हरियाणा के गुरुग्राम में हुई रियल एस्टेट कंपनी अडानी रियल्टी के सेल्स मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा (31) की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की कड़ियां अब उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़ गई हैं। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी आन्या वत्स ने हत्या को अंजाम देने के लिए यूपी पुलिस के एक सिपाही से दो अवैध देशी पिस्तौल खरीदी थी। पुलिस ने हथियार सप्लाई करने वाले सिपाही को भी हिरासत में ले लिया है, जिससे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा पुलिस की जांच में यह साफ हो गया है कि यह हत्या कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि इसकी काफी दिनों से प्लानिंग चल रही थी। आन्या वत्स ने करीब तीन महीने पहले ही युवराज को रास्ते से हटाने की प्लानिंग कर ली थी। हथियार के लिए ही उसने उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सक्रिय सिपाही से संपर्क साधा। फिर अपने लिव इन पार्टनर संयम के साथ मिलकर 6 सितंबर की रात गुरुग्राम में युवराज की हत्या कर दी। फिलहाल आन्या वत्स और संयम सचदेवा इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, जिनसे पूछताछ में ये बातें पता चली हैं। अभी इस मामले में गहन पूछताछ की जानी है, इसलिए पुलिस दोनों आरोपियों को तीसरी बार रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। युवराज मनचंदा हत्याकांड में पुलिस को ये 3 बातें पता चलीं… यूपी पुलिस के सिपाही से दो लाख रुपए में खरीदे हथियार पुलिस की जांच में सामने आया है कि आन्या ने उस सिपाही को ₹2 लाख की रकम दी, जिसके बदले सिपाही ने उसे दो अवैध देसी पिस्तौल और कारतूस मुहैया कराए। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस, आन्या और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा से पूछताछ के बाद इस सिपाही को हिरासत में लिया। पुलिस अब सिपाही के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है कि उसने ये अवैध हथियार कहां से हासिल किए थे और क्या वह पहले भी ऐसे अपराधों में शामिल रहा है। हत्या के बाद मोबाइल चालू रखा, फर्जी हवाई टिकट भेजी पुलिस के मुताबिक, इस मर्डर केस की मुख्य वजह ₹1 करोड़ का वित्तीय विवाद है। युवराज की जल्द ही शादी होने वाली थी और वह आन्या से अपने दिए हुए पैसे वापस मांग रहा था। पैसे न लौटाने पड़े, इसलिए आन्या और संयम ने युवराज की गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद पुलिस और परिवार को गुमराह करने के लिए आन्या ने युवराज का मोबाइल चालू रखा। उसने युवराज के मोबाइल से उसके परिवार को दिल्ली से बेंगलुरु की एक फर्जी फ्लाइट टिकट का स्क्रीनशॉट भेजा। साथ ही मैसेज किया कि वह बेंगलुरु में एक बहुत बड़ी बिजनेस डील में व्यस्त है, जहां उसका फोन ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसी शातिर चाल के कारण परिवार शुरुआत में गुमराह हो गया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने लाश को ठिकाने लगा दिया। आन्या का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड, पेशेवर ठग थी पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आन्या वत्स कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि वह एक पेशेवर ठग है। वह दिल्ली-NCR में करोड़ों रुपये के फर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ED) वसूली रैकेट को चला रही थी। आन्या और संयम बड़े व्यापारियों को फर्जी ED नोटिस भेजकर करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूलते थे। एक मामले में उन्होंने एक कारोबारी से ₹26 करोड़ की मांग भी की थी। युवराज