‘हम 3 भाई और 2 बहनें हैं। पिताजी बीएलडब्ल्यू (बनारस रेल कारखाना) में नौकरी करते थे। महीने का वेतन महज 3 हजार रुपए था। बगल में कावेरी सरकारी स्कूल था। वहां यूनिफॉर्म मिलती थी। उसको हम स्कूल पहनकर तो जाते ही थे, साथ ही शादी-ब्याह और त्योहारों पर भी वही पहनना पड़ता था। शर्म आती थी, पर कोई रास्ता नहीं था। उसी समय सोच लिया था इसे बदलना है।’ ये बातें काशी के रहने वाले मैरीकॉम के कोच मुक्केबाज छोटेलाल यादव ने कहीं। इसके बाद वह काफी देर शांत रहे और कमरे में रखे अपने मेडल्स देखते रहे। छोटेलाल यादव को भारत सरकार ने प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए चुना है। ऐसे में दैनिक भास्कर छोटेलाल यादव के घर पहुंच कर उनके संघर्ष की कहानी जानी। साथ ही मैरीकॉम और अन्य मुक्केबाजों के साथ ट्रेनिंग सेशन के बारे में जाना। पढ़िए, एक स्कूल यूनिफॉर्म से गोल्ड मेडल तक की कहानी… पैसे न होने जींस नहीं ले पाया छोटेलाल बताते हैं- पिताजी के लिए 7 लोगों के परिवार को पालना मुश्किल था। हमारे पास पहनने को कपड़े नहीं थे। जब मैं पहली बार उज्बेकिस्तान खेलने गया, तब पिताजी से पैसे मांगे। पिताजी ने पीएफ से 5 हजार रुपए निकालकर मुझे दिए। जब इंडियन आर्मी में मेरा सिलेक्शन हुआ, तो मैंने पापा से जींस दिलाने को कहा। लेकिन, पैसे न होने की वजह से वो नहीं दिला पाए। मेरे अभावों ने मुझे मजबूत बनाया है। मैंने जो कुछ किया, पहले खुद के लिए, फिर देश के लिए किया। मैं अपने दादा के साथ अखाड़े जाता था छोटेलाल ने बताया- मुझे खेलने में रुचि थी। मैं अपने दादा के साथ अखाड़े जाता था। वहां लोगों ने कहा कि कुश्ती में कुछ नहीं है, दौड़ लगाओ। मैं दौड़ भी लगाने लगा, रनिंग करने लगा। एक दिन मुझे सूचना मिली कि सिगरा में स्विमिंग का ट्रायल है। मैं वहां गया। मैं वहां दौड़कर चला गया। वहां पर फर्स्ट आया। उसके बाद फिर वहां मेरा सिलेक्शन हुआ और मैं पुणे चला गया। जब मैं पुणे गया था, तो पहले मैंने स्विमिंग की। स्टार्टिंग में 6 महीने स्विमिंग की और महाराष्ट्र डिस्ट्रिक्ट में स्विमिंग में गोल्ड जीता था। लेकिन, मेरे सीनियर ने कहा कि मेरी बॉडी स्विमिंग के लिए नहीं, बॉक्सिंग के लिए है। इस पर मुझे खुद को स्विमिंग से चेंज करके बॉक्सिंग में लगाना पड़ा। इसके बाद मैंने खुद को बॉक्सिंग में झोंक दिया। 2015 से मैरीकॉम को ट्रेनिंग दे रहा हूं छोटेलाल यादव बताते हैं- 2015 से मैं मैरीकॉम को ट्रेनिंग दे रहा हूं। 2015 में चार्ल्स एक कोच थे। उनके साथ असिस्टेंट कोच के तौर पर मैंने मैरीकॉम को ट्रेनिंग दी। 2016 से 2022 तक मैंने उसे सिंगल हैंडेड कोचिंग दी है। मैं उनका पर्सनल कोच था। मैरी के साथ-साथ मैंने बच्चों को भी ट्रेनिंग दी है। मेरे लिए चैंपियन को चैंपियन बनाए रखना एक चैलेंज मैरी के साथ सबसे चैलेंजिंग यह था कि वो पहले से चैंपियन थी। मेरे लिए चैंपियन को चैंपियन बनाए रखना एक चैलेंज था। एक एज फैक्टर भी था। ऐसे में मुझे बहुत स्मार्टली ट्रेनिंग करानी पड़ती थी। उनके जितने बच्चे थे, सब ऑपरेशन से हुए थे। इसलिए मुझे ऑपरेशन के हिसाब से ट्रेनिंग करानी पड़ती थी, जिससे उसे इंजरी न हो। यह सिर्फ उसकी नहीं, मेरी भी परीक्षा थी। अगर मैं परफॉर्मेंस नहीं देता, तो मुझे भी आउट कर देते। मैरी बॉक्सिंग की लीजेंड है छोटेलाल यादव ने बताया- वह ऐसी प्लेयर है कि ट्रेनिंग के दौरान बहुत फोकस रहती है। अपनी परफॉर्मेंस से जवाब देती है, न कि बातों से। वो बॉक्सिंग की लीजेंड है। वो ऐसी प्लेयर है, जो हारने के बाद भी ट्रेनिंग करती है और जीतने के बाद भी। 