यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं आराधना मिश्रा ‘मोना’:अजय राय को हटाया; इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष, देवेंद्र निषाद-आलोक प्रसाद को उपाध्यक्ष बनाया

कांग्रेस नेतृत्व ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया है। पार्टी ने सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। दो वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। गोरखपुर के देवेंद्र निषाद महरा और महराजगंज के आलोक प्रसाद को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। कांग्रेस ने नियुक्ति में सोशल जातीय समीकरण साधा है। विधानसभा चुनाव से करीब तीन महीने पहले ब्राह्मण, अल्पसंख्यक (मुस्लिम), पिछड़े और दलित का दांव खेला है। आराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ अजय राय का यूपी कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल खत्म हो गया है। अजय राय अगस्त 2023 से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे। पार्टी के नए यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने ही प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष बदले जाने की मांग की थी। पार्टी ने अजय राय के योगदान की सराहना की है। इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चौधरी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह नियुक्ति भी तत्काल प्रभाव से लागू होगी। अब प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी नई टीम के हाथों में होगी। आराधना मिश्रा बोलीं- कांग्रेस ने महिलाओं को सिर्फ टिकट नहीं दिया, सशक्त भी बनाया आराधना मिश्रा मोना ने अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महिलाओं की सुरक्षा और उनके खिलाफ बढ़ते अपराधों पर बात की। उन्होंने कहा, महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। NCRB के आंकड़े देखने पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों की स्थिति का पता चलता है। घरेलू हिंसा से लेकर सड़कों पर होने वाले अपराधों तक, हर मामले में प्रदेश सरकार पूरी तरह विफल रही है। आराधना मिश्रा ने कहा- कांग्रेस ने हमेशा महिला सशक्तीकरण के लिए काम किया है। पार्टी ने महिलाओं को सिर्फ अपने एजेंडे और घोषणापत्र का हिस्सा नहीं बनाया, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के अवसर भी दिए हैं। जब प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की प्रभारी थीं, तब कांग्रेस ने 40% महिलाओं को टिकट देकर चुनाव लड़ाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिला सशक्तीकरण की बात केवल की नहीं, बल्कि उसे करके भी दिखाया है। पार्टी ने पहले उन्हें विधानसभा में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी थी। अब प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। 52 साल की आराधना मिश्रा लगातार तीसरी बार विधायक 52 साल की आराधना मिश्रा ‘मोना’ प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। यूपी में विधानमंडल की नेता भी हैं। वह दो दशक से ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय हैं और प्रियंका गांधी वाड्रा की करीबी हैं। मोना के पिता प्रमोद तिवारी इस समय राजस्थान से राज्यसभा सांसद और राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता हैं। प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से 9 बार विधायक और यूपी सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे। उनके सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी अच्छे संबंध हैं। खासियत और उपलब्धि क्या है? अब बात इमरान मसूद की… इमरान मसूद 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन से सहारनपुर लोकसभा से चुनाव जीते थे। बावजूद वह गठबंधन के अंतर्विरोधों पर खुलकर बोलते हैं। हाल ही में उन्होंने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि 2024 में कांग्रेस के साथ के कारण ही समाजवादी पार्टी 37 सीटें जीत पाई। इमरान मसूद ने जनवरी 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। वह सपा में चले गए। हालांकि बाद में उन्होंने सपा छोड़कर बसपा जॉइन कर ली। अगस्त 2023 में बसपा से निष्कासित होने के बाद 7 अक्टूबर 2023 को उन्होंने फिर कांग्रेस पार्टी में वापसी कर ली थी। इसके बाद उन्हें 2024 के भारतीय आम चुनाव के लिए सहारनपुर से पार्टी का उम्मीदवार नामित किया गया। मसूद ने पूर्व सांसद राघव लखनपाल के खिलाफ 5.25% के अंतर से चुनाव जीता था। साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए उनके एक विवादित बयान ने देश भर में सुर्खियां बटोरी थीं, जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। एक चुनावी सभा के दौरान इमरान मसूद ने कहा था- यदि नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश को गुजरात बनाने की कोशिश करेंगे, तो उनकी “बोटी-बोटी” काट दी जाएगी। खासियत और उपलब्धि क्या है? अब दोनों उपाध्यक्ष को जानिए… देवेंद्र निषाद : बसपा से हुई थी राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए गए देवेंद्र निषाद ‘महरा’ गोरखपुर के कौड़ीराम क्षेत्र के गांव बिस्टौली खुर्द के रहने वाले हैं। उन्हें कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और प्रियंका गांधी का करीबी माना जाता है। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत बसपा के साथ हुई थी। बसपा ने 1996 में कौड़ीराम विधानसभा से चुनाव लड़ाया था। हालांकि, उन्हें जीत नहीं मिल सकी थी। इसके बाद बसपा संगठन में वह जिला कोषाध्यक्ष, जिला महासचिव, जिला प्रभारी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य की भूमिका में रहे। 