संभल हिंसा- सपा सांसद बर्क ने भीड़ को उकसाया था:न्यायिक आयोग ने रिपोर्ट में दोषी माना, कहा- 4 मौतें पुलिस की गोली से नहीं हुईं

संभल में 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा पहले से तय साजिश का नतीजा थी। न्यायिक आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह बात कही। हिंसा के पीछे संभल सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, संभल विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल, जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली, सचिव मशहूद अली फारुकी, उपाध्यक्ष लद्दन खान, अधिवक्ता कासिम जमाल समेत इंतेजामिया समिति के अन्य सदस्यों की भूमिका सामने आई है। आयोग ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर हो रहे सर्वे को रोकने और राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के उद्देश्य से भीड़ को भड़काया गया था। आयोग ने 199 गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट, वीडियो, दस्तावेज और पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार की। दरअसल, संभल हिंसा की जांच के लिए राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग बनाया था। आयोग ने हिंदी-अंग्रेजी मिलाकर 857 पेज की रिपोर्ट बुधवार को यूपी सरकार को सौंपी। इसे आज ही राज्य सरकार ने विधानसभा पटल पर रखा। जानिए रिपोर्ट में क्या कहा गया प्रचार किया गया, जामा मस्जिद खतरे में है रिपोर्ट के अनुसार, सांसद जिया-उर-रहमान बर्क ने 19 और 22 नवंबर को दिए भाषणों में सर्वे और मस्जिद को लेकर ऐसे बयान दिए, जिनसे लोगों में यह धारणा बनी कि मस्जिद पर कब्जा किया जा रहा है। आयोग ने कहा कि इन भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए, जिससे तनाव और बढ़ा। लोगों को यह नहीं बताया गया कि अदालत ने केवल सर्वे का आदेश दिया था। इसके बजाय यह प्रचारित किया गया कि मस्जिद को गिराने या उससे कब्जा हटाने की कार्रवाई होने वाली है। इससे संवेदनशील माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। बड़ी संख्या में लोग हिंसा के लिए तैयार होकर इकट्‌ठे हो गए। साजिश के तहत लोग पत्थर-हथियार लेकर पहुंचे थे रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 नवंबर की सुबह बड़ी संख्या में लोग हथियारों और पत्थरों के साथ जामा मस्जिद के आसपास एकत्र हुए। उद्देश्य सर्वे रोकना और पुलिस-प्रशासन पर हमला करना था। सोहेल इकबाल सुबह मस्जिद पहुंचा। वहां से निकलने के बाद लगातार भीड़ के बीच जाकर लोगों को उकसाता रहा। गवाहों के बयानों में इसका उल्लेख है। इसके बाद मस्जिद के आसपास की गलियों से बड़ी संख्या में लोग निकलकर भीड़ में शामिल हो गए। फिर पथराव, आगजनी और फायरिंग शुरू हुई। चारों की मौत पुलिस की गोली से नहीं, .315 बोर के हथियार से हुई थी हिंसा के दौरान पुलिस-प्रशासन पर पथराव, फायरिंग, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हथियार लूटने की घटनाएं हुईं। इस दौरान 28 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें 7 को गोली लगी। आयोग के मुताबिक, चारों मृतकों की मौत .315 बोर के हथियार से चली गोली से हुई। पुलिस के पास .315 बोर के हथियार नहीं थे। उपलब्ध बैलिस्टिक साक्ष्यों से यह पुष्टि नहीं होती कि मौतें पुलिस फायरिंग से हुईं। आयोग ने कहा कि पुलिस ने पहले आंसू गैस, मिर्च ग्रेनेड, स्टन ग्रेनेड और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया। घातक हथियारों का उपयोग नहीं किया गया। पुलिस-प्रशासन ने घटना को बड़े सांप्रदायिक दंगे में बदलने से रोका आयोग ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई की सराहना की। कहा कि अधिकारियों ने संयम और रणनीति के साथ हालात संभाले। भीड़ को हिंदू बहुल इलाकों तक नहीं पहुंचने दिया गया, जिससे बड़ा सांप्रदायिक दंगा होने से बच गया। अगर भीड़ हिंदू बहुल क्षेत्रों तक पहुंच जाती, तो स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती थी। हिंसा का मकसद सर्वे रोकना, राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना था रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंसा का मुख्य उद्देश्य कोर्ट के आदेश से हो रहे सर्वे को रोकना और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना था। आयोग ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कठोर धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई है। तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग बना था 28 नवंबर, 2024 को यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस देंवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग बनाया था। इसमें रिटायर आईएएस अमित मोहन प्रसाद और आईपीएस अरविंद कुमार जैन को सदस्य बनाया गया था। अब जानिए पूरा मामला 19 नवंबर, 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया था। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ था। दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे। सर्वे को बाधित करते हुए हिंसा भड़क गई। पुलिस पर पथराव-फायरिंग की गई, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित ASP अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 28 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। सपा सांसद समेत 2750 से ज्यादा लोगों पर FIR संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद करते हुए 2750 से ज्यादा लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट समेत 158 आरोपियों को जेल भेजा गया था। इनमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल थे। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर, 2025 में रासुका लगी थी। इसके बाद वारिस और गुलाम पर भी रासुका की कार्रवाई की गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को 1 अगस्त, 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था। 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए थे। 18 जून को SIT ने 1128 पन्नों में सांसद बर्क समेत 23 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है। —————————– यह खबर भी पढ़ें कैराना से हिंदुओं को भगाने का आरोपी एनकाउंटर में ढेर, शामली में दिनदहाड़े मुठभेड़ शामली में बुधवार दोपहर दिनदहाड़े हुई मुठभेड़ में एक लाख का इनामी बदमाश मोहम्मद फुरकान मारा गया। उसने पुलिस को देखते ही कार्बाइन और पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। मुठभेड़ में एक सिपाही के पेट में गोली लगी। यहां पढ़ें पूरी खबर