KGMU के नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल ने रिजाइन किया:अब डीन का इस्तीफा मांगा जा रहा; छात्रा की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट

लखनऊ के KGMU में सोमवार को करीब 13 घंटे से रात 10 बजे भी नर्सिंग स्टूडेंट्स प्रदर्शन चल रहा है। बीमार छात्रा की मौत होने के बाद बड़ी संख्या में नर्सिंग छात्र विभाग में जुट गए और घेरावकर धरने पर बैठ गए। स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के चलते देर शाम नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल सूचना राय भौमिक ने रिजाइन कर दिया। इसके बावजूद छात्र प्रदर्शन से नहीं उठे। वे अब इस बात पर अड़े हुए हैं कि डीन नर्सिंग डॉ. अमिता पांडेय मिश्रा का भी इस्तीफा होना चाहिए, उसके बाद ही प्रदर्शन रुकेगा। उनका कहना है कि नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल के 7 स्टूडेंट्स बीमार हैं। इसमें आकक्षी, आयुषी कुमारी, सत्यम सिंह समेत अन्य छात्र-छात्राएं बीमार हैं। इसके बावजूद वार्डों में इनकी ड्यूटी लगाई जा रही है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुताबिक, नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव को डेंगू हुआ था। बीमारी के दौरान उसे छुट्टी नहीं दी गई। इसके बाद इलाज के लिए उसे वाराणसी ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। KGMU प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि ये घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। बीमारी की दशा में छात्रा की जांचें कराई गई थीं। ज्यादातर रिपोर्ट सामान्य आई थीं। प्रदर्शन की 4 तस्वीरें- काउंसिल के नियमों का उल्लंघन कर रहे जिम्मेदार प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग छात्र के मुताबिक, दिव्यांशी यादव नाम की 2025 बैच की छात्रा की कई दिनों से तबीयत खराब थी। छात्रों का आरोप है कि तबीयत खराब होने के बावजूद उसे छुट्टी नहीं दी जा रही थी। तीन दिन पहले इलाज के दौरान दिव्यांशी की मौत हो गई। छात्रा की मौत के बाद नर्सिंग छात्रों में आक्रोश है। छात्र मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदार इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियमों का खुलेआम उल्लंघन और मनमानी करते हैं। इसका खामियाजा यहां के छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया- बीमार छात्रा को मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टर ने देखा था। इसके बाद परिवारीजन उसे वाराणसी लेकर चल गए थे। हॉस्टल की व्यवस्थाओं को और दुरुस्त किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के दबाव में आने के बाद प्रिंसिपल और डीन का इस्तीफा देना ठीक नहीं है। बनारस में इलाज के दौरान हुई थी मौत जानकारी के मुताबिक, दिव्यांशी बनारस की रहने वाली थी। उसे 11 सितंबर को बुखार आया था। साथी उसे मेडिसिन विभाग की OPD में ले गए। जहां डॉक्टरों ने देखा। बुखार की पहचान के लिए 16 सितंबर को डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड समेत अन्य जांचें कराई गईं। इसमें दिव्यांशी की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। छात्राओं का आरोप है कि तबीयत खराब होने के बावजूद छुट्टी मांगने पर उसे अवकाश नहीं दिया गया। इसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। माता-पिता 17 सितंबर की शाम हॉस्टल पहुंचे। बेटी को साथ लेकर बनारस चले गए। वहां निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ———————— यह खबर भी पढ़िए- एप्पल मैनेजर हत्याकांड में सिपाही को 10 साल की जेल : लखनऊ कोर्ट का 8 साल बाद फैसला; 2 साल में रिहा हो सकता है प्रशांत चौधरी लखनऊ के चर्चित एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में सोमवार को जिला कोर्ट ने सजा का ऐलान किया। कोर्ट ने बर्खास्त आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या के मामले में 10 साल की सजा सुनाई है। उस पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। विवेक तिवारी हत्याकांड में दो सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार को आरोपी बनाया गया था। दोनों के खिलाफ लखनऊ की जिला एवं सत्र अदालत में करीब 8 साल तक मुकदमा चला। 17 सितंबर को कोर्ट ने प्रशांत चौधरी को IPC की धारा 304(2) के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था, जबकि दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को बरी कर दिया था। (पूरी खबर पढ़िए)