यूपी के सहारनपुर से एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल के 4 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया। ये भाजपा के दफ्तरों, अस्पताल, स्कूल समेत कई संवेदनशील ठिकानों पर ब्लास्ट करने की साजिश रच रहे थे। इनमें से 2 संदिग्ध महकाब और शाहरुख सहारनपुर के रहने वाले हैं। दैनिक भास्कर ने सहारनपुर में इनके घर और गांववालों से बात की। एक ग्रामीण ने बताया- महकाब पहले शाम को सबके साथ बैठता था। फिर धीरे-धीरे सबसे अलग रहने लगा। किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। रात में देर तक मोबाइल चलाता था। वीडियो कॉल पर पंजाबी या उर्दू में बात करता था। उसकी बातें ज्यादा समझ में नहीं आती थीं। बात करते समय बगल से कोई गुजरता, तो वह मुंह फेर लेता था। वहीं, शाहरुख की मां ने रोते हुए कहा- बेटे को गलत फंसाया गया है। हमने उसे मेहनत से कमाना और जीना सिखाया है। गांववालों ने भी कहा- वह काफी मिलनसार था। किसी से कोई झगड़ा नहीं था। जिन लड़कों को हम कल तक खेतों में घूमते, मोबाइल पर रील बनाते देखते थे, उन्हीं पर अब आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है। ATS की जांच में सामने आया कि संदिग्धों की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आकिब जट्ट के नेटवर्क से हुई। वीडियो कॉल पर आदेश दिए जाते थे। कोडवर्ड में बात होती थी। पहले चारों संदिग्ध आतंकियों को जानिए अब चलते हैं संदिग्ध आतंकियों के गांव महकाब ने धीरे-धीरे गांव वालों से दूरी बनाई सहारनपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर सरसावा क्षेत्र का ढीक्का कला गांव है। गांव में 27 मई (बुधवार) की सुबह अचानक पुलिस, खुफिया एजेंसियों और मीडिया का जमावड़ा लग गया। तब लोगों के महकाब के आतंकी कनेक्शन का पता चला। ढीक्का कला गांव में जब हम पहुंचे, तो महकाब के घर के बाहर चारपाई पर उसके पिता हसरत मायूस होकर लेटे थे। हमारे पूछने पर कहने लगे- बेटा पंजाब में वेल्डिंग का काम करता था। घर आता था, तो खेती में हाथ बंटाता था। हमें तो कभी शक ही नहीं हुआ। परिवार खेती-किसानी करता है। हमारे पास करीब 10 बीघा जमीन है। घर सामान्य है और परिवार का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। महकाब के बारे में गांव के लोग भी बताते हैं कि वह शांत स्वभाव का था। लेकिन, पिछले कुछ महीनों में मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने लगा था। शाहरुख की मां रो-रोकर बोली- बेटे को फंसाया गया दूसरे संदिग्ध आतंकी शाहरुख के घर का माहौल भी तनावपूर्ण था। उसकी मां रोते हुए सिर्फ इतना कह पाई- बेटा तो देहरादून में टाइल्स लगाने का काम करता था। हम गरीब लोग हैं। हमें क्या पता कि इंस्टाग्राम पर कौन क्या करा देता है? मेरे बेटे को गलत फंसाया गया है। हमारा बेटा ऐसा नहीं है। हमने उसे मेहनत से कमाना और जीना सिखाया है। मेरे बेटे को फंसाया गया है। शाहरुख के परिवार के पास 11-12 बीघा जमीन है। गांववालों के मुताबिक, वह मिलनसार था और कभी किसी झगड़े में नहीं पड़ा। टीचर बोले- पैसे से गरीब नहीं, लेकिन मानसिक रूप से खाली सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और हरिद्वार बेल्ट से बड़ी संख्या में युवा मजदूरी करने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड जाते हैं। ज्यादातर युवाओं की जिंदगी अब मोबाइल और सोशल मीडिया के बीच सिमटती जा रही है। ग्राउंड पर बातचीत में एक बात बार-बार सामने आई कि इन युवकों के पास न स्थायी रोजगार है, न भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा। एक स्थानीय शिक्षक कहते हैं- ये लड़के आर्थिक रूप से बहुत गरीब नहीं हैं, लेकिन मानसिक रूप से खाली हैं। सोशल मीडिया इनकी दुनिया बन चुका