AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी रविवार शाम 7 बजे बहराइच पहुंचे। यहां एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अब दरी नहीं बिछाई जाएगी, बल्कि हिस्सेदारी और बराबरी की बात होगी। ओवैसी ने कहा- सभी जानते हैं कि बीजेपी की सरकार चाहे यूपी में हो या देश के किसी अन्य राज्य में, वहां बुलडोजर किसके घरों पर चलता है। एनकाउंटर का डर किन लोगों के हिस्से आता है। किस समुदाय के नौजवानों की जिंदगी जेलों में डालकर बर्बाद की जा रही है। अगर कुछ नौजवान कश्ती पर रोजा खोलते हैं, तो उन्हें 40 दिन तक जेल में रहना पड़ता है। यूपी में एनकाउंटर के नाम पर कई मासूम लोगों को तकलीफ दी जा रही है। कल तक जो कहते थे कि ‘दिल में मदीना, आंख में काबा।’ बाबा बंगाल जाकर बोले थे कि बंगाल को काबा की जमीन नहीं बनने देंगे। अब वही बाबा के साथ बैठकर चाय पी रहे हैं। मैं जानता था ये बीजेपी-आरएसएस की कठपुतलियां हैं। इससे पहले रविवार सुबह असदुद्दीन ओवैसी करीब डेढ़ साल बाद लखनऊ पहुंचे। ओवैसी के एयरपोर्ट पहुंचते ही समर्थकों ने नारे लगाए- ‘देखो-देखो कौन आया, शेर आया… शेर आया।’ 2 तस्वीरें देखिए… ओवैसी के भाषण की 3 बड़ी बातें जानिए- शौकत अली को प्रत्याशी बनाने का ऐलान
आने वाले विधानसभा चुनाव में हमें एकजुट होकर अपनी लीडरशिप को मजबूत करना होगा। संविधान इसकी इजाजत देता है, वही संविधान जिसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बनाया। मजलिस नाइंसाफियों के खिलाफ लड़ती है। इसी वजह से उन पर तरह-तरह के आरोप लगाए जाते हैं। मटेरा से पार्टी के यूपी अध्यक्ष शौकत अली को प्रत्याशी बनाया है। मटेरा, बहराइच और पूरे प्रदेश में अपनी ‘जेहाद की ताकत’ पर पूरा गेम पलट देंगे। बिहार और पश्चिम बंगाल का जिक्र किया
हम पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि हम किसी की ‘बी-टीम’ हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में क्या हुआ, यह सबने देखा। जो लोग बीजेपी को रोकने की बात करते थे, उनमें से कई बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। एक हवा के झोंके में तमाम लोगों ने सर झुका दिया और बीजेपी में चले गए। सपा और अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का समर्थन किया था, लेकिन वहां भी कई नेता लाइन लगाकर बीजेपी में चले गए। बिहार में हमारे विधायकों को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद हम दोबारा जीतकर आए। हम मर जाएंगे, लेकिन ईमान का सौदा नहीं करेंगे मजलिस और ओवैसी इसके लिए तैयार हैं। लेकिन, अगर बीजेपी को रोकने के नाम पर मुझसे और मटेरा की जनता से यह कहा जाएगा कि सिर्फ दरी बिछाने का काम करो, तो अब ऐसा नहीं होगा। इन्हीं नाइंसाफियों के खिलाफ मजलिस और ओवैसी लड़ते हैं। यही वजह है कि हम पर तरह-तरह के आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि आरोप लगाने वाले जितने आरोप लगाना चाहें, लगाते रहें। हम मर जाना पसंद करेंगे, लेकिन अपने ईमान का सौदा नहीं करेंगे। डेढ़ साल बाद लखनऊ पहुंचे ओवैसी इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी लखनऊ पहुंचे। एक होटल में कुछ देर रुके फिर बहराइच निकल गए। विधानसभा चुनाव को देखते हुए ओवैसी का यह दौरा अहम माना जा रहा है। वह यूपी में 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर सकते हैं। इसका इशारा शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बहराइच पहुंचकर किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, हालांकि इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी असदुद्दीन ओवैसी करेंगे। ओवैसी का पहला कार्यक्रम सपा के गढ़ बहराइच की मटेरा विधानसभा में था। उन्होंने शंकरपुर चौराहे पर जनसभा को संबोधित किया। जनसभा से पहले हिंदू संगठनों ने किया विरोध, पुतला फूंका मटेरा के शंकरपुर में जनसभा से पहले असदुद्दीन ओवैसी का हिंदू संगठनों ने विरोध किया। लोगों ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का पुतला फूंका। कुछ लोग काले झंडे लेकर जनसभा स्थल पहुंचने की जिद पर अड़ गए, जिन्हें मौके पर मौजूद पुलिस बल ने रोक दिया। हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष मनीष पांडे ने कहा- हम सभी ओवैसी की जनसभा का विरोध करते हुए उन्हें काला झंडा दिखाने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें रोक लिया। बीते दिनों पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने महाराजा सुहेलदेव को काल्पनिक बताया था, इसलिए संगठन के लोगों ने उनका पुतला फूंका है। प्रदर्शन की 2 तस्वीरें देखिए… रैली पर डिप्टी सीएम का तंज- इनकी दाल गलने वाली नहीं
