अखिलेश यादव की ‘PDA रथ यात्रा’ और उनके ‘भगोड़े को जीतने नहीं देंगे’ वाले बयान पर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे कहते हैं- ये लोकतंत्र का मजाक है। चुनाव विक्रमादित्य मार्ग से नहीं, बल्कि ऊंचाहार की जमीन पर लड़ा जाएगा। वहां की जनता 2027 में करारा जवाब देगी। सपा के गद्दार वाले तंज पर कहा- अगर भगवान राम, राष्ट्र और गरीबों के साथ खड़े होना गद्दारी है, तो मैं यह गद्दारी एक करोड़ बार करने को तैयार हूं…। सपा में अपने तीन दशकों के अनुभव, रायबरेली में हुई महाकथा पर उठे सवालों, राज्यसभा चुनाव के सरप्राइज और मुलायम सिंह यादव-अखिलेश यादव की कार्यशैली की तुलना पर मनोज पांडे से दैनिक भास्कर की खास बातचीत पढ़िए… सवाल. अखिलेश ने रायबरेली में कहा कि भगोड़े को जीतने नहीं देंगे। इशारा आपकी तरफ था? जवाब. मनोज पांडे राजनीति में इसलिए नहीं आए कि पैसे कमा लें। इसलिए भी नहीं आए कि ऐशोआराम करना है। हमारे पहले के कुछ साथी एक नाम से हमें नवाजते हैं…मनोज पांडे गद्दार। वो मनोज पांडे, जिन्होंने समाजवादी पार्टी के लिए पैर तुड़वाए, हाथ तुड़वाए, 29 बार जेल गए। सपा की 2012 की सरकार में एक वोट हमारा भी था। एक परसेंट का योगदान मेरा भी था। मैं गद्दार हूं या नहीं, यह देश तय करेगा। हम और आप नहीं तय करेंगे। सवाल. अखिलेश कह रहे कि जीतने नहीं देंगे…इस पर क्या कहेंगे? जवाब. यह लोकतंत्र का मजाक है। यह अहम है, घमंड है और इस बात को ध्यान रखिए। ये जनता है, सब सुनती-समझती है। यह कहकर आप एक विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं को चुनौती दे रहे हैं। ध्यान रखें, यह चुनौती मनोज पांडे को नहीं है। यह चुनौती ऊंचाहार के किसानों, गरीबों, पिछड़ों, दलितों, नौजवानों को है। हमारी माताओं-बहनों को है कि हम तुम्हारे काम करने वाले मनोज पांडे को जीतने नहीं देंगे। मुझे लगता है कि ऊंचाहार ने इस चुनौती को स्वीकार किया है। सवाल. अखिलेश ने कहा कि राज्यसभा में सरप्राइज देंगे। क्या सपा में कोई आपके संपर्क में है? जवाब. राजनीतिक दलों के लोगों को, उनके नेताओं को पार्टी का मनोबल बढ़ाकर उसको बचाने की जरूरत होती है। एक बहुत बड़े विचारक ने कहा है कि जब पार्टी संकट में हो। लोकतंत्र में जनता उसको बार-बार रिजेक्ट कर रही हो। उस समय किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनौती हो जाती है कि वो अपने कार्यकर्ताओं को बचाकर रखे। ऐसे में कुछ विरोधी दल इस तरीके की बातें करके कि हम सरकार बना रहे हैं। हम राज्यसभा में 5 सीटें जीतेंगे। हम विधान परिषद की सारी सीटें जीतेंगे। यह कहने में हमें कोई एतराज नहीं है। लेकिन, परिणाम की तिथियां भारत निर्वाचन आयोग ने जारी किया है। परिणाम भी आ जाएगा। उसे उत्तर प्रदेश देखेगा। सवाल. अखिलेश लगातार PDA के दम पर सरकार बनाने का दावा कर रहे। कैसे देखते हैं? जवाब. आज जो विपक्ष के लोग कर रहे हैं, अगर इनको सतयुग के मारीच देख लेते तो यहीं आत्महत्या कर लेते। 10 दिन पहले पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय महासचिव का बयान आया कि ब्राह्मणों से तो भली वेश्या है…। 10 दिन बाद आएगा कि P माने पंडित। 