2017 में मंगोलिया में मैरी का टूर्नामेंट था। ये मेरी ट्रेनिंग में उसका पहला टूर्नामेंट था, लेकिन वो क्वार्टर फाइनल में हार गई थी। अगले दिन मुझे लगा कि वो थकी होगी और ट्रेनिंग के लिए नहीं आएगी, लेकिन वो आई। हमने साथ मिलकर बहुत काम किया। उसके 2 महीने बाद एशियन चैंपियनशिप वियतनाम में थी। उसमें जिस लड़की से वो हारी थी, उसी को हराकर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था। जीतने के बाद अगले दिन वो फिर ट्रेनिंग के लिए आई थी। उस समय वो सांसद भी थी। मैं अभी इंडियन आर्मी में सूबेदार हूं छोटेलाल यादव ने बताया- मैं अभी इंडियन आर्मी में सूबेदार हूं। आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे में विमेन टीम को ट्रेनिंग दे रहा हूं। मैंने और कर्नल मनोज ने 2022 में आर्मी में अपने ऑफिसर्स से बात करके विमेन टीम शुरू कराई। इसके लिए मुझे बहुत संघर्ष करना पड़ा, बहुत फाइट करनी पड़ी। हमारी विमेन टीम में 4 लड़कियां हैं, जिन्हें हवलदार के तौर पर भर्ती कराया था। ये भारतीय सेना की ओर से बॉक्सिंग करती हैं। जैस्मिन पहली लड़की है, जिसने आर्मी विमेन टीम जॉइन की थी। इसके बाद साक्षी और फिर अरुंधति ने जॉइन किया था।
छोटेलाल यादव ने बताया- इस कंपनी के खुलने के बाद आर्मी से महिलाओं को खेलने का मौका मिला। आर्मी में बॉक्सिंग की विमेन टीम ही शुरू कराई थी। इसके शुरू होने के बाद से आर्मी में और कई चीजें शुरू हो गईं। अभी इंस्टीट्यूट, पुणे में गर्ल्स कंपनी खुल गई है। इसमें वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, आर्चरी ये सारी चीजों की ट्रेनिंग दी जाने लगी है। प्रेशर लेकर खेलोगे, तो अच्छा परफॉर्म नहीं होता छोटेलाल यादव बताते हैं- मैं जब छोटा था, तो बनारस के अखाड़े में दादाजी के साथ जाता था। दादाजी पहलवान थे, उनकी वजह से मैं कुश्ती करता था। लेकिन, बनारस से मैंने यही सीखा कि मस्त रहना है। जब तक आप ट्रेनिंग कर रहे हैं, पूरा फोकस रहिए। लेकिन, जब आप रिंग में लड़ रहे हैं तो मजे से लड़िए, एन्जॉय कीजिए। यह कोई बनारसी ही कर सकता है। क्योंकि जितना आप एन्जॉय करके खेलते हो, उतना ही अच्छा परफॉर्म करते हो। प्रेशर लेकर खेलोगे, तो अच्छा परफॉर्म नहीं होता। अब जानिए मैराकॉम के कोच छोटेलाल के बारे में वाराणसी के पहाड़ी गांव निवासी सुबेदार छोटेलाल यादव का जन्म 5 मई, 1988 को हुआ था। वह भारतीय सेना के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे से जुड़े रहे हैं। बॉक्सर के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतने के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। 