ग्लास और स्टील की भव्य इमारत, प्रवेश द्वार पर चमकती विशाल LED स्क्रीनें और एयरपोर्ट जैसी चाक-चौबंद सुरक्षा…। यह लखनऊ का गोमतीनगर रेलवे स्टेशन है। स्टेशन परिसर में कदम रखते ही आपको भारतीय रेल स्टेशनों पर दिखने वाली अफरा-तफरी नहीं मिलेगी। आने और जाने के लिए अलग-अलग एलिवेटेड रैंप बने हैं। जाने के लिए बनी एलिवेटेड रोड से जैसे ही आप मुख्य टर्मिनल में दाखिल होते हैं, 28 मीटर चौड़ा भव्य एयर कॉनकोर्स आपका स्वागत करता है। ये पटरियों के ऊपर बना एक बड़े पुल जैसी छत है, जहां से आप एयरपोर्ट के लाउंज की तरह बाहर का शानदार नजारे देख सकते हैं। यहां AC की ठंडी हवा, आरामदायक कुर्सियां और ऊपर कांच की छत से छनकर आती प्राकृतिक रोशनी, आपको किसी मॉल या लग्जरी लाउंज का अहसास कराती है। इससे नीचे प्लेटफॉर्म्स की तरफ जाने के लिए दर्जनों लिफ्ट और एस्केलेटर लगातार चल रहे हैं। प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड्स, ऑटोमेटेड अनाउंसमेंट और वाई-फाई से लैस हैं, जहां गंदगी का कतरा भी नजर नहीं आता। लखनऊ का ये रेलवे स्टेशन कितना खास है, ये जानिए… पूरा स्ट्रक्चर करीब 40 फीट ऊंचाई पर बना गोमतीनगर रेलवे स्टेशन 2 टर्मिनल में बंटा है। विभूतिखंड की तरफ नॉर्थ टर्मिनल है, गोमतीनगर की तरफ साउथ टर्मिनल है। विभूतिखंड की तरफ से स्टेशन में दाखिल होने पर करीब 200 मीटर लंबा ओवरब्रिज दिखता है, जो आपको सीधे गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर ले जाएगा। पूरा स्ट्रक्चर ही करीब 40 फीट की ऊंचाई पर है। यहां खड़े होने पर लगता है कि जमीन पर हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म पर 26 जगहों पर लिफ्ट लगाई गई है और 21 जगहों पर एस्केलेटर लगाए गए हैं। टिकट काउंटर बने हैं, साथ ही ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन भी लगाई गई हैं। नॉर्मल स्टेशन पर एक से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए पुल का इस्तेमाल होता है। यहां पुल के बजाय एक 28 मीटर चौड़ा और करीब 100 मीटर लंबा गलियारा तैयार किया गया। गलियारा पारदर्शी है, इसलिए ऊपर से ही दिख जाता है कि किस प्लेटफॉर्म पर कौन-सी ट्रेन आने वाली है। अंदर की तरफ भी ट्रेनों के आने-जाने की जानकारी वाले डिजिटल बोर्ड लगाए गए हैं। ऑटोमैटिक सेंसर आधारित कांच के गेट लगे हैं। यहां से आपको जिस भी प्लेटफॉर्म पर जाना है, केवल 1 मिनट में पहुंच सकते हैं। 22 ट्रेनों का स्टॉपेज, जल्द शताब्दी, तेजस शिफ्ट होंगी स्टेशन पर 22 ट्रेनों का स्टॉप है। इसमें 8 ट्रेनें यहीं से बनकर चलती हैं। गोमतीनगर से पटना जाने वाली वंदे भारत, पुष्पक एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस, अमृत भारत जैसी ट्रेन यहां से पकड़ी जा सकती है। आने वाले दिनों में चारबाग पर रुकने वाली शताब्दी एक्सप्रेस, तेजस, डबल डेकर, मास एक्सप्रेस को भी गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरे स्टेशन पर 50 से ज्यादा हाई-रेजोल्यूशन CCTV लगाए गए हैं। एक कमांड सेंटर से पूरे कैंपस पर निगरानी रखी जाती है। संदिग्ध गतिविधि नजर आते हैं, यह कमांड सेंटर GRP और RPF को अलर्ट कर देता है। इस स्टेशन पर 800 गाड़ियों के लिए अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई है। ये देश के सबसे बड़ी पार्किंग वाले स्टेशनों में शामिल है। स्टेशन के ऊपरी हिस्से में सोलर पैनल लगाए गए हैं। स्टेशन पर ही मौजूद एक अधिकारी कहते हैं- कई बार जब लाइट चली जाती है, तो कुछ वक्त के लिए सोलर पैनल से ही एसी को भी कनेक्ट कर दिया जाता है। सोलर के चलते यहां बिजली की खपत कम है। क्योंकि, ज्यादातर चीजें सोलर पैनल से ही चल जाती