10 दिन बाद एक रथ निकलेगा। उस रथ पर P की तीसरी परिभाषा लिखी जाएगी। तो क्या उत्तर प्रदेश के लोगों को इतना अज्ञानी समझ रहे हैं? अब ठीक है, आपकी दुकान है। आप जो बेचना चाहें, जो ब्रांड का नाम रखना चाहें, आप बेचें सवाल. यूपी में ट्रेंड बन रहा है कि अलग-अलग नेता कथा करवा रहे हैं। क्या यह राजनीति है? जवाब. मैं नहीं समझ पा रहा कि आप उसको किस निगाह से देख रहे हैं। लेकिन, देश ने जिस निगाह से देखा, उससे तो मैं अभिभूत हूं। मैं भोले बाबा के चरणों में नतमस्तक हूं। उन्हें कैसे आभार प्रकट करूं कि एक अभूतपूर्व कथा, ऊंचाहार के लोगों ने मिलकर की। इसमें मैं भी एक कार्यकर्ता के रूप में रहा। जिस कथा में 35 लाख से ज्यादा लोग आए, हर दिन 7-8 लाख लोग रहते थे। आइए आप देखिए, PDA कहां है? PDA तो वहीं था। क्या पिछड़ा, क्या अगड़ा, क्या गरीब, क्या अमीर, एक साथ एक नारा, ओम नमः शिवाय, हर हर महादेव। यही तो सनातन है। सनातन को गाली देने वाले लोगों, सनातन को चोट करने वाले लोगों, शायद ऊंचाहार की कथा से आपकी आंख खुली हो। सवाल. आरोप लग रहे कि आपने कथा शक्ति प्रदर्शन और चंदे के लिए कराई? जवाब. जो राम को गाली देते-देते चढ़ावा चोरी के नाम पर गेरुवा पहन लेते हैं, 10 दिन बाद फिर गेरुवा निकाल कर फेंक देते हैं। कभी कारसेवकों पर गोली चलवा देते हैं, कभी सरयू का पानी कारसेवकों के रक्त से लाल कर देते हैं। कभी कोई और बात करने लगते हैं। उनको भगवान सद्बुद्धि दे, मैं इतना ही कह सकता हूं। सवाल. भाजपा में कहते हैं कि बबुआ (अखिलेश यादव) दोपहर 12 बजे सोकर उठते हैं? जवाब. नहीं… हम सपा में कार्यकर्ता रहे हैं। मुझे जब जरूरत होती थी, समय लेकर मिलता था। मैं रात्रि निवास रायबरेली में करता हूं। हां, मैं यह कह सकता हूं कि मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को काम करते देखा है। इसलिए मैं उन्हें उनसे रात 11:30 बजे भी बात की और सुबह 6 बजे भी। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के जीवन को मैंने देखा है। मैं दावे से कहता हूं मैं किसी की अनावश्यक बड़ाई करने के लिए आपके इस मंच पर नहीं आया हूं। सवाल. मतलब, जब आप सपा में थे तो आपकी कभी इतनी लेट बात नहीं हुई….? जवाब. नहीं, शेड्यूल जो दे दिया जाता है, वो शेड्यूल में आदमी बात करता है। हमारे यहां गृहमंत्री अगर कोई संकट आ जाए, तो 4 बजे सुबह भी बात करने आ जाते हैं। मुख्यमंत्री से रात 1 बजे भी बात हो जाती है। घटना घट गई थी, मैंने रात 1:00 बजे मुख्यमंत्रीजी से फोन पर बात की। सवाल. मुलायम और अखिलेश की राजनीति में क्या फर्क है? जवाब. दोनों में कुछ समानता ही नहीं है, तो अंतर बताया ही नहीं जा सकता। ————————— यह इंटरव्यू भी पढ़िए- रोहिणी बोलीं- चुनाव लड़ने नहीं, लड़वाने आई हूं, अखिलेश या कांग्रेस नहीं, वाल्मीकियों को हिस्सेदारी देने वाले को समर्थन देंगे स्विट्जरलैंड में 6 साल बिताने के बाद भारत लौटीं रोहिणी घावरी अब अपने वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने और स्विट्जरलैंड में 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। दिल्ली, हरियाणा और मेरठ के बाद वे लखनऊ पहुंचीं। पढ़िए पूरी खबर…