2014-15 में एनआईएस पटियाला से बॉक्सिंग कोचिंग डिप्लोमा किया। इसके बाद 2015 से 2022 तक मैरीकॉम के पर्सनल कोच रहे। वर्तमान में वह आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे की एलीट महिला बॉक्सिंग टीम के कोच हैं। ————————— ये इंटरव्यू भी पढ़ें – आजम की पत्नी बोलीं- मुझे रातों-रात डकैत बना दिया, जौहर यूनिवर्सिटी बनाने में नियम नहीं तोड़े प्रोफेसर पद से रिटायर होने के बाद जब मैंने यूनिवर्सिटी का काम देखना शुरू किया, तब रातों-रात मेरे ऊपर 60-70 मुकदमे लगा दिए। मैं चोर भी हो गई और डकैत भी। अपराधियों के जो भी काम होते हैं, सब मुझसे जोड़ दिए गए।’ ये कहते हुए सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा भावुक हो गईं। उन्होंने कहा- रहा सवाल नक्शा पास नहीं होने का, तो DM-SSP के घरों के नक्शे भी पास नहीं होते हैं। पढ़िए पूरी खबर…
छोटेलाल यादव ने बताया- इस कंपनी के खुलने के बाद आर्मी से महिलाओं को खेलने का मौका मिला। आर्मी में बॉक्सिंग की विमेन टीम ही शुरू कराई थी। इसके शुरू होने के बाद से आर्मी में और कई चीजें शुरू हो गईं। अभी इंस्टीट्यूट, पुणे में गर्ल्स कंपनी खुल गई है। इसमें वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, आर्चरी ये सारी चीजों की ट्रेनिंग दी जाने लगी है। प्रेशर लेकर खेलोगे, तो अच्छा परफॉर्म नहीं होता छोटेलाल यादव बताते हैं- मैं जब छोटा था, तो बनारस के अखाड़े में दादाजी के साथ जाता था। दादाजी पहलवान थे, उनकी वजह से मैं कुश्ती करता था। लेकिन, बनारस से मैंने यही सीखा कि मस्त रहना है। जब तक आप ट्रेनिंग कर रहे हैं, पूरा फोकस रहिए। लेकिन, जब आप रिंग में लड़ रहे हैं तो मजे से लड़िए, एन्जॉय कीजिए। यह कोई बनारसी ही कर सकता है। क्योंकि जितना आप एन्जॉय करके खेलते हो, उतना ही अच्छा परफॉर्म करते हो। प्रेशर लेकर खेलोगे, तो अच्छा परफॉर्म नहीं होता। अब जानिए मैराकॉम के कोच छोटेलाल के बारे में वाराणसी के पहाड़ी गांव निवासी सुबेदार छोटेलाल यादव का जन्म 5 मई, 1988 को हुआ था। वह भारतीय सेना के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे से जुड़े रहे हैं। बॉक्सर के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतने के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। 2014-15 में एनआईएस पटियाला से बॉक्सिंग कोचिंग डिप्लोमा किया। इसके बाद 2015 से 2022 तक मैरीकॉम के पर्सनल कोच रहे। वर्तमान में वह आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे की एलीट महिला बॉक्सिंग टीम के कोच हैं। ————————— ये इंटरव्यू भी पढ़ें – आजम की पत्नी बोलीं- मुझे रातों-रात डकैत बना दिया, जौहर यूनिवर्सिटी बनाने में नियम नहीं तोड़े प्रोफेसर पद से रिटायर होने के बाद जब मैंने यूनिवर्सिटी का काम देखना शुरू किया, तब रातों-रात मेरे ऊपर 60-70 मुकदमे लगा दिए। मैं चोर भी हो गई और डकैत भी। अपराधियों के जो भी काम होते हैं, सब मुझसे जोड़ दिए गए।’ ये कहते हुए सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा भावुक हो गईं। उन्होंने कहा- रहा सवाल नक्शा पास नहीं होने का, तो DM-SSP के घरों के नक्शे भी पास नहीं होते हैं। पढ़िए पूरी खबर…