69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की है। मंगलवार को मामले पर पहली बार नई बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। इससे पहले यह केस जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच में चल रहा था। अब मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने नियमित सुनवाई के लिए जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की विशेष बेंच तय कर दी है। भर्ती सूची और आरक्षण पर उठे सवाल सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से दाखिल शपथपत्र (एफिडेविट) और चयन सूची पर भी बहस हुई। आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग ने अपनी सूची में केवल 3,324 ओबीसी अभ्यर्थियों को शामिल किया है, जबकि इससे कहीं अधिक पात्र अभ्यर्थी नियुक्ति के हकदार हैं। उनका दावा है कि राज्य सरकार पहले ही 6,800 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की सूची जारी कर चुकी है, इसलिए मौजूदा सूची अधूरी है। अभ्यर्थियों ने यह भी आपत्ति जताई कि विभाग ने 4,946 ऐसे अभ्यर्थियों के नाम भी सूची में शामिल किए हैं, जिन्हें पहले नियुक्ति का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उनका कहना है कि इन पदों को रिक्त मानकर मेरिट सूची में संशोधन किया जाए, जिससे दूसरे पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल सके। अब 11 अगस्त को नियमित सुनवाई होगी। कोर्ट ने सहमति के आधार पर मामला निस्तारण करने की बात कही थी इससे पहले 28 जुलाई को जस्टिस दीपाकंर दत्ता व जस्टिस शील नागू की कोर्ट ने सभी पक्षों को आपसी सहमति पर मामले के निस्तारण का सुझाव दिया था। इसके लिए उन्होंने सभी पक्षों को अपनी सहमति शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने के लिए 31 जुलाई तक की मोहलत दी थी। पर इसी बीच सीजेआई ने नियमित सुनवाई के लिए बेंच तय कर दी। केस नई बेंच सुनेगी। 11 अगस्त की सुनवाई से तय होगा कि केस किस दिशा में जाएगा? पिछड़ा-दलित संयुक्त मोर्चा ने याची लाभ की मांग की पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप और प्रदेश महासचिव सुमित यादव के मुताबिक आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थी जून 2020 से लगातार न्यायालय में अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 13 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की एकल पीठ और 13 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं। हमारा उद्देश्य छह वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को हटाना नहीं है। हमारी मांग केवल यह है कि जो आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थी शुरुआत से याचिकाकर्ता रहे हैं, उन्हें ‘याची लाभ’ देकर नियुक्ति दी जाए, जिससे विवाद का स्थायी समाधान हो सके। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में प्रस्ताव रखकर मामले का निस्तारण कराया जाए। प्रदेश प्रवक्ता पुष्पेंद्र सिंह जेलर और शिवशंकर ने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के दायरे में हुई है। उनका तर्क है कि सरकार यदि आरक्षण प्रभावित याचिकाकर्ताओं को याची लाभ देने का प्रस्ताव रखे तो वर्षों से लंबित विवाद का समाधान संभव हो सकता है।