KGMU में कुलपति और कुलसचिव के बीच मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। मंगलवार को जारी दो अलग-अलग कार्यालय आदेशों ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी। पहले कुलसचिव की ओर से जारी आदेश में उनके अवकाश के दौरान कार्यवाहक कुलसचिव के अधिकार सीमित किए गए। कुछ ही देर बाद कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने उसी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इस आदेश पर विवाद आया सामने कुलसचिव अर्चना गहरवार की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि उनके अवकाश के दौरान कार्यवाहक कुलसचिव केवल दैनिक प्रशासनिक कार्यों का निस्तारण करेंगे। इस अवधि में किसी भी प्रकार के नीतिगत निर्णय, वित्तीय दायित्व उत्पन्न करने वाले मामलों, नियुक्ति, स्थानांतरण और विश्वविद्यालय पर कानूनी और प्रशासनिक प्रभाव डालने वाले फैसले नहीं लिए जाएंगे। ऐसे सभी मामलों को उनके अवकाश से लौटने तक लंबित रखा जाएगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि कोई अत्यावश्यक मामला हो तो उनकी अनुमति के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। इसके कुछ समय बाद कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने अलग कार्यालय आदेश जारी कर कुलसचिव के इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। कुलपति ने जारी किया निरस्त करने का आदेश कुलपति ने अपने आदेश में कहा कि कुलसचिव द्वारा उनके अनुमोदन के बिना 14 जुलाई निरस्त किया जाता है। दोनों आदेश एक ही दिन जारी किए गए हैं। एक-दूसरे के विपरीत होने से विश्वविद्यालय में प्रशासनिक समन्वय पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भी इसे लेकर चर्चा तेज है। यह घटनाक्रम विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर मतभेद की ओर संकेत करता है। इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।