है। इंस्टाग्राम पर कोई इन्हें भाई बोल दे, पैसे और विदेश के सपने दिखा दे तो ये जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। फिर ये आतंकियों के चंगुल में फंस जाते हैं। कट्टरपंथी नेटवर्क अब सीधे धार्मिक भाषणों की बजाय ‘डिजिटल फ्रेंडशिप मॉडल’ पर काम कर रहे हैं। पहले दोस्ती, फिर भावनात्मक जुड़ाव, फिर गोपनीय चैट और आखिरी में नेटवर्क से जोड़ना, यही नई रणनीति है। किसान ने कहा- पहले डर गलत संगत का था, अब मोबाइल का ढीक्का कला गांव में अब हर घर में एक ही चर्चा है कि क्या सोशल मीडिया गांवों तक आतंक का रास्ता बना चुका है? महकाब और शाहरुख के परिवारवालों का कहना है कि उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि उनके बच्चे किसी ऐसे नेटवर्क के संपर्क में हो सकते हैं। गांव के बुजुर्ग अब बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर चिंता जता रहे हैं। एक बुजुर्ग किसान ने कहा- पहले डर गलत संगत का होता था, नशे में फंसने का था। अब डर मोबाइल का है। आतंकी नेटवर्क ने संदिग्धों को बड़ी जिंदगी के सपने दिखाए ATS की जांच में सामने आया है कि महकाब और गगनदीप की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आकिब जट्ट के नेटवर्क से हुई थी। शुरुआत सामान्य चैटिंग से हुई। फिर वीडियो कॉल आने लगे। धीरे-धीरे बातचीत काम तक पहुंच गई। पहले इन युवकों को सोशल मीडिया पोस्ट, धार्मिक वीडियो और अन्याय से जुड़े कंटेंट भेजे गए। फिर उन्हें सिस्टम के खिलाफ लड़ाई और बड़ी जिंदगी के सपने दिखाए गए। पैसों और हथियारों का लालच भी दिया गया। बाद में इन्हें अस्पतालों, भाजपा कार्यालयों और संवेदनशील जगहों की रेकी करने को कहा गया। इन्हें ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने के आदेश भी दिए गए। वीडियो कॉल पर आदेश दिए जाते थे। बातचीत में कोडवर्ड्स का इस्तेमाल होता था और इंस्टाग्राम अकाउंट बार-बार बदले जाते थे। ADG बोले- नोएडा में चारों ने मीटिंग की थी एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने बताया- पाकिस्तानी गैंगस्टर आकिब जट्ट ने वीडियो कॉल पर चारों को देश में कई जगहों पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए भी कहा था। महकाब और गगनदीप ने ही शाहरुख और मुशर्रफ को अपने साथ जोड़ा था। इन चारों के बीच सोशल मीडिया पर अस्पताल उड़ाने के लिए रेकी और हथियार खरीदने की बात की जा रही थी। मार्च, 2026 में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए महकाब और गगनदीप ने नोएडा में मीटिंग की थी। मीटिंग में इनके बीच पैसे और हथियार लेने की बात हुई थी। पश्चिमी यूपी में हैंड ग्रेनेड से हमलों की साजिश रची जा रही थी ATS के मुताबिक, संदिग्धों को भाजपा कार्यालयों, अस्पतालों और कुछ कारोबारी ठिकानों की रेकी करने का टास्क मिला था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि पश्चिमी यूपी में कई जगहों पर हैंड ग्रेनेड हमलों की साजिश रची जा रही थी। हथियार और विस्फोटक POK से सप्लाई होने की आशंका जताई जा रही है। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि इन युवकों ने यूपी में किन-किन जगहों की रेकी की। सहारनपुर में सरसावा एयरबेस और आर्मी एरिया के कारण जांच और ज्यादा संवेदनशील हो गई है। यह सिर्फ खुद कट्टरपंथ की ओर नहीं बढ़ रहे थे, बल्कि अन्य युवाओं को भी जोड़ रहे थे। सोशल मीडिया के जरिए नए लड़कों को तलाशा जा रहा था। अब आतंकियों के निशाने पर बेरोजगार, भर्ती रणनीति बदली सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि आतंकी नेटवर्क अब ‘लो विजिबिलिटी मॉडल’ पर काम कर रहे हैं। वे ऐसे युवाओं को चुन रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आसानी से न आएं। कुछ साल पहले