संघ की रिपोर्ट निगेटिव आई तो टिकट कटेगा:UP चुनाव की कमान खुद संभाली; 6 प्रांतों में जुटा रहा विधायकों का फीडबैक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की बागडोर अपने हाथों में संभाल ली है। संघ और उसके अन्य संगठनों के कार्यकर्ता जमीन पर उतरकर 2 काम कर रहे हैं। पहला- मौजूदा विधायकों और दावेदारों का फीडबैक जुटा रहे हैं। दूसरा- चुनावी माहौल बना रहे हैं। केंद्र और राज्य में संघ के बढ़ते प्रभाव से साफ संकेत मिल रहा है कि अगर किसी मौजूदा विधायक या दावेदार की रिपोर्ट संघ की ओर से निगेटिव आई, तो उनका टिकट कटना लगभग है। संघ यूपी में योगी सरकार की लगातार तीसरी बार वापसी सुनिश्चित करने के लिए किसी भी स्तर पर कड़े फैसले लेने से परहेज नहीं करेगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… विधायकों के जनाधार पर दिल्ली से लखनऊ तक मंथन आरएसएस और भाजपा का लक्ष्य 2027 में सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी में लगातार तीसरी बार सरकार बनाना है। इसे लेकर शीर्ष पदाधिकारी सक्रिय हो गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष, राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े और आरएसएस के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार ने दिल्ली में चुनावी रणनीति पर मंथन किया। इसके बाद संतोष और तावड़े ने लखनऊ में संघ पदाधिकारियों के साथ बैठक की। पदाधिकारियों ने सरकार, भाजपा और विधायकों की जमीनी स्थिति बताकर सुझाव दिए। हर सीट का तैयार हो रहा रिपोर्ट कार्ड संघ की ओर से हर जिले में प्रत्येक विधानसभा सीट की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसमें मुख्य रूप से 2 पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा- काशी, अवध, गोरक्ष, कानपुर, मेरठ और ब्रज प्रांत की ये विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी, जो टिकट बंटवारे का मुख्य आधार बनेगी। रिपोर्ट से इतर, संघ पदाधिकारियों की नाराजगी भी टिकट कटने की वजह बन सकती है। वहीं, जिसकी संघ पदाधिकारी पुरजोर पैरवी करेंगे, उसके टिकट की दावेदारी मजबूत हो सकती है। 2024 की गलती से सीख, रिपोर्ट नजरअंदाज करना पड़ा था भारी भाजपा सूत्रों के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में संघ और सीएम योगी ने कई सीटों पर प्रत्याशी बदलने और कई सांसदों की निगेटिव रिपोर्ट की बात कही थी। उस फीडबैक को नजरअंदाज कर पुराने चेहरों पर दांव लगाना पार्टी को भारी पड़ा था। यूपी में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 पर आ गईं। इस बार संघ किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। भाजपा और संघ के सामने 2 बड़ी चुनौतियां सभी 6 प्रांतों के लिए अलग-अलग रणनीति पश्चिमी यूपी, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर और काशी में बैठकों का दौर जारी है। संघ, पार्टी और सरकार समानांतर रूप से मैदान में जाकर फीडबैक ले रहे हैं। पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक अनिल कुमार और पश्चिम के क्षेत्रीय प्रचारक महेंद्र कुमार से चर्चा करने के बाद ही संगठन व सरकार के अहम फैसले लिए जा रहे हैं। इसी ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर सभी 6 सांगठनिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की जाएगी। भाजपा पर संघ का बड़ा प्रभाव राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्रनाथ भट्ट कहते हैं- केंद्र से लेकर यूपी तक भाजपा पर संघ का प्रभाव बड़ा है। भाजपा की राष्ट्रीय और प्रदेश टीम में भी संघ के प्रभाव की झलक देखने को मिली है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष, सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह पार्टी और सरकार से जुड़े राजनीतिक निर्णय पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक अनिल कुमार और पश्चिमी क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक महेंद्र कुमार से रायशुमारी के बाद ही ले रहे हैं। —————————- यह खबर भी पढ़ें- UP में विधानसभा चुनाव से पहले UCC लागू नहीं होगा, BJP रिस्क नहीं लेगी; मुस्लिम वोटर पूरी तरह सपा में जा सकते 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू नहीं होगी। भाजपा नहीं चाहती है कि UCC लागू होने के बाद एकमुश्त मुस्लिम वोट सपा की तरफ शिफ्ट हो जाए। पार्टी के नेता भी मान रहे हैं कि चुनाव से पहले UCC लागू करना भाजपा के लिए जोखिम भरा हो सकता है। यूपी में UCC अभी क्यों लागू नहीं हो सकेगा, ये 8 पॉइंट में समझिए…