन के लिए अप्लाई किया था। उसकी टाइमलाइन उसी साल अगस्त में पूरी हो गई। उसके बाद बैंक की तरफ से लोन चुकाने का नोटिस आया। लेकिन, कोई जवाब नहीं दिया गया। दोबारा दिसंबर में नोटिस आया। इस बार भी कोई जवाब नहीं मिला। इस दौरान संतोष के भतीजे शांतनु ने माल थाने में संतोष की गुमशुदगी लिखवा दी। 3 साल बाद 2026 में 14 अप्रैल को बैंक मैनेजर ने संतोष के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा करा दिया। स्पेशल सीजेएम कस्टम में दर्ज इस मामले की दरोगा गुड्डू प्रसाद विवेचना कर रहे हैं। उसी पैसे की वसूली के लिए वह संतोष कुमार के घर जाते हैं। रिकवरी के लिए पूछताछ चल रही है। अब जानिए नया मोड़ कैसे आया- पुलिस बोली- जांच के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई रहीमाबाद इंस्पेक्टर अरुण त्रिगुणायक का कहना है कि वायरल ऑडियो-वीडियो की सत्यता और रिश्वत मांगने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाएगी। दरोगा मुकदमे की विवेचना कर रहा था। 7 लाख 14 हजार रुपए की होनी है वसूली, FIR दर्ज बैंक ऑफ इंडिया की गहदों शाखा के मैनेजर की तरफ से दर्ज कराए गए मुकदमे में लिखा है कि संतोष कुमार ने 7 लाख 14 हजार रुपए को गोल्ड लोन लिया था। सोना जमा करते समय सत्यम सोनी की रसीद के मुताबिक 185 ग्राम सोना 23 कैरेट का था। बाद में जब संतोष नोटिस के बावजूद लोन का पैसा नहीं जमा कर रहा था तो उस सोने की जांच कराई गई। सोना 19 ग्राम ही निकला और कुल 18 कैरेट का था। अब पढ़िए वीडियो में क्या है- वीडियो में पीड़ित विष्णु कुमार थाने के अंदर बैठे दिख रहे हैं। उनके सामने दरोगा गुड्डू प्रसाद हैं, जो वीडियो में शुरुआत में दिख नहीं रहे हैं। दरोगा- आपका 10 की जगह 20 लग जाएगा। सामने वाले को 5 ही मिलेगा। (इस पर विष्णु कुमार हां में सिर हिलाते हैं।) बिचौलिया- हां, समझ गए? इधर आ जाओ तो बताते हैं। (यह कहते हुए बिचौलिया बाहर निकलता है।) बिचौलिया- आराम से आओ छांव में, बात करो। देखो द्विवेदीजी, ये गुड्डू भाई (दरोगा गुड्डू) अब से नहीं, इनसे बहुत पुराने ताल्लुकात हैं। दरोगा- द्विवेदी जी… बिचौलिया (बीच में टोकते हुए)- एक मिनट। जो ये मामला है संतोष कुमार का? संतोष कुमार आपके कौन हैं? दरोगा- संतोष इनके बड़े भाई हैं। ये छोटे भाई हैं। शुभम इनके भतीजे हैं। इनके परिवार के लोग आलमनगर में रहते हैं। मैं चाहता तो उनको भी टांग लाता। बिचौलिया- ये तो आपकी इंसानियत है। दरोगा- ये इंसानियत नहीं…। इस लेवल तक मैं नहीं गिर सकता। बिचौलिया- हां, देख लो। इतने ऊंचे स्वभाव के हैं। विष्णु कुमार- हमको टेंशन है। दरोगा- आपकी टेंशन…। मैं आपको क्या बोला कि भैया आप नहीं आ पाएंगे तो मैं आपके घर आ जाऊंगा। ये मैं बोला था ना? (इस समय वीडियो में दरोगा का चेहरा दिखता है। दरोगा सिविल ड्रेस में है।) बिचौलिया- हां। दरोगा- …लेकिन उस बच्चे का बयान इसलिए जरूरी है कि उसी ने गुमशुदगी लिखवाई है। उसी का बयान लूंगा। उसी को मैं भी कॉन्टिन्यू कर दूंगा कि भैया आज तक मिले नहीं। मैं भी कोशिश नहीं करूंगा खोजने की। मैं जानता हूं तब भी नहीं जाऊंगा। इतना मैं कर सकता हूं। बिचौलिया- बयान इनका करा दो। चार्ज क्या देना होगा इनको? दरोगा- वो आपसे बता दिया तारिक भाई। वही रहेगा। विष्णु कुमार- (दरोगा की तरफ देखते हैं) दरोगा- वन फिफ्टी विष्णु कुमार- हम नहीं समझ पाए… (यह कहते हुए बिचौलिये की तरफ देखते हैं) बिचौलिया- वन फिफ्टी बता रहे हैं। (विष्णु कुमार फिर से दरोगा की तरफ देखते हैं।) बिचौलिया- बता दीजिए कितना हुआ? दरोगा- डेढ़ लाख। विष्णु कुमार- कम नहीं हो पाएगा? दरोगा- अब इनसे (बिचौलिया) से बात कर लीजिए। बिचौलिया- (हंसता है) विष्णु कुमार- डेढ़ लाख ज्यादा है। एक लाख कर लीजिए। (दरोगा बिचौलिया के पास आकर उसके कान में पूछता है- एक लाख ज्यादा है? इसके बाद फुसफुसाने लगता है।) दरोगा- यहां हम दरोगा नहीं हैं। बिचौलिया- ये हमारे बड़े भाई हैं। दरोगा- ये हमारे छोटे भाई हैं। बिचौलिया- (विष्णु कुमार से) एक लाख रुपए कल न हो पाए तो परसो कर लेना। और हां, इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। (दरोगा से) बता दो, समझा दो इनसे कि राजनीति नहीं होनी चाहिए। (विष्णु कुमार से) लाकर बयान करा दीजिए। दरोगा- (विष्णु कुमार से) उसे दो दिन के अंदर लाकर उसका बयान करा दीजिए। बिचौलिया- जो बात यहां पर हो गई, वह यहीं पर खत्म। दरोगा- अब यह बात यहीं पर बंद। (इतना कहते हुए दरोगा थाने की तरफ जाने लगता है। उसके पीछे वीडियो रिकॉर्ड करते हुए बिचौलिया अपना फोन जेब से निकाल लेता है। फिर जाकर तीनों लोग थाने में बैठ जाते हैं।)
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