‘जमानत के लिए जज तक पहुंच बनाने की कोशिश की गई। ऐसे प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सीधा हमला है। इन्हें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ये न्यायपालिका के इतिहास का काला दिन है।’ ये टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज कृष्ण पहल ने गुरुवार को कोडीन कफ सिरप मामले में की। उन्होंने आरोपी भोला प्रसाद की जमानत अर्जी समेत 80 याचिकाओं को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया और खुद को सभी केस से अलग कर लिया। जज कृष्ण पहल ने सुनवाई शुरु करते ही कहा- फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद आरोपियों ने पीठासीन न्यायाधीश तक निजी तौर पर पहुंच बनाने का प्रयास किया। उन्होंने इसे न्यायिक मर्यादा पर आघात बताते हुए कहा, ऐसी प्रवृत्ति न्यायालय परिसर में किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। भोला प्रसाद, कोडीन कफ सिरप गैंग के सरगना शुभम जायसवाल का पिता है। शुभम फरार है। उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। अब अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। जज बोले- नजरअंदाज किया तो विश्वास डगमगाएगा दरअसल, कोडीन कफ सिरफ केस में करीब 80 आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। इनकी एक साथ सुनवाई के लिए कोर्ट ने गुरुवार तारीख 30 जुलाई और समय सुबह 10 बजे तय की थी। आरोपियों के वकीलों के साथ ही राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और एजीए प्रथम परितोष कुमार मालवीय भी मौजूद थे। सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने कहा- सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रखा जा सकता था, लेकिन बाद में आरोपियों द्वारा पीठासीन न्यायाधीश तक पहुंच बनाने और संपर्क के प्रयास किए गए। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे आचरण को नजरअंदाज किया गया तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता की जड़ों को कमजोर करेगा और आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास डगमगा जाएगा। जज बोले- न्यायपालिका की प्रतिष्ठा संदेह के घेरे में नहीं डाली जा सकती जज कृष्ण पहल ने कहा- यदि ऐसे हालात में फैसला उस पक्ष में आता, जिसकी दलीलों में दम दिखाई देता था तो निर्णय की कानूनी मजबूती के बावजूद यह संदेह पैदा हो सकता था कि फैसला न्यायिक विवेक के बजाय किसी बाहरी प्रभाव या अनुचित प्रयास का परिणाम है। सालों में कमाई गई न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ऐसे संदेह के घेरे में नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने कहा- न्याय केवल किया जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट और निर्विवाद रूप से दिखाई भी देना चाहिए कि न्याय निष्पक्ष तरीके से किया गया है। किसी लंबित मामले में न्यायाधीश से निजी तौर पर संपर्क बनाने का प्रयास अधिवक्ता आचरण की नैतिकता और स्वतंत्र न्यायपालिका के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने इसे न्यायिक मर्यादा पर आघात बताते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्ति कोर्ट परिसर में किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने वकीलों और आरोपियों को चेतावनी देते हुए कहा- न्यायिक स्वतंत्रता कोई विशेष अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को मिला संवैधानिक अधिकार है। इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश की सख्त निंदा की जानी चाहिए। केस रद्द करने से हाईकोर्ट पहले ही कर चुका है इंकार कोडीन कफ सिरप मामले में सबसे पहले आरोपियों ने केस रद्द किए जाने के लिए याचिकाएं दाखिल की थीं, मगर इन याचिकाओं को हाईकोर्ट की तीन अलग-अलग खंडपीठों, लखनऊ बेंच की एक खंडपीठ ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि मामले में विवेचना किए जाने का पर्याप्त आधार है। इसके बाद आरोपियों ने अग्रिम जमानत पाने के लिए अर्जियां दाखिल की थीं। इन अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी हाईकोर्ट से किसी भी वादी को राहत नहीं मिली और गिरफ्तारियां जारी रहीं। इसके बाद नियमित जमानत के लिए याचिकाएं दाखिल की गईं। इनमें भी चार आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट की अलग-अलग पीठों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। 15 नवंबर 2025 को दर्ज हुआ था मुकदमा कोतवाली थाने में 15 नवंबर को दर्ज मुकदमे में शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला जायसवाल समेत करीब 40 लोगों को नामजद किया गया था। विवेचना के दौरान जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई लोगों के नाम सामने आये। जिनमे से कई को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब जानिए शुभम पर क्या आरोप हैं अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला जायसवाल सहित काशी के 28 दवा कारोबारियों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप है कि 100 करोड़ की 89 लाख शीशी प्रतिबंधित कफ सिरप खरीदी और बेची गई। काशी के ही 93 मेडिकल स्टोर के नाम पर 84 लाख शीशी प्रतिबंधित कप सिरप खरीदी-बेची गई है। जिस मेडिकल स्टोर के नाम पर कारोबार दिखाया गया, उनमें से ज्यादातर मौके पर नहीं मिले। बाद में बंगाल और बांग्लादेश तक फैले इस अवैध कारोबार के नेटवर्क के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि 9 बंद फर्मों को कफ सिरप बेचा गया। इनमें मेसर्स सृष्टि फार्मा, जीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, हर्ष फार्मा, डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएम. मेडिकल एजेंसी और श्री बालाजी मेडिकल के नाम शामिल हैं। आयुक्त के मुताबिक, सिर्फ कोडीन युक्त सिरप की खरीद-बिक्री के लिए ही फर्जी फर्में बनाई गईं। सोनभद्र, जौनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, चंदौली समेत अन्य जनपदों में भी शुभम जायसवाल के खिलाफ केस दर्ज हैं। ———————- ये खबर भी पढ़िए- सिपाही ने 10-साल की बच्ची से रेप कर हत्या की: गोरखपुर जिला अस्पताल में डॉक्टरों-नर्सों ने पीटा; यहीं से किडनैप कर श्मशान ले गया था गोरखपुर में 35 साल के सिपाही ने 10 साल की बच्ची से रेप करने के बाद हत्या की थी। गुरुवार शाम को आई बच्ची की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। सिपाही ने जिला अस्पताल से ही बच्ची को किडनैप किया। फिर उसे बाइक से श्मशान घाट ले गया। वहां रेप करने के बाद बच्ची की गर्दन को पैर से दबाकर तोड़ दिया। इसके बाद शव नदी में फेंक दिया था। पढ़ें पूरी खबर…