मां बोलीं-बेटे की हत्या के बदले 8-करोड़ दे रहे थे:औलाद से बड़ा कोई समझौता नहीं; औरैया में पूर्व सपा MLC समेत 10 को हुई उम्रकैद

‘मंदिर में मेरे बेटे को मार दिया गया था। हम लोग घर पर थे। 6 साल बाद जो फैसला आया, उससे हम बहुत संतुष्ट हैं। हमारे सामने बहुत कठिनाइयां आईं। एक बेटे की हत्या हो गई, दूसरा बेटा कोर्ट के चक्कर लगाता रहा। हम लोगों पर समझौते का दबाव बनाया गया। कोई कहता 7 करोड़ देंगे, कोई कहता 8 करोड़ देंगे। समझौता कर लो, लेकिन औलाद से बढ़कर कोई समझौता नहीं है।’ यह कहते हुए वकील मंजुल चौबे की मां सरला चौबे की आंख में आंसू आ गए। औरैया में मंजुल और उनकी टीचर बहन सुधा चौबे की हत्या के मामले में कोर्ट ने पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक समेत 10 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसला आने के बाद दैनिक भास्कर टीम जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर नारायणपुर मोहल्ले में पहुंची। यहां हमने परिवार से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले जानिए पूरा मामला… औरैया में 15 जनवरी, 2020 को अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की गई थी। उनके घरवालों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया था। पुलिस पर भी हमला किया गया था। बुधवार (19 अगस्त) दोपहर 2 बजे MP-MLA कोर्ट ने सपा के पूर्व MLC कमलेश पाठक, उनके दो सगे भाइयों समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। कमलेश पाठक और मंजुल पहले दोस्त हुआ करते थे। मंदिर की एक बीघा जमीन को लेकर दोनों में रंजिश शुरू हुई थी। मंदिर की जमीन मनीराम बगिया के नाम से दर्ज थी। कमलेश पाठक ने गलत तरीके से बैनामा कराकर इसे अपने नाम करा लिया। इसका विरोध मंजुल के परिवार ने किया और बैनामा खारिज कर दिया। यहीं से दुश्मनी शुरू हुई। अब पढ़िए कोर्ट के फैसले पर घरवालों ने क्या कहा… नारायणपुर मोहल्ले में मंजुल चौबे का घर बना हुआ है। हम पहुंचे तो घर के बरामदे में पिता शिवकुमार चौबे, पत्नी सरला और 6 साल की नातिन आराध्या के साथ बैठे हुए थे। पिता की हत्या के समय आराध्या ढाई महीने की थी। पास में ही बहू और बेटी भी बैठी थीं। सभी के चेहरे पर फैसले को लेकर संतुष्टि थी। पूजा करने गए थे अचानक हमला हो गया पिता शिवकुमार घटना को याद करते हुए कहते हैं- हम लोग मंदिर में पूजा-पाठ करने जाते थे। उस दिन भी पूजा करने गए थे। इन लोगों को पता नहीं क्या सूझी गाली-गलौज करने लगे। कहने लगे कि तुम यहां पूजा नहीं करोगे, यह हमारी जगह है। अचानक बंदूक ले आए और गोली चलाने लगे। हमारे बेटे और भतीजी की मौत हो गई। पिता बोले- भाइयों ने हत्या का बदला लिया शिवकुमार कहते हैं- कोर्ट ने जो फैसला दिया, हम उससे संतुष्ट हैं। सरकार का धन्यवाद करते हैं। प्रशासन ने भी इसमें हमारा पूरा सहयोग किया। मैं तो कभी कोर्ट नहीं गया, लेकिन मेरे बेटे संजय और आशीष ने भरपूर पैरवी की। अपने भाई की हत्या का बदला लिया। 