तक आतंकी संगठनों और पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क की रणनीति अलग थी। वे पढ़े-लिखे, तकनीकी जानकारी रखने वाले, हाईप्रोफाइल और प्रभावशाली युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते थे। डॉक्टर, इंजीनियरिंग छात्र, आईटी प्रोफेशनल और उच्च शिक्षित युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए ट्रेंड किया जाता था। अब आतंकियों का नया निशाना छोटे शहरों के मजदूर, बेरोजगार युवक, खेतों में काम करने वाले लड़के और सोशल मीडिया पर घंटों बिताने वाली गरीब पीढ़ी है। सहारनपुर से गिरफ्तार 4 युवकों की कहानी इसी बदलती रणनीति का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब शहजाद भट्टी को जानिए… दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच के अनुसार, भारतीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट को, हाल ही में सामने आए संगठन तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) का कथित मास्टरमाइंड बताया है। शहजाद भट्टी और गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई एक समय अच्छे दोस्त थे। लेकिन, भट्टी के लॉरेंस के गुर्गों से अपने काम करवाने और पहलगाम अटैक पर लॉरेंस की हाफिज सईद को धमकी के बाद वह एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए। लॉरेंस मूल रूप से पंजाब के फाजिल्का का रहने वाला है। उसने चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। इसके बाद उस पर कत्ल-फिरौती जैसे कई केस दर्ज हुए। 2 महीने में 12 से अधिक संदिग्ध पकड़े गए यूपी में बीते दो महीने में एजेंसियों ने 12 से ज्यादा संदिग्ध आतंकी पकड़े हैं। 4 अप्रैल को लखनऊ से 4 संदिग्ध पकड़े गए थे। ATS पूछताछ में सामने आया था कि पाकिस्तान से उन्हें ऑफर था कि तुम लोग दहशत फैलाओ, जितनी दहशत, उतना पैसा मिलेगा…। बड़े धमाके की फिराक में चारों संदिग्ध आतंकियों ने पिकअप और बाइक में आग लगाकर रिहर्सल की। इसके वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर को भेजे थे। बदले में उन्हें हर आगजनी पर 12 हजार रुपए मिलते थे। इसके बाद एटीएस ने 24 अप्रैल को 2 और संदिग्ध मेरठ के तुषार और दिल्ली के समीर खान को पकड़ा था। दोनों पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी, आबिद जट के संपर्क में थे। एटीएस के अनुसार, दोनों यूपी के एक्स मुस्लिमों को हैंड ग्रेनेड से मारने की प्लानिंग कर रहे थे। टारगेट किलिंग के लिए उन्हें 3 लाख रुपए की लालच दिया गया था। ————————————– 3 महीने पहले डॉक्टर मॉड्यूल सामने आया था, पढ़िए वो खबर… आतंकी अदील की पत्नी सर्जन, हनीमून पर जाने वाला था: शादी के 32वें दिन पकड़ा गया; सहारनपुर में अकेला रहता था, 5 लाख सैलरी
सहारनपुर से गिरफ्तार आतंकी डॉ. अदील अहमद और उसके साथियों की यूपी को दहलाने की साजिश थी। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े इन आतंकियों की बाकायदा ट्रेनिंग हुई थी। इसके बाद ये भारत आए और वेस्ट यूपी और दिल्ली से सटे इलाकों को अपना ठिकाना बनाया। सूत्रों के मुताबिक, जांच में पता चला कि डॉ. अदील के किराए के घर पर रात में 8 लोग आते थे। ये कौन हैं? सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
सहारनपुर से गिरफ्तार आतंकी डॉ. अदील अहमद और उसके साथियों की यूपी को दहलाने की साजिश थी। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े इन आतंकियों की बाकायदा ट्रेनिंग हुई थी। इसके बाद ये भारत आए और वेस्ट यूपी और दिल्ली से सटे इलाकों को अपना ठिकाना बनाया। सूत्रों के मुताबिक, जांच में पता चला कि डॉ. अदील के किराए के घर पर रात में 8 लोग आते थे। ये कौन हैं? सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…