हैं। यात्री बोले- ऐसा स्टेशन नहीं देखा… स्टेशन पर हमारी मुलाकात छपरा (बिहार) के सुनील तिवारी से हुई। वह अपने परिवार के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। सुनील कहते हैं- सबसे अच्छी बात यह है कि यहां शांति है। कहीं से आदमी थककर आए, तो यहां आराम भी कर सकता है। सोने की भी व्यवस्था है, पूरे कैंपस में एसी चल रहा है। यहां तो ट्रेन का इंतजार करना भी अच्छा लग रहा है। नीशू कहती हैं- बिहार से यहां की स्थिति तो बहुत अच्छी है। वहां भी खैर काम हो रहा है। आगे बिहार में अच्छा होगा, लेकिन यह बहुत बेहतर है। बहुत साफ-सफाई है। बैठने की व्यवस्था भी अच्छी है। पास में मौजूद इंद्रावती कहती हैं- बाकी स्टेशन में और इस स्टेशन में जमीन-आसमान का फर्क है। मैंने अभी तक ऐसी सुविधा रेलवे स्टेशन पर नहीं देखी। गोरखपुर के अभिषेक मौर्य कहते हैं- यह बहुत शानदार बना है। यह तो चारबाग से भी ज्यादा विकसित हो रहा है। मुझे तो यह देखकर बहुत खुशी हुई। अभी यूपी में ऐसा स्टेशन कहीं नहीं देखा। मुझे लगता है कि ये जब पूरी तरह से बन जाएगा, तो देश में इससे अच्छा कोई स्टेशन ही नहीं होगा। मदन तिवारी कहते हैं- पहले भी लखनऊ आया था, लेकिन इस स्टेशन पर पहली बार आया हूं। ऐसी सुविधाएं अन्य स्टेशनों पर नहीं देखीं। यह अच्छा है, नया अनुभव है। ऐसे ही अन्य स्टेशनों पर भी होना चाहिए। यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ेगी, तो चीजें बेहतर होंगी। फेज- 2 तैयार होगा, तो लग्जरी मॉल नजर आएगा स्टेशन गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर फेज-1 का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके ऊपरी हिस्से पर फूडकोर्ट और अन्य दुकानों के टेंडर अगले महीने निकाले जाएंगे। फेज-2 के तहत गोमतीनगर स्टेशन के बाहर विभूतिखंड साइड में एक भव्य प्लाजा बनाया जा रहा है। इसका काम भी जल्द ही फाइनल हो जाएगा। इसमें कुल 177 आउटलेट्स तैयार हो रहे हैं। इस वक्त इससे ज्यादा आउटलेट्स और स्टोर लखनऊ में लुलु मॉल के पास हैं। वहां करीब 300 हैं। यहां जरूरत की हर चीज मिल सकती है। इस प्लाजा को स्टेशन के फूड कोर्ट से भी डायरेक्ट जोड़ा जाएगा। इस तरह से देखा जाए, तो यह अब तक का सबसे बड़ा प्लाजा होगा। इसमें लखनऊ की मशहूर चिकनकरी, रेवड़ी और ऐसी चीजें मौजूद होंगी, जो शहर की पहचान स्थापित करती हों। अटल बिहारी वाजपेयी के विजन से वर्ल्ड क्लास बनने का सफर 2002-2003: पहले यह एक सामान्य हॉल्ट था। पूर्व प्रधानमंत्री और लखनऊ के पूर्व सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे चारबाग का विकल्प बनाने के लिए नींव रखी और शुरुआत में प्लेटफॉर्म बने। 2014-2018: सांसद राजनाथ सिंह ने इसके विस्तार की पहल की। 21 अगस्त, 2018 को इसे वर्ल्ड-क्लास स्टेशन बनाने का प्रोजेक्ट पास हुआ। वर्तमान स्थिति: कोरोना के कारण हुई देरी के बाद अब फेज-1 पूरी तरह बनकर तैयार है। विभूतिखंड की तरफ नॉर्थ टर्मिनल की 3 मंजिला बिल्डिंग और गोमतीनगर की तरफ साउथ टर्मिनल की 2 मंजिल इमारत बनाई गई है। ————————- यह खबर भी पढ़ें – लग्जरी फार्महाउस में रहने वाला करोड़पति किसान, बाराबंकी में सिर्फ केले से ₹1.65 करोड़ कमाए 10वीं में फेल होने पर जिस शख्स ने पढ़ाई छोड़ी। पारंपरिक खेती से सिर्फ 15-20 हजार रुपए बचा पाता था। आज वही किसान करोड़ों का टर्नओवर कर रहा है। बात हो रही है बाराबंकी के ‘केला किंग’ और पद्मश्री से सम्मानित रामशरण वर्मा की। यूपी में ‘टिशू कल्चर’ केले को बढ़ावा देने वाले रामशरण ने इस साल 55 एकड़ में केले की खेती की है। दावा है कि एक एकड़ से 3 से 4 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…