की हत्या के बाद जब पुलिस ने इन दोनों के व्हाट्सएप चैट्स खंगाले, तब जाकर इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। मर्डर केस में लापरवाही पर कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को फटकारा उधर, साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया माना है। कोर्ट का कहना है कि शव की शिनाख्त के लिए ज्यादा प्रयास नहीं किए गए। कोर्ट ने इस पर भी नाराजगी जताई कि पुलिस ने शव की पहचान के लिए केंद्रीय नेटवर्क पर तस्वीरें 16 सितंबर को यानि अंतिम संस्कार के दो दिन बाद अपलोड की गईं। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस की इस जल्दबाजी के कारण पीड़ित परिवार अपने बेटे का चेहरा तक नहीं देख पाया और उनसे अंतिम विदाई का हक छीन लिया गया। कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया है। दरअसल, युवराज 6 सितंबर को लाजपत नगर से लापता हुआ था और 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में उसकी गुमशुदगी की FIR दर्ज हुई थी। गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को बादशाहपुर के एक नाले से युवराज का शव बरामद हो गया था। लेकिन पुलिस ने नियमों की अनदेखी करते हुए शव को ‘अज्ञात’ मानकर महज चार दिन के भीतर 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। पुराना कलीग खोल चुका दोनों हत्यारोपियों की पोल आन्या और संयम कौन है और क्या करते थे? इसके बारे में उनके एक पुराने कलीग ने सोशलमीडिया पर एक पोस्ट डाली। नैरो पपाया नाम के रेडिट अकाउंट से लिखा गया- आपमें से बहुत से लोगों ने कल की यह खबर देखी होगी कि कैसे युवराज मनचंदा की हत्या उनके पूर्व कलीग्स, आन्या वत्स और संयम सचदेवा ने कर दी। मैंने इन तीनों के साथ एक ही कंपनी में काम किया है, इसलिए मुझे असल में क्या हुआ था, इसकी पूरी सच्चाई पता है। युवराज और आन्या एक ही टीम में थे। आन्या ने ‘एमार’ कंपनी में काम करने के दौरान कई धोखाधड़ी की थीं। उसने ग्राहकों को ऐसे कॉमर्शियल प्लॉट बेच दिए जो बिक्री के लिए उपलब्ध ही नहीं थे और ग्राहकों से कैश में पैसे ले लिए। दिल्ली पुलिस में उसके खिलाफ कई FIR दर्ज हैं। आन्या को अपने कलीग्स से पैसे उधार लेने की भी आदत थी। कई कलीग्स ने उसे पैसे उधार दिए थे, क्योंकि वह अपनी मां के बीमार होने का बहाना बनाती थी। जब भी कोई उससे अपने पैसे वापस मांगता, तो वह इनकम टैक्स अधिकारियों (असली या नकली, हमें नहीं पता) से फोन करवाती थी, जो पैसे मांगने वाले को धमकाते थे कि आन्या को परेशान मत करो, वरना हम तुम्हें मुसीबत में डाल देंगे। उसने युवराज से भी पैसे उधार लिए थे। अब युवराज अपनी शादी के लिए वापस मांग रहा था। उसने युवराज को इसी सिलसिले में बात करने के लिए बुलाया और वहीं उसकी हत्या कर दी। आन्या और संयम शादीशुदा नहीं हैं, लेकिन आन्या का संयम से एक बच्चा है। संयम किसी और से शादीशुदा है और उसके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज है। ———————– युवराज मर्डर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… गुरुग्राम-महिला सहकर्मी ने किया कंपनी मैनेजर का मर्डर:लिवइन पार्टनर संग गर्दन में 2 गोली मारी, 7 घंटे कार में रखी डेडबॉडी; उत्तराखंड से पकड़े गुरुग्राम में कंपनी मैनेजर युवराज हत्याकांड में खुलासा:पूर्व कलीग से ₹1 करोड़ लेने थे; फ्लैट पर मर्डर की प्लानिंग, 3 महीने पहले कट्टा खरीदा 2 दिन तक परिवार को मैसेज भेजते रहे हत्यारोपी:गुरुग्राम अडानी रियल्टी मैनेजर युवराज मर्डर केस; लिखा- मुंबई जा रहा हूं, जल्द लौटूंगा शादी से एक महीने पहले हुआ कंपनी मैनेजर का मर्डर:गुरुग्राम में पूर्व कलीग को पैसे उधार दिए थे, युवक बोला- मांगने पर मार डाला