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ओवैसी के यूपी के दौरे पर तंज कसा। उन्होंने कहा- ये ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाले लोग हैं। धर्म और जाति के आधार पर राजनीति करते हैं। इनकी दाल गलने वाली नहीं है। भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के तहत काम करती है। जन-जन का आशीर्वाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ है। ओवैसी ने बहराइच का मटेरा ही क्यों चुना
इसके दो कारण हैं। पहला- मटेरा विधानसभा मुस्लिम बहुल है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 45% है। यहां 3.4 लाख कुल वोटर्स हैं। इसमें 1.5 से 1.55 लाख मुस्लिम वोटर्स हैं। सपा का लगातार तीन चुनाव से इस सीट पर कब्जा है। वर्तमान में सपा की मरिया शाह यहां से विधायक हैं। इससे पहले उनके पति यासर शाह भी दो बार इसी सीट से विधायक रह चुके हैं। दूसरा- बहराइच में 11वीं शताब्दी (1033–1034 ईस्वी के आसपास) में महाराजा सुहेलदेव (श्रावस्ती के राजा) और महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी (गाजी मियां) के बीच एक ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इसमें महाराजा सुहेलदेव ने सालार मसूद को मार गिराया था। गाजी मियां की मौत के बाद उनकी मजार बहराइच शहर में बनाई गई। मटेरा इलाके से लगे क्षेत्रों में सालार मसूद गाजी की दरगाह का प्रभाव है। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेले और सालाना उर्स पर रोक लगा दी गई थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, जहां से मेले और उर्स पर लगी रोक हटा दी गई थी। इससे पहले यूपी कब आए थे ओवैसी?
ओवैसी इससे पहले 21 जनवरी 2025 को लखनऊ आए थे। लखनऊ में वक्फ संशोधन बिल पर जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी की बैठक में शामिल हुए थे। इसमें यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड, शिया वक्फ बोर्ड के साथ-साथ दूसरे स्टेकहोल्डर्स संग बैठक की थी। 2022 में 95 सीटों पर पार्टी ने चुनाव लड़ा था
ओवैसी की पार्टी ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें अधिकतर सीटें पश्चिमी यूपी की थी। सभी सीटों पर उनकी पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी। उनकी पार्टी को पूरे प्रदेश में करीब साढ़े चार लाख वोट मिले थे। कौन हैं असदुद्दीन ओवैसी और क्या है उनकी पार्टी का इतिहास? ये खबर भी पढ़ें… यूपी के अफसर ने लड़की पर लुटाए 25 लाख रुपए:डेटिंग एप पर हुआ प्यार, शादी से इनकार पर केस किया कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन जब डेटिंग एप वाले प्यार में कोई आंख मूंदकर लाखों रुपए लुटाने लगे, तो अंजाम अदालत तक पहुंच जाता है। यूपी के मत्स्य विभाग में सहायक निदेशक पद पर तैनात दीपांशु के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। पूरी खबर पढ़ें…
आने वाले विधानसभा चुनाव में हमें एकजुट होकर अपनी लीडरशिप को मजबूत करना होगा। संविधान इसकी इजाजत देता है, वही संविधान जिसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बनाया। मजलिस नाइंसाफियों के खिलाफ लड़ती है। इसी वजह से उन पर तरह-तरह के आरोप लगाए जाते हैं। मटेरा से पार्टी के यूपी अध्यक्ष शौकत अली को प्रत्याशी बनाया है। मटेरा, बहराइच और पूरे प्रदेश में अपनी ‘जेहाद की ताकत’ पर पूरा गेम पलट देंगे। बिहार और पश्चिम बंगाल का जिक्र किया
हम पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि हम किसी की ‘बी-टीम’ हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में क्या हुआ, यह सबने देखा। जो लोग बीजेपी को रोकने की बात करते थे, उनमें से कई बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। एक हवा के झोंके में तमाम लोगों ने सर झुका दिया और बीजेपी में चले गए। सपा और अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का समर्थन किया था, लेकिन वहां भी कई नेता लाइन लगाकर बीजेपी में चले गए। बिहार में हमारे विधायकों को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद हम दोबारा जीतकर आए। हम मर जाएंगे, लेकिन ईमान का सौदा नहीं करेंगे मजलिस और ओवैसी इसके लिए तैयार हैं। लेकिन, अगर बीजेपी को रोकने के नाम पर मुझसे और मटेरा की जनता से यह कहा जाएगा कि सिर्फ दरी बिछाने का काम करो, तो अब ऐसा नहीं होगा। इन्हीं नाइंसाफियों के खिलाफ मजलिस और ओवैसी लड़ते हैं। यही वजह है कि हम पर तरह-तरह के आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि आरोप लगाने वाले जितने आरोप लगाना चाहें, लगाते रहें। हम