लखनऊ में पुलिस अधिकारी बनकर 6 युवकों ने एंटीक सामानों के कारोबारी को अगवा कर लिया। स्कॉर्पियो में बंधक बनाकर उसे असलहे के बल पर पीटा। पत्नी को फोन कराकर कहलवाया कि 15 लाख रुपए भेज दो नहीं तो मार डालेंगे। पत्नी ने ड्राइवर के जरिए 13 लाख रुपए और जेवर भिजवाए, जिसके बाद आरोपियों ने कारोबारी को छोड़ दिया। वारदात के 8 दिन बाद रविवार को पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 4 यूपी के बुलंदशहर और 2 बिहार के रहने वाले हैं। कारोबारी के अपहरण की प्लानिंग पटना में बैठकर बनाई गई थी। इसमें कारोबारी का एक पार्टनर भी शामिल है। उसने 20 दिन में करीब 7 बार रेकी करवाई थी। आरोपियों के पास से इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाहियों के फर्जी आईडी कार्ड मिले हैं। कारोबारी को आरोपियों ने फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर पूछताछ करने के बहाने स्कॉर्पियो में बैठाया था। अब विस्तार से पढ़िए… लखनऊ साउथ के DCP मोहम्मद मुश्ताक ने बताया- सुदर्शन घोष आलमबाग के राजेंद्रनगर में साकेत अपार्टमेंट में रहते हैं। 13 सितंबर को उन्होंने कृष्णानगर थाने में शिकायत की थी। सुदर्शन ने बताया कि वह आलमबाग में एंटीक चीजों की बड़ी शॉप चलाते हैं। 12 सितंबर को वे अपनी शॉप पर जा रहे थे। तभी कुछ लोगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए उन्हें जबरन गाड़ी में बैठा लिया। असलहा दिखाकर डराया-धमकाया और विरोध करने पर पिटाई की। शातिर बदमाश उन्हें करीब 9 घंटे तक गाड़ी में बंधक बनाकर लखनऊ से आगरा और कन्नौज के रास्तों पर घुमाते रहे। लगातार जान से मारने की धमकी देकर फिरौती की मांग करते रहे। आखिरकार कारोबारी ने पत्नी को फोन किया और फिरौती की रकम आरोपियों के बताए लोकेशन पर लाने को कहा। पत्नी ने ड्राइवर के जरिए 13 लाख रुपए और कुछ जेवर भेज दिए। आरोपियों ने फिरौती कन्नौज में ली। इसके बाद कारोबारी को शहीद पथ पर छोड़कर फरार हो गए। सुदर्शन घोष अपने घर पहुंचे तो पूरी घटना परिवार को बताई और अगले दिन थाने में केस दर्ज कराया। एक आरोपी कारोबारी का करीबी, उसी ने अगवा करने का इशारा किया पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे गिरोह में लूट करते थे। गिरोह में अलग-अलग राज्यों के लोग शामिल हैं। ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिनके पास काफी पैसा हो। इसके बाद उनकी रेकी कर वारदात को अंजाम दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, लखनऊ के कारोबारी को लूटने वालों में एक युवक पटना का है। वह कारोबारी का करीबी है। उसे कारोबारी की आर्थिक स्थिति और आने-जाने की जानकारी साथियों को दी थी। इसके बाद सभी ने लखनऊ में रहकर कारोबारी की रेकी की। 3 अहम बातें- पुलिस आईडी कार्ड दिखाकर धौंस जमाते थे: आरोपियों के पास पुलिस के 4 आईडी कार्ड मिले हैं। वे इनसे ही लोगों पर धौंस जमाते थे। गिरोह के पास और भी कई गाड़ियां: पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि स्कॉर्पियो उनकी इकलौती गाड़ी नहीं है। गिरोह के पास और भी गाड़ियां हैं। गाड़ियों पर वे फर्जी नंबर प्लेट लगाते थे, ताकि पुलिस उनकी पहचान न कर सके। वारदात के बाद सभी आरोपी अलग-अलग राज्यों में चले गए थे। लखनऊ में मिली नकदी और जेवर आपस में बांट चुके थे। दोबारा वारदात के लिए लखनऊ आए: आरोपी अगली वारदात को अंजाम देने के लिए दोबारा लखनऊ आए थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और फिरौती में मिले जेवर और नकदी की बरामदगी के संबंध में पुलिस की कार्रवाई जारी है। 220 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले पुलिस ने मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बुलंदशहर के शिकारपुर निवासी अनुराग (26), लवी कुमार (30), दीपांशु कुमार (24) और आकाश चौधरी (23) शामिल हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी अनुराग कुमार (33) और सारण जिले के सोनपुर निवासी मनीष कुमार (24) को भी गिरफ्तार किया गया है। ———————- ये खबर भी पढ़िए- पत्नी से हंसी-मजाक करने पर भाई को मार डाला:गोरखपुर में BSc छात्र को खाना खिलाकर सुलाया, फिर बाके से काट दिया गोरखपुर में B.Sc. फर्स्ट ईयर के छात्र की हत्या उसके ही चचेरे भाई ने की थी। वजह थी- पत्नी से हंसी-मजाक और अफेयर का शक। आरोपी संतोष मिश्रा ने 17 सितंबर (गुरुवार) को अपने चचेरे भाई कार्तिकेय मिश्रा उर्फ शुभम (19) की घर के अंदर सोते समय हत्या कर दी थी। शक के आधार पर पुलिस ने संतोष को शनिवार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि शुभम मेरी पत्नी यानी अपनी भाभी से बहुत हंसी-मजाक करता था। चैट पर लंबी बातें करता था। एक दिन मैंने पत्नी के मोबाइल में उसकी चैट पढ़ ली थी। तब मुझे पता चला कि दोनों का अफेयर चल रहा है। (पूरी खबर पढ़िए)