2012 में देवेंद्र निषाद ने कांग्रेस जॉइन की। जब राष्ट्रीय महासचिव के रूप में प्रदेश प्रभारी बनकर प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में आईं तो उस समय 43 लोगों की कार्यकारिणी में देवेंद्र भी शामिल थे। उन्हें प्रदेश सचिव बनाया गया था। उन्होंने बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज जिलों में प्रभारी की भूमिका निभाई। इसके बाद फिशरमैन कांग्रेस, पूर्वी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष का दायित्व मिला। 2022 में कांग्रेस ने उन्हें गोरखपुर ग्रामीण से विधानसभा चुनाव लड़ाया था, लेकिन जीत नहीं मिल सकी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव रहे हैं। 2022 में गोरखपुर ग्रामीण से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, हार का सामना करना पड़ा। देवेंद्र निषाद ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- पार्टी ने मुझे जो दायित्व दिया है और आगे भी जो दायित्व मिलेगा, उसका पूरी निष्ठा के साथ पालन करेंगे और पार्टी को मजबूत बनाएंगे। आलोक प्रसाद: 2 बार में 9 साल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे महराजगंज जिले के रहने वाले आलोक प्रसाद ने साल 2000 में यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसके बाद वह कांग्रेस संगठन में आगे बढ़ते गए। वह दो बार में करीब 9 साल तक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव और महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाली। वह प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। आलोक प्रसाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के चेयरमैन भी रह चुके हैं। नवंबर 2024 में इस पद से जुड़े एक कार्यक्रम में वह निवर्तमान अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए थे। महराजगंज सदर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर तीन बार चुनाव लड़ा है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने उन्हें इसी सीट से उम्मीदवार बनाया था। उस समय वह कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष थे। क्या भारी पड़ेगा बिहार और झारखंड वाला ‘एक्सपेरिमेंट’ कांग्रेस मार्च- 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव से करीब 7 महीने पहले प्रदेश अध्यक्ष बदल चुकी है। पार्टी ने अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह दलित नेता राजेश कुमार को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। चुनाव नतीजों में कांग्रेस 19 सीटों से घटकर 6 सीटों पर रह गई। इसी तरह अगस्त- 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव से करीब 3 महीने पहले कांग्रेस ने राजेश ठाकुर की जगह OBC नेता केशव महतो कमलेश को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। चुनाव में कांग्रेस ने अपनी 16 सीटें बरकरार रखीं। अब यूपी में अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। ऐसे में चुनाव से पहले संगठन में बदलाव का यह कांग्रेस का तीसरा बड़ा प्रयोग है। अजय राय बोले- लड़ाई जारी रहेगी अजय राय ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद एक्स पर पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा- मुझ जैसे एक सामान्य कार्यकर्ता को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने के लिए मैं राहुल गांधी जी एवं कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व का जीवनभर आभारी रहूंगा। लड़ाई अभी भी जारी है। नए अध्यक्ष सहित सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। लड़ेंगे, जीतेंगे! हर-हर महादेव! भाजपा का तंज- तुष्टिकरण की होड़ में सपा से आगे निकली कांग्रेस भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कांग्रेस में इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति और तुष्टिकरण की होड़ में कांग्रेस अब समाजवादी पार्टी से भी आगे निकल गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान मसूद लगातार कांग्रेस नेतृत्व के इशारे पर सपा को चुनौती देते रहे हैं। अब उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से सपा के लिए उनके साथ गठबंधन पर बातचीत करना और मुश्किल होगा। सीट बंटवारे की बातचीत में कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। ***************** यह खबर भी पढ़िए:- दिव्या मित्तल के सवालों पर अनुप्रिया पटेल ने चुप्पी साधी:दूसरे मुद्दों पर बोलती रहीं, लखनऊ में कार्यकर्ताओं से कहा- 2027 में NDA हैट्रिक लगाएगा
अपना दल (S) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित कैंप कार्यालय में संगठन की समीक्षा बैठक की। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों, बूथ मैनेजमेंट और संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक के बाद भास्कर रिपोर्टर ने अनुप्रिया पटेल से पूर्व IAS दिव्या मित्तल से मिलने वाली चुनौती को लेकर सवाल किया। 9 बार पूछने पर भी अनुप्रिया ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने दूसरे मुद्दों पर बात करना ही बेहतर समझा। दिव्या मित्तल यूपी कैडर की 2013 बैच की पूर्व IAS अधिकारी हैं। उन्होंने 30 अगस्त को नौकरी से इस्तीफा दिया था। 29 सितंबर उन्होंने घोषणा की कि वह उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी। उन्होंने मिर्जापुर से चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। भास्कर पोल में भी आम जनता की यही राय निकलकर सामने आई थी। पढ़ें पूरी खबर…