मर जाना पसंद करेंगे, लेकिन अपने ईमान का सौदा नहीं करेंगे। डेढ़ साल बाद लखनऊ पहुंचे ओवैसी इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी लखनऊ पहुंचे। एक होटल में कुछ देर रुके फिर बहराइच निकल गए। विधानसभा चुनाव को देखते हुए ओवैसी का यह दौरा अहम माना जा रहा है। वह यूपी में 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर सकते हैं। इसका इशारा शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बहराइच पहुंचकर किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, हालांकि इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी असदुद्दीन ओवैसी करेंगे। ओवैसी का पहला कार्यक्रम सपा के गढ़ बहराइच की मटेरा विधानसभा में था। उन्होंने शंकरपुर चौराहे पर जनसभा को संबोधित किया। जनसभा से पहले हिंदू संगठनों ने किया विरोध, पुतला फूंका मटेरा के शंकरपुर में जनसभा से पहले असदुद्दीन ओवैसी का हिंदू संगठनों ने विरोध किया। लोगों ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का पुतला फूंका। कुछ लोग काले झंडे लेकर जनसभा स्थल पहुंचने की जिद पर अड़ गए, जिन्हें मौके पर मौजूद पुलिस बल ने रोक दिया। हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष मनीष पांडे ने कहा- हम सभी ओवैसी की जनसभा का विरोध करते हुए उन्हें काला झंडा दिखाने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें रोक लिया। बीते दिनों पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने महाराजा सुहेलदेव को काल्पनिक बताया था, इसलिए संगठन के लोगों ने उनका पुतला फूंका है। प्रदर्शन की 2 तस्वीरें देखिए… रैली पर डिप्टी सीएम का तंज- इनकी दाल गलने वाली नहीं
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ओवैसी के यूपी के दौरे पर तंज कसा। उन्होंने कहा- ये ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाले लोग हैं। धर्म और जाति के आधार पर राजनीति करते हैं। इनकी दाल गलने वाली नहीं है। भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के तहत काम करती है। जन-जन का आशीर्वाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ है। ओवैसी ने बहराइच का मटेरा ही क्यों चुना
इसके दो कारण हैं। पहला- मटेरा विधानसभा मुस्लिम बहुल है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 45% है। यहां 3.4 लाख कुल वोटर्स हैं। इसमें 1.5 से 1.55 लाख मुस्लिम वोटर्स हैं। सपा का लगातार तीन चुनाव से इस सीट पर कब्जा है। वर्तमान में सपा की मरिया शाह यहां से विधायक हैं। इससे पहले उनके पति यासर शाह भी दो बार इसी सीट से विधायक रह चुके हैं। दूसरा- बहराइच में 11वीं शताब्दी (1033–1034 ईस्वी के आसपास) में महाराजा सुहेलदेव (श्रावस्ती के राजा) और महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी (गाजी मियां) के बीच एक ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इसमें महाराजा सुहेलदेव ने सालार मसूद को मार गिराया था। गाजी मियां की मौत के बाद उनकी मजार बहराइच शहर में बनाई गई। मटेरा इलाके से लगे क्षेत्रों में सालार मसूद गाजी की दरगाह का प्रभाव है। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेले और सालाना उर्स पर रोक लगा दी गई थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, जहां से मेले और उर्स पर लगी रोक हटा दी गई थी। इससे पहले यूपी कब आए थे ओवैसी?
ओवैसी इससे पहले 21 जनवरी 2025 को लखनऊ आए थे। लखनऊ में वक्फ संशोधन बिल पर जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी की बैठक में शामिल हुए थे। इसमें यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड, शिया वक्फ बोर्ड के साथ-साथ दूसरे स्टेकहोल्डर्स संग बैठक की थी। 2022 में 95 सीटों पर पार्टी ने चुनाव लड़ा था
ओवैसी की पार्टी ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें अधिकतर सीटें पश्चिमी यूपी की थी। सभी सीटों पर उनकी पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी। उनकी पार्टी को पूरे प्रदेश में करीब साढ़े चार लाख वोट मिले थे। कौन हैं असदुद्दीन ओवैसी और क्या है उनकी पार्टी का इतिहास? ये खबर भी पढ़ें… यूपी के अफसर ने लड़की पर लुटाए 25 लाख रुपए:डेटिंग एप पर हुआ प्यार, शादी से इनकार पर केस किया कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन जब डेटिंग एप वाले प्यार में कोई आंख मूंदकर लाखों रुपए लुटाने लगे, तो अंजाम अदालत तक पहुंच जाता है। यूपी के मत्स्य विभाग में सहायक निदेशक पद पर तैनात दीपांशु के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। पूरी खबर पढ़ें…