6 साल में पहली बार कोर्ट गए बेटे की हत्या के बाद 6 साल तक केस चला, लेकिन आज हम पहली बार कोर्ट गए थे। हमने हत्यारों की शक्ल भी नहीं देखी। उनकी शक्ल देखने की हिम्मत नहीं हुई। हमने बेटों को बताया और घर चले आए। वहां रुककर फैसला सुनने की हिम्मत हममे नहीं थी। बेटों ने ही फोन करके फैसले के बारे में जानकारी दी। ससुर बोले- बहू पागल जैसी हो गई थी शिवकुमार घटना को याद करते हुए कहते हैं- बेटे की हत्या के बाद बहू हमारी पागल जैसी हो गई थी। केवल एक टाइम खाना खाने लगी थी। हमारी पोती तो उस समय केवल ढाई महीने की थी। किस तरह से हमने परिवार को संभाला है। आज कोर्ट ने हमारे परिवार के साथ न्याय किया है। घटना को याद कर भावुक हुईं मां बेटी और बहू कैमरे पर बात करने को तैयार नहीं हुईं और घर के अंदर चली गईं। मां सरला देवी घटना को याद करते हुए भावुक हो गईं। फिर खुद को संभालते हुए बोलीं- कोर्ट के फैसले से आज बहुत संतुष्टि हुई। बहुत परेशानियां आईं। बहुत बार धमकी मिली। बहुत बार 7-8 करोड़ लेकर समझौते का दबाव बनाया गया। लेकिन, औलाद की मौत में कोई समझौता नहीं है। दो भाइयों ने मिलकर कोर्ट में पैरवी की मंजुल के परिवार में पिता शिवकुमार, मां सरला, बड़ा भाई संजय और एक बहन रश्मि के अलावा पत्नी आरती और ढाई महीने की बेटी आराध्या थे। रश्मि सरकारी टीचर हैं और उनकी उस समय शादी हो चुकी थी। वहीं, सुधा के परिवार में पिता अरविंद कुमार, मां गुड्‌डी देवी (अब मौत हो चुकी है), भाई आशीष चौबै और दो बहने थीं। दोनों बहनों की शादी हो गई थी। सुधा सरकारी टीचर थीं और उनकी शादी होनी थी। इस केस में पैरवी आशीष और संजय ने की। भाई बोला- मंदिर में घेरकर हमला किया कोर्ट का फैसला आने के बाद सुधा के भाई आशीष ने बताया- 15 मार्च, 2020 को मैं और मेरा पूरा परिवार पंचमुखी हनुमान मंदिर में पूजा करने गए थे। वहां कमलेश पाठक, उसके भाई संतोष पाठक, रामू पाठक, उनके साले और अन्य लोगों ने घेरकर हम पर हमला कर दिया था। इसमें हमारे भाई मंजुल और बहन सुधा की मौत हो गई थी। आज न्याय की जीत हुई है आशीष बताते हैं- हमारे बड़े भाई संजय चौबे के पैर में गोली लगी थी। मैं, मेरे पिताजी और मेरी दोनों बहनें भी घायल हुई थीं। सबसे पहले मैं प्रशासन का धन्यवाद करना चाहूंगा, जिन्होंने मेरा साथ दिया। ऐसे दुर्दांत अपराधी, जिसके खिलाफ 80-80 मुकदमे दर्ज हों और समाज में कोई कुछ कहने वाला न हो, उसके खिलाफ लड़ने की मुझे ताकत दी। मैं फैसले से संतुष्ट हूं। मुझे न्याय की उम्मीद थी और न्यायालय पर भरोसा था। आज न्याय की जीत हुई है। पढ़िए दो जिगरी दोस्त कैसे बने जानी दुश्मन कमलेश पाठक के बारे में जानिए ————————— यह खबर भी पढ़ें… सपा के पूर्व MLC, दो भाइयों समेत 10 को उम्रकैद, औरैया में वकील और उनकी टीचर बहन की सरेआम गोली मारकर हत्या की थी औरैया के बहुचर्चित वकील मंजुल चौबे और उनकी टीचर बहन की हत्या के मामले में 6 साल बाद फैसला आया। बुधवार दोपहर 2 बजे MP-MLA कोर्ट ने सपा के पूर्व MLC कमलेश पाठक, उनके दो सगे भाइयों समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। पढ